रूस- यूक्रेन युद्धः मारे गए लोगों की गिनती क्यों आसान नहीं है?

युद्ध में मारे गए रूस के तातार मुसलमान सैनिक इलनूर सिबगातुल की क़ब्र पर रखे फूल. उन्हें बुधवार को दफ़न किया गया

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यूक्रेन-रूस संघर्ष में एक चुनौती मारे गए लोगों की स्वतंत्र रूप से सटीक गणना करना भी है.

रूस और यूक्रेन दोनों ने ही एक दूसरे के हज़ारों सैनिकों को मारने के दावे किए हैं.

अब रूस ने स्वीकार किया है कि इस लड़ाई में 24 फ़रवरी के बाद से अब तक उसके क़रीब 500 सैनिक मारे जा चुके हैं.

यूक्रेन ने युद्ध में मारे गए अपने सैनिकों की ताज़ा संख्या तो नहीं बताई है लेकिन इतना ज़रूर कहा है कि उसके दो हज़ार से अधिक नागरिकों की मौत अब तक हो चुकी है.

हमें इन दावों पर शक़ क्यों करना चाहिए?

युद्ध के दौरान देश जानकारी का इस्तेमाल रणनीति की तरह करते हैं. जानकारी के ज़रिए किसी उद्देश्य के लिए समर्थन या विरोध जुटाया जा सकता है. ऐसे में हो सकता है कि बहुत सी गलत जानकारियां साझा की जा रही हों.

यूक्रेन को दुनिया के कई देशों का समर्थन मिल रहा है. यूक्रेन ये चाहेगा कि वो रूस के बिना उकसावे के किए गए हमले की वजह से हो रहे विनाश की व्यापकता दुनिया को दिखाए ताकि उसे जनसमर्थन मिल सके.

वहीं रूस के लिए, रूसी सैनिकों या यूक्रेन के आम नागरिकों की बड़ी तादाद में मौत की रिपोर्टें रूस में युद्ध विरोधी भावना को भड़का सकती हैं और इससे राष्ट्रपति पुतिन की सत्ता के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है.

ऐसे में विश्वनस्नीय सूत्र क्या हैं?

कीएव में हवाई हमले में मारे गए पदयात्री का शव ले जाते पुलिसकर्मी

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ऐसी स्थिति में संयुक्त राष्ट्र या मानवाधिकार समूह विश्वस्नीय जानकारी का स्रोत होते हैं, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध में वो भी सटीक जानकारी जुटाने में संघर्ष कर रहे हैं.

उनकी टीमों को अपने स्थान बदलने पड़े हैं और ख़राब सुरक्षा हालातों की वजह से वो मौकों पर जाकर नुकसान का सही आंकलन नहीं कर पा रहे हैं.

ये संगठन कई स्रोतों से जानकारी जुटाने के बाद ही संख्या जारी करते हैं. कार्यकर्ता ज़मीन पर जानकारी जुटाते हैं, चश्मदीदों से बात की जाती है, ओपन सोर्स इंवेस्टिगेशन का सहारा लिया जाता है और संस्थाओं और सरकारों की रिपोर्टों की समीक्षा की जाती है. इसके बाद मृतकों की अनुमानित संख्या जारी की जाती है.

ये सब करने में समय लगता है, इसी वजह से संयुक्त राष्ट्र का आंकड़ां आमतौर पर सरकार की तरफ़ से जारी आंकड़ों से कम होता है.

ख़ारकीएव में गोलीबारी से हुआ नुकसान, 1 मार्च 2022

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मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र ने अनुमान लगाया था कि अब तक के संघर्ष में कम से कम 136 आम नागिरक मारे गए हैं.

प्रवक्ता लिज थ्रोसेल ने कहा था कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज़्यादा हो सकती है.

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