यूक्रेन तनाव : रूस ने दी कुछ टुकड़ियां हटाने की जानकारी, पुतिन बोले-नहीं चाहते जंग

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यूक्रेन पर हमले के ख़तरों के बीच रूस ने मंगलवार को एलान किया कि वो यूक्रेन की सीमा से अपनी कुछ टुकड़ियों को हटा रहा है.
हालांकि यूक्रेन ने कहा है कि उसे रूस की बात पर तब विश्वास होगा, जब रूसी सैनिक वापस जाते दिखेंगे. वहीं, नेटो ने कहा है कि ये एलान 'उम्मीद जगाता' है हालांकि, अभी ऐसे सबूत नहीं मिले जिनसे रूस के दावे की पुष्टि हो सके.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वो जंग नहीं चाहते हैं और इसीलिए बातचीत का प्रस्ताव पेश किया है लेकिन 'अब तक रूस के प्रस्ताव पर कोई ठोस जवाब नहीं मिला है.'
इस बीच, एक अहम घटनाक्रम में रूसी संसद ने वोटिंग कर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन के दो गणराज्यों लुहानस्क और दोनेत्स्क की आज़ादी को मान्यता देने की अनुमति दे दी . इन दोनों गणराज्यों ने खुद को यूक्रेन से स्वतंत्र घोषित कर दिया था.
रूस ने इन दोनों गणराज्यों के 7,20,000 लोगों की अपनी नागरिकता दी है. यहां 2014 से विद्रोह शुरू हो गए थे. अगर पुतिन यूक्रेन से अलग हुए इन दोनों गणराज्यों को मान्यता दे देते हैं तो यह शांति समझौतों का उल्लंघन माना जाएगा.

रूस ने कहा, शर्मसार हुए पश्चिमी देश
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि उनके सैन्य अभ्यास जारी हैं लेकिन कुछ टुकड़ियां अपने आधार ठिकाने की ओर लौट रही हैं. हालांकि मंत्रालय के बयान में यह नहीं बताया गया है कितने सैनिक वापस लौट रहे हैं. ये भी साफ नहीं है कि इससे रूस-यूक्रेन के बीच तनाव कितना कम होगा.
रूस के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि 15 फरवरी 2022 का दिन इतिहास में दर्ज हो जाएगा क्योंकि पश्चिमी देशों का युद्ध का प्रोपगंडा नाकाम हो चुका है. हमारी ओर से बगैर कोई गोली चले वे शर्मसार और ध्वस्त हो चुके हैं.
यूक्रेन का दावे की पुष्टि से इनकार
यूक्रेन ने सैनिकों की वापसी के रूस के दावे की फिलहाल पुष्टि नहीं की है. यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने कहा, '' हमारा उसूल है कि हम जो सुनते हैं उस पर विश्वास नहीं करते. जो देखते हैं उस पर विश्वास करते हैं. जब हम रूसी सैनिकों की वापसी देखेंगे तभी मानेंगे कि तनाव कम हो रहा है.''
उन्होंने कहा कि यूक्रेन रूस के साथ अपने तनाव को और न बढ़ने देने के लिए मित्र देशों के साथ मिलकर कूटनीतिक कोशिश में लगा है.
इस बीच, ब्रिटेन ने कहा है कि कूटनीतिक बातचीत शुरू होने के संकेत दिख रहे हैं.लेकिन खुफिया जानकारियां बता रही हैं कि हालात उत्साह जगाने वाले नहीं है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने यूक्रेन पर इमरजेंसी कोबरा मीटिंग के बाद कहा कि रूस से इस वक्त 'मिले-जुले संकेत' मिल रहे हैं.
उन्होंने कहा, '' यूक्रेन के नजदीक रूस फील्ड अस्पताल बना रहा है. इसके साथ ही अतिरिक्त बटालियनों को सीमा के और नजदीक लाया जा रहा है. इसे हमले की तैयारी ही माना जा सकता है. रूस बड़ी तैयारियों में लगा है और किसी भी वक्त हमला कर सकता है.''
जॉनसन ने कहा, '' अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो रूसी बैंकों और कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे.''
नेटो ने क्या कहा?
रूस ने अपने कुछ सैनिकों की वापसी का जो एलान किया है, उस पर नेटो ने भी प्रतिक्रिया दी है. नेटो के महासचिव जेन्स स्टोलटनबर्ग ने कहा कि तनाव वास्तव में तब कम होगा जब बड़ी तादाद में रूसी सैनिक वापस जाएंगे और बॉर्डर से सैन्य साजो-समान को हटाया जाएगा. रूस ने हमले के लिए सबकुछ तैयार रखा है.
इस बीच, जर्मन चासंलर ओलाफ़ स्कोल्ज़ रूस पहुंच चुके हैं. वो जल्द ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे. जर्मनी की इस बात की आलोचना हो रही है कि वह रूस के प्रति नरम रवैया अपना रहा है. माना जा रहा है कि जर्मनी रूस से आने वाली नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइन परियोजना को रद्द नहीं करेगा. लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ये चेतावनी दे चुके हैं कि अगर रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो यह परियोजना रद्द कर दी जाएगी.

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उधर, यूरोपीय यूनियन ने कहा है कि वे रूस की सुरक्षा चिंताओं पर बात करने के लिए तैयार है. ईयू के विदेशी मामलों के प्रतिनिधि जोसफ बोरेल ने बीबीसी से कहा, '' सभी पक्षों की सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए एक मात्र रास्ता यही बचता है कि हम बैठ कर बातचीत करें.''
यूक्रेन के नेटो में शामिल होने की रूस की चिंताओं पर पर उन्होंने कहा, '' यह देश अभी इसका सदस्य नहीं है. हालांकि यह संभव हो सकता है लेकिन वास्तविकता यह है कि यूक्रेन फिलहाल नेटो का सदस्य नहीं है. ''
ब्रिटेन ने कहा कि रूस की ओर से यूक्रेन पर हमला न करने की बात पर तभी विश्वास होगा जब वह उसकी सीमा पर जमा अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लेगा.
हमले का ख़तरा
रूस ने अपने कुछ सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान तो किया है लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. पश्चिमी देशों ने इस पर अब तक सधी हुई प्रतिक्रिया ही दी है.
पिछले साल नवंबर में ही रूस ने यूक्रेन की सीमा पर अपने सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी थी. अब तक एक लाख से अधिक रूसी सैनिक वहां तैनात कर दिए गए हैं. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि रूस यूक्रेन पर कभी भी हमला कर सकता है.
रूस के यूक्रेन से सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रिश्ते हैं. वह नहीं चाहता है कि यूक्रेन नेटो में शामिल हो लेकिन पश्चिमी देशों का सैन्य गठबंधन नेटो यह गारंटी देने के लिए तैयार नहीं है कि वह यूक्रेन को नेटो में शामिल नहीं करेगा. अमेरिका ने कहा है कि रूस यूक्रेन पर हमला कर सकता है. इस वजह से उसने अपना दूतावास राजधानी कीव से हटा लिया है.

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क्या है रूस-यूक्रेन टकराव की असली वजह ?
रूस को डर है कि अगर पूर्व सोवियत गणराज्य यूक्रेन नेटो का सदस्य बना तो नेटो के ठिकाने उसकी सीमा के नज़दीक खड़े कर दिए जाएंगे. हालांकि नेटो ने रूस को भरोसा दिलाया है कि उससे उसको कोई ख़तरा नहीं है. यूक्रेन रूस से बचाव के लिए नेटो का सदस्य बनना चाहता है.
रूस और यूक्रेन के बीच विवाद को अभी नेटो से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन दोनों के बीच कई मौक़ों पर संघर्ष हो चुके हैं. इनमें 2014 की जंग भी शामिल है, जब रूस ने यूक्रेन से क्राइमिया छीनकर उस पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
लेकिन इस बार तनाव काफी बढ़ गया है. फिलहाल नेटो और रूस इस मामले का राजयनिक हल निकालने की कोशिश में लगे हैं.
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