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पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति को लेकर सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने क्या कहा - उर्दू प्रेस रिव्यू
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने कहा है कि सैन्य सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा का सिर्फ़ एक पहलू है और पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति एक ज़बरदस्त क़दम है.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शुक्रवार को पाकिस्तान की नई सुरक्षा नीति की घोषणा की थी. इस अवसर पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख भी मौजूद थे.
अख़बार जंग के अनुसार सुरक्षा नीति की घोषणा के बाद पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में जनरल बाजवा ने कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा के तमाम पहलुओं पर आधारित समग्र सुरक्षा नीति तय करना एक ज़बरदस्त क़दम है. यह नीति समग्र राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगी."
अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा नीति को सार्वजनिक किया गया है. राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का काफी हिस्सा गोपनीय रखा गया है, लेकिन जो बातें सार्वजनिक की गई हैं उनके अनुसार कश्मीर पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम बिंदु बना रहेगा और भारत के साथ उसका संबंध कश्मीर समस्या के समाधान पर निर्भर करेगा. लेकिन इस सुरक्षा नीति की ख़ास बात यह है कि इसमें आर्थिक सुरक्षा को केंद्रीय महत्व दिया गया है.
स्टेट बैंक बिल ढाका से बड़ा सरेंडर: विपक्षी पार्टियां
पाकिस्तान में विपक्षी पार्टियों ने इमरान ख़ान की सरकार पर हमला करते हुए कहा है कि स्टेट बैंक संशोधन बिल की मंज़ूरी ढाका के पतन से भी ज़्यादा बड़ा आत्मसमर्पण है.
1971 के भारत-पाक युद्ध में पाकिस्तान की 90 हज़ार से अधिक की सेना ने ढाका में भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण किया था.
अख़बार नई बात के अनुसार पाकिस्तानी संसद में बहस के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ख्वाज़ा मोहम्मद आसिफ़ समेत विपक्ष के कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार पर हमला करते हुए कहा, "स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान को गिरवी रख दिया गया है. विपक्षी पार्टियों के विरोध का सरकार पर कोई असर नहीं पड़ा. पूरा स्टेट बैंक आईएमएफ़ के मुंह पर मार दिया गया है. आपने जो किया है उससे पूरा देश शर्मिंदा होगा. आपने ढाका से बड़ा सरेंडर किया है."
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार मुस्लिम लीग (नून) के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने आईएमएफ़ को चेतावनी देते हुए कहा कि स्टेट बैंक समेत तमाम बिल वापस होंगे.
विपक्षी नेताओं ने कहा, "आईएमएफ़ के पास जाना गुनाह नहीं है, उसके सामने सरेंडर करना जुर्म है. आपको आने वाली नस्लें याद करेंगी कि आपने मुल्क को बेच दिया और उसकी आर्थिक स्वायत्ता ख़त्म कर दी."
विपक्ष ने इमरान ख़ान को आगाह कराते हुए कहा कि इस बिल को पास करवाकर इमरान ख़ान ने ख़ुद अपनी मौत के वारंट पर दस्तख़त कर दिया है.
विपक्ष का कहना है कि इस बिल के पास हो जाने से पाकिस्तान आईएमएफ़ का उपनिवेश बन जाएगा.
विपक्ष के अनुसार, "स्टेट बैंक पाकिस्तानी संसद के प्रति जवाबदेह नहीं होगा. वो सीधा आईएमएफ़ के क़ब्ज़े में चला जाएगा. इससे बिजली से लेकर पेट्रोल तक सब महंगा हो जाएगा."
लेकिन सरकार का कहना है कि विपक्ष का आरोप बेबुनियाद है.
वित्त मंत्री शौकत तरीन का कहना है कि इस बिल से स्टेट बैंक को अपने काम करने में और अधिक स्वतंत्रता ज़रूर मिलेगी लेकिन यह कहना ग़लत है कि वो पूरी तरह स्वायत्त हो जाएगा और सरकार का उस पर से नियंत्रण पूरी तरह ख़त्म हो जाएगा.
विदेशी निवेशकों को पाकिस्तान में स्थायी निवासी का दर्जा देने का फ़ैसला
पाकिस्तान ने अपने यहां निवेश करने वाले विदेशियों को स्थायी निवासी का दर्जा देने या पांच-दस साल तक रहने की इजाज़त देने का फ़ैसला किया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार एक लाख डॉलर या उससे अधिक निवेश करने वाले विदेशियों को स्थायी निवासी का दर्जा दिया जा सकता है या फिर उन्हें पांच-दस साल तक पाकिस्तान में रहने की इजाज़त दी जा सकती है.
केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. उनके अनुसार पाकिस्तान की सरकार तुर्की, मलेशिया, कनाडा और यूरोप के कई देशों में मौजूद क़ानून की तर्ज़ पर नियम बनाने के बारे में विचार कर रही है.
केंद्रीय मंत्री फ़व्वाद चौधरी के अनुसार नई सुरक्षा नीति के तहत पाकिस्तान इस तरह की योजना लागू करने के बारे में सोच रहा है.
वो कहते हैं कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस नीति के लागू हो जाने के बाद बहुत सारे सिख, अफ़ग़ान और चीनी लोग पाकिस्तान में निवेश करना चाहेंगे और उन्हें पाकिस्तान में स्थायी निवासी का दर्जा मिल सकेगा.
अर्थव्यवस्था बेहतरी की ओर: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार संयुक्त राष्ट्र की तरफ़ से अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में लगातार बेहतरी हो रही है.
रिपोर्ट के हवाले से अख़बार लिखता है कि साल 2021 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 4.5 फ़ीसद की विकास दर दर्ज की गई थी जबकि साल 2022 में विकास दर 3.6 फ़ीसद रहने का अनुमान लगाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जी-20 देशों की तरफ़ से क़र्ज़ अदायगी के मामले में पाकिस्तान को ज़्यादा छूट नहीं मिली. रिपोर्ट के अनुसार क़र्ज़ अदायगी के मामले में पाकिस्तान को 20 फ़ीसद कम छूट मिली जो कि जीडीपी के 1.6 फ़ीसद के बराबर है.
रिपोर्ट के मुताबिक़ अर्थव्यवस्था की बेहतरी और क़ीमतों में स्थिरता के लिए पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान को अपनी नीतियों में बदलाव के लिए फ़ैसले लेने की ज़रूरत है.
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