किम जोंग-उन बोले- उत्तर कोरिया के सामने 'जिंदगी और मौत का बड़ा संकट'

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उत्तर कोरिया के सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन ने कहा है कि इस साल देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को सुधारने के काम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा.
शुक्रवार को किम जोंग-उन ने कहा कि देश के सामने "जिंदगी और मौत का बड़ा संकट" खड़ा है इसलिए नए साल में अर्थव्यवस्था में सुधार राष्ट्रीय प्राथमिकता रहेगी.
किम जोंग-उन वर्कर्स पार्टी ऑफ़ कोरिया की आठवीं केंद्रीय कमिटी की बैठक की एक अहम बैठक को संबोधित कर रहे थे. बीते सप्ताह सोमवार को शुरू हुई ये बैठक शुक्रवार को ख़त्म हुई थी. ये बैठक ऐसे वक्त हुई जब उत्तर कोरिया में उनके शासन के 10 साल पूरे हो गए हैं.
कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए उत्तर कोरिया ने खुद पर पाबंदियां लगा ली थीं, जिसके बाद वहां से खाने के सामान की कमी की ख़बरें आने लगी थीं.
जनवरी 2020 में उत्तर कोरिया ने चीन के साथ सटी अपनी सीमा बंद कर दी थी.

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किम जोंग-उन ने अपने भाषण में सीधे तौर पर न तो अमेरिका का नाम लिया और न ही दक्षिण कोरिया का कोई ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा कि उनका मुख्य काम देश का विकास करना और लोगों की ज़िंदगियों को बेहतर बनाना है.
उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज़ एजेंसी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, किम जोंग-उन ने माना कि साल 2021 ने उनके सामने "बेहद मुश्किल परिस्थिति" खड़ी की. उन्होंने अपने लिए "देश के भोजन संकट, खाने की कमी और लोगों के रहने के लिए उचित घरों की ज़रूरत जैसे ज़रूरी काम" का उद्देश्य भी तय किया.
केसीएनए के अनुसार, उन्होंने कहा कि आने वाले साल में कोरोना महामारी से निपटना उनके अहम उद्देश्यों में से एक है. उन्होंने कहा, "देश के काम में महामारी से बचने के लिए इमर्जेंसी जैसे कदमों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी."
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि उत्तर कोरिया अपनी रक्षा काबिलियत को बढ़ाना भी जारी रखेगा, क्योंकि सैन्य स्थिति के हिसाब से कोरियाई प्रायद्वीप पर अभी भी अस्थिरता है.
बीते साल ख़बरें आई थीं कि उत्तर कोरिया में लोगों को खाने के सामान का गंभीर संकट झेलना पड़ रहा है और सर्दियों के शुरू होने के साथ वहां बड़े पैमाने पर खाद्य संकट हो सकता है.

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विश्लेषण: पहले भी कहा था देश के लिए 'मुश्किल वक्त'
श्रेयस रेड्डी, बीबीसी मॉनिटरिंग
बीते एक साल में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन ने लगातार देश की बदहाल आर्थिक स्थिति और खाने के सामान की कमी की बात पर ज़ोर दिया है. साल के आख़िर में हुई वर्कर्स पार्टी की बैठक में भी इन्हीं चुनौतियों पर चर्चा हुई.
साल 2022 के लिए किम जोंग-उन की "जिंदगी और मौत का बड़ा संकट" की चेतावनी बीते साल अप्रैल में दी गई उनके भाषण से मेल खाती दिखती है. उस वक्त उन्होंने 1990 के दशक के सबसे भयंकर आर्थिक संकट और सूखे की ज़िक्र किया था और अधिकारियों से "कठिन वक्त की तैयारी" के लिए कहा था.
इस तरह की तुलना स्थिति को बढ़ा चढ़ा कर दिखाने जैसा है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कोविड-19 के कारण सीमा बंद करने के फ़ैसले, उत्तर कोरिया पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों और प्राकृतिक आपदाओं के कारण देश की आर्थिक स्थिति हाल के दिनों में और बिगड़ गई है.
इन कारणों से देश में खाद्य संकट बढ़ा है. अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी उत्तर कोरिया में खाद्य संकट बढ़ने और भुखमरी की चेतावनी दी है.
हालांकि किम जोंग-उन ने राष्ट्रीय आर्थिक योजना, ग्रामीण विकास योजना और खेती के वैज्ञानिक तरीके अपनाने की बात की है. ये उत्तर कोरिया नागरिकों को बताता है कि उनके नेता अब उनकी ज़रूरतों को प्राथमिकता दे रहे हैं और अगले साल की आर्थिक चुनौतियों को लेकर उम्मीद दे रहे हैं.

नए साल के मौक़े पर किम जोंग-उन के भाषमों में अब तक दक्षिण कोरिया और अमेरिका का ज़िक्र रहता आया है, लेकिन इस बार अपने भाषण में सीधे तौर पर उन्होंने इनमें से किसी का नाम नहीं लिया.
सेजोंग इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ रीसर्चर चोंग सोंग-चांग ने एनके न्यूज़ को बताया, "पार्टी की बैठक में दिए गए इस भाषण को अगर हम उनके नए साल का भाषण मानें तो इसमें न तो दोनों कोरिया के बीच के रिश्तों का कोई ज़िक्र था और न ही देश की विदेश नीति का."
बीते साल के आख़िर में उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया, अमेरिका और चीन में इस बात को लेकर सैद्धांतिक तौर पर सहमति बनी थी कि युद्धविराम पर ख़त्म हुए कोरियाई युद्ध को वो औपचारिक रूप से ख़त्म घोषित करेंगे.
लेकिन दक्षिण कोरिया का कहना है कि इस मामले में अभी भी बातचीत नहीं हुई है, क्योंकि उत्तर कोरिया अपनी मांगों पर अड़ा है.
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