अफ़ग़ानिस्तान: तालिबान नेता मुल्ला बरादर ने अमेरिका की क्यों की है कड़ी निंदा

ग़नी बरादर

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान शासन के उप-प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर एक बार फिर सामने आए हैं और उन्होंने अमेरिका की कड़ी आलोचना की है.

बरादर ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की बैंकिंग संपत्ति पर रोक लगाने के अमेरिका के फ़ैसले पर दुनिया की चुप्पी की निंदा की. उन्होंने कहा कि देश में जब आर्थिक संकट बढ़ रहा है तब दुनिया चुप है.

काबुल में पत्रकारों से बात करते हुए बरादर ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में दिन प्रतिदिन आर्थिक कठिनाइयां बढ़ती ही जा रही हैं और आर्थिक चुनौतियां इस क्षेत्र और दुनिया को प्रभावित कर सकती हैं.

उन्होंने कहा कि अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान के साथ वैसे ही रिश्ते रहने चाहिए जैसे कि उसके बाक़ी देशों के साथ हैं.

बरादर ने और क्या कहा

बरादर

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पत्रकारों से बात करते हुए अब्दुल ग़नी बरादर ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने पर अमेरिका नाख़ुश है और जो लोग यहां पर अमेरिका के साथी थे वो आर्थिक दिक़्क़तें खड़ा करना चाहते हैं.

उन्होंने कहा, "वो पैसे जिस पर उन्होंने रोक लगाई है वो अफ़ग़ानिस्तान का था या ग़नी का था? दुनिया अमेरिका को यह क्यों नहीं बता रही है कि यह पैसा अफ़ग़ानिस्तान के लोगों का है न कि सरकारी अधिकारियों का."

"आर्थिक कठिनाइयां दिन प्रतिदिन बढ़ रही हैं. जब एक देश आर्थिक दिक़्क़तों में जकड़ जाता है तो वो सिर्फ़ उस देश पर असर नहीं डालता है बल्कि दूसरे देशों से भी उससे फ़र्क़ पड़ेगा. हमारी सिर्फ़ इतनी मांग है कि अमेरिका उसी तरह का व्यवहार अफ़ग़ान जनता और सरकार से करे जैसा वो बाक़ी दुनिया के साथ करता है."

बरादर का यह बयान व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी के बयान के बाद आया है.

जेन साकी ने क्या कहा था

जेन साकी

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अमेरिका में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने एक प्रेस कॉन्फ़ेंस के दौरान सोमवार को कहा था कि अफ़ग़ानिस्तान के जिन फ़ंड्स पर रोक लगाई गई है उनको जारी करने की कोई योजना नहीं है.

उन्होंने कहा था, "ऐसे बहुत से कारण हैं जो बताते हैं कि पैसे को कैसे पहुंच से दूर रखने की ज़रूरत है."

15 अगस्त को तालिबान के क़ब्ज़े के बाद अफ़गानिस्तान की 10 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति पर रोक लगा दी गई थी जो अधिकतर अमेरिका के बैंकों में है.

साकी ने बताया कि इस पर रोक लगाने के कुछ कारणों में से एक कारण 9/11 हमले के पीड़ितों के चल रहे क़ानूनी मामले हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका इस चीज़ पर काम कर रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में मानवीय संकट के बीच इस्लामी अमीरात के हाथ पैसा लगे बिना कैसे लोगों तक पैसा पहुंचाया जाए.

उन्होंने कहा, "अमेरिका लगातार उस मौलिक सवाल का सामना कर रहा है जिसके तहत अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को सीधा लाभ देने के लिए रिज़र्व फ़ंड्स को मुहैया कराया जा सके, जिसमें यह भी सुनिश्चित करना है कि उस फ़ंड्स से तालिबान को फ़ायदा न पहुंचे."

अफ़ग़ानिस्तान की बिगड़ती आर्थिक स्थिति

तालिबान

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अमेरिका का यह बयान तालिबान शासन के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्तक़ी के एक इंटरव्यू के बाद आया था.

एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी को दिए इंटरव्यू में मुत्तक़ी ने कहा था कि इस्लामी अमीरात अमेरिका के साथ अच्छे संबंध चाहता है और वॉशिंगटन को अफ़ग़ान संपत्तियों पर से रोक हटा देनी चाहिए.

इस समय अफ़ग़ानिस्तान की मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले बीते 20 सालों में अभूतपूर्व रूप से सबसे निचले स्तर पर है. इसके कारण अफ़ग़ानिस्तान में सामान के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान के लोग इस्लामी अमीरात और अमेरिका के बीच राजनीतिक समस्याओं की क़ीमत अदा कर रहे हैं.

सामाजिक कार्यकर्ता तोर्पिके मोमंद अफ़ग़ान समाचार चैनल टोलो न्यूज़ से कहते हैं, "दुनिया के देशों को मानवीय मदद को राजनीति से अलग रखना चाहिए. दुर्भाग्य से हम राजनेताओं की राजनीति का शिकार बन रहे हैं, और विदेशियों की नीतियों के पीड़ित हैं."

आर्थिक और मानवीय संकट के बीच संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में कहा था कि वो इस मुश्किल की घड़ी में अफ़ग़ानिस्तान के लोगों को अकेला नहीं छोड़ेगा.

(कॉपी: मोहम्मद शाहिद)

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