पर्ल हार्बर: एक हमला जिसने बदल दिया दूसरे विश्वयुद्ध का रुख़ और दो मुल्कों की क़िस्मत

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7 दिसंबर 1941 - इस दिन प्रशांत महासागर के बीच एक द्वीप समूह पर दो घंटे तक ऐसी बमबारी हुई जिसने दूसरे विश्व युद्ध का रुख़ मोड़ डाला. पर्ल हार्बर हमले की 80वीं बरसी पर आइए देखें कि क्या हुआ था उस दिन और कैसे इस हमले ने ना केवल महायुद्ध का समीकरण बल्कि इन दो मुल्कों - अमेरिका और जापान - की क़िस्मत को भी बदल दिया.

उस दिन जापान ने सुबह-सुबह हवाई द्वीप समूह पर स्थित अमेरिकी नौसेना के एक अड्डे पर सबको हैरान करते हुए हमला कर दिया.

बाक़ी दुनिया तब जंग में घिरी थी मगर अमेरिका इससे अलग था. जापान के इस हमले ने उसे हिला दिया और अमेरिका भी मित्र राष्ट्रों की ओर से युद्ध में लड़ने के लिए उतर गया.

जापान के इस हमले में पर्ल हार्बर पर तैनात अमेरिका के सभी आठ जंगी जहाज़ नष्ट हो गए. इनमें से चार डूब गए थे.

द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका की किसी ज़मीन पर यह पहला हमला था.

जापानी हमले में जलता अमेरिकी नौसेना का युद्धक जहाज़ यूएसस वेस्ट वर्जीनिया

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जापान के इस हमले में 2400 से ज्यादा अमेरिकी जवान मारे गए थे और 19 जहाज़ जिसमें आठ जंगी जहाज़ थे, नष्ट हो गए थे.

इसके अलावा 328 अमेरिकी विमान भी या तो क्षतिग्रस्त हुए थे या फिर पूरी तरह से नष्ट हो गए थे.

जापान ने एक घंटे और 15 मिनट तक पर्ल हार्बर पर बमबारी की थी.

इस हमले में 100 से ज्यादा जापानी सैनिक भी मारे गए थे. इसके बाद अमेरिका सीधे तौर पर दूसरे विश्व युद्ध में शामिल हो गया था और मित्र राष्ट्रों की ओर से उसने मोर्चा संभाल लिया था.

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अमेरिका का 'बदला'

1945 में अमरीका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर जब परमाणु बम गिराए तब इसे पर्ल हार्बर का बदला माना गया था.

रिलक्टेंट फ़ंडामेंटलिस्ट के लेखक मोहसीन हामिद ने एक बार कहा था, "जब जापानी सेना ने सात दिसंबर 1941 की सुबह पर्ल हार्बर पर हमला किया तो वह महज़ एक घटना नहीं थी. पर्ल हार्बर में कई अन्य चीज़ें भी शामिल थीं. ये एक चुंबन था, एक झील में तैरना था, यह मछुआरों का आश्चर्य भी था आख़िर कैसा हंगामा है, यह उड़ान लेने को तैयार पक्षियों का एक झुंड था."

ये हमला अमरीका के लिए बेहद चौंकाने वाला था क्योंकि उस दौरान वॉशिंगटन में जापानी प्रतिनिधियों की अमरीकी विदेश मंत्री कॉर्डेल हल के साथ जापान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को ख़त्म करने को लेकर बातचीत चल रही थी.

अमेरिका ने ये प्रतिबंध चीन में जापान के बढ़ते हस्तक्षेप के बाद लगाए थे.

ख़ुद पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों और चीन को मित्र सेना की मदद से नाराज़ हो कर ही जापान ने अमेरिका के ख़िलाफ़ युद्ध का एलान कर दिया था.

उसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति फ़्रैंकलीन डी रूज़वेल्ट ने भी जापान के ख़िलाफ़ लड़ाई की घोषणा कर दी थी.

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जापान-अमेरिका संबंध

पर्ल हार्बर के हमले ने दूसरे विश्वयुद्ध के समाप्त होने के बाद लंबे समय तक जापान और अमेरिका के संबंध और दोनों देशों के लोगों की ज़िंदगी बदल डाली.

2016 की मई में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे एक साथ हिरोशिमा गए और ये एक ऐतिहासिक घटना बन गई.

27 दिसंबर 2016 को पर्ल हार्बर में शिंज़ो आबे और बराक ओबामा

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बराक ओबामा अमेरिकी इतिहास के पहले कार्यरत राष्ट्रपति थे जिन्होंने उस जगह का दौरा किया जहाँ अमेरिका ने दुनिया का पहला परमाणु बम हमला किया था.

समझा जाता है कि 1945 में हिरोशिमा पर गिराए गए अमरेकी परमाणु बम से लगभग 150,000 लोगों की मौत हुई थी.

इसके कुछ महीने बाद, 2016 के दिसंबर में दोनों नेताओं ने एक और इतिहास बनाया.

पर्ल हार्बर हमले की 75वीं बरसी पर महायुद्ध के दौरान एक-दूसरे के ख़ून के प्यासे इन देशों के ये नेता एक साथ उस जगह पहुँचे जहाँ पर हुए हमले ने इतिहास बदल दिया.

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