सूडान में सेना ने किया तख़्तापलट, पीएम समेत कई नेता गिरफ़्तार, आपातकाल लागू

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सूडान में सेना ने अंतरिम सरकार का तख़्ता पलट करने के बाद देश की कमान अपने हाथ में ले ली है.
सेना ने इमरजेंसी (आपातकाल) का एलान करते हुए प्रधानमंत्री और दूसरे नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया है.
सूडान में अंतरिम सरकार चलाने वाली परिषद के प्रमुख जनरल अब्देल फतह अल बुरहान ने तख़्ता पलट के बाद देश को संबोधित किया और सेना और नागरिक प्रतिनिधियों के बीच सत्ता की साझेदारी के समझौते को तोड़ने का एलान किया. उन्होंने मंत्रिमंडल भंग करने का भी एलान किया.
जनरल बुरहान ने 10 फ़ैसलों की घोषणा करते हुए कहा, " जूबा में अक्टूबर 2020 में सूडान ने जिस शांति समझौते पर दस्तख़्त किए थे और जो वादे किए थे, वो इन फैसलों के बाहर रहेंगे. "
जनरल अब्देल फतह बुरहान ने सेना की कार्रवाई के लिए राजनीतिक स्तर पर जारी संघर्ष को ज़िम्मेदार बताया है. जनरल बुरहान नागरिक नेताओं के साथ संयुक्त मंत्रिमंडल की अगुवाई कर रहे थे.

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मुश्किल में देश
सेना की इस कार्रवाई के विरोध में राजधानी ख़ार्तूम की सड़कों पर प्रदर्शनकारी उतर आए. रिपोर्टों के मुताबिक राजधानी में गोलियां चलने की आवाज़ें भी सुनी गई हैं.
लंबे वक़्त से सूडान पर राज कर रहे उमर अल-बशीर को दो साल पहले सत्ता से हटाए जाने के बाद एक अंतरिम सरकार अस्तित्व में आई थी. तभी से सेना और नागरिक सरकार में तकरार की स्थिति बनी हुई थी.
सूडान आर्थिक संकट से जूझ रहा है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय से उसे मदद हासिल हो रही थी लेकिन सेना के तख़्तापलट के बाद पर इस मदद पर आशंका के बादल घिर गए हैं.

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सड़क पर उतरे लोग
विरोध प्रदर्शन के जो वीडियो सामने आए हैं उनमें प्रदर्शनकारी बेरिकेड्स को आगे लगाते दिख रहे हैं. प्रदर्शऩकारी सेना मुख्यालय के करीब पहुंचते दिख रहे हैं.
नेताओं की गिरफ़्तारी के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने राजधानी की कई सड़कों पर अवरोध लगा दिए.
हैतम मोहम्मद नाम के एक प्रदर्शनकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा,"सूडान में लोकतंत्र बचाने के लिए हम अपनी जान देने को तैयार हैं."

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इसके पहले सोमवार सुबह से मिली रिपोर्टों में बताया गया कि सूडान में सेना ने देश के प्रधानमंत्री और अंतरिम सरकार के कई मंत्रियों समेत कई सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया है. रिपोर्टों के मुताबिक प्रधानमंत्री अब्दल्लाह हमदोक को 'हाउस अरेस्ट' किया गया है.
सूडान के सूचना मंत्रालय ने गिरफ़्तार किए गए लोगों को रिहा करने और सरकार का तख़्ता पलटने की कोशिशों को रोकने की अपील की थी.
इसके बाद ख़बरें मिलीं कि सेना ने देश के सरकारी टीवी और रेडियो के मुख्यालय को भी अपने कब्ज़े में ले लिया है.
सूडान के सूचना मंत्रालय ने अपने फ़ेसबुक पेज पर जानकारी दी कि सेना ने एक कर्मचारी को गिरफ़्तार भी किया है.
उधर सूडान के प्रधानमंत्री के एक सलाहकार ने अल-अरबिया चैनल को बताया है कि अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि की मौजूदगी में सत्तारूढ़ परिषद के साथ समझौते के बाद भी तख़्तापलट हो गया है.

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देश के सूचना मंत्रालय ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया है, "देश एक पूर्ण सैन्य तख़्तापलट का सामना कर रहा है. हम लोगों से सेना के हस्तक्षेप को रोकने की अपील करते हैं."
अमेरिका ने कहा है कि वो सूडान में तख़्तापलट की ख़बरों से 'बेहद चिंतित' है.
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इंटरनेट बंद, सड़कों पर अफ़रा-तफ़री
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा है कि राजधानी ख़ार्तूम में इंटरनेट बंद है. सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे संदेशों में गुस्साई भीड़ सड़कों पर टायर जलाती दिख रही है.
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समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक चश्मदीद के हवाले से बताया है कि ख़ार्तूम में सेना और अर्धसैनिक बल तैनात हैं और लोगों की आवाजाही सीमित कर दी गई है.
ख़ार्तूम एयरपोर्ट भी बंद कर दी गई है और सारी अंतरराष्ट्रीय फ़्लाइट्स स्थगित कर दी गई हैं.

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लगातार कई बार तख़्तापलट की कोशिशें
लोकतंत्र समर्थक समूहों का कहना है कि सेना ने सुनोयिजत तरीके से इस तख़्तापलट को अंजाम दिया ताकि वो फिर से सत्ता में आ सके.
इस महीने अतंरिम सरकार के विरोधियों ने राजधानी ख़ार्तूम की सड़कों पर प्रदर्शन किया था और सेना के सत्ता अपने हाथों में लेने का समर्थन किया था.
फिर इसी गुरुवार को ही राजधानी ख़ार्तूम में हज़ारों लोगों ने अंतरिम सरकार के साथ एकजुटता दिखाते हुए भी मार्च किया था.
हालाँकि हाल के महीनों में अंतरिम सरकार को मिलने वाले समर्थन में कमी आई है क्योंकि सूडान की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुज़र रही है.
आज़ादी के बाद यानी साल 1956 से ही सूडान में राजनीतिक स्थिरता नहीं हासिल की जा सकी है और यहाँ तख़्तापलट की लगातार कई कोशिशें हो चुकी हैं.
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