सूडान: विद्रोही समूहों और सरकार के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता

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सूडान की सरकार और विद्रोही समूहों के बीच शनिवार को एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया. इस शांति समझौते के बाद दशकों से चल रहे विवाद के ख़त्म होने की उम्मीद की जा रही है जिसकी वजह से हज़ारों लोगों की जानें गईं और लाखों लोग विस्थापित हुए.
सूडान के राष्ट्रीय चैनल ने इस समझौते को ऐतिहासिक कहा है.
सूडान में दशकों से संघर्ष रहा है. साल 2011 में जब सूडान और दक्षिण सूडान अलग हुए तो आर्थिक संकट की वजह से विरोध प्रदर्शनों की शुरूआत हुई जिसकी वजह से 2019 में राष्ट्रपति उमर अल-बशीर को गद्दी छोड़नी पड़ी.
तबसे सूडान में नए सैन्य और ग़ैर-सैन्य नेता ही सत्ता साझा कर रहे थे और विद्रोही समूह यहाँ की सत्ता को लेकर सेना के साथ समझौते की कोशिश कर रहे थे.
इस बीच प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हिंसक झड़पों की ख़बरें आती रहीं और कई शव नील नदी से निकलते थे.

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देश की सेना में शामिल होंगे विद्रोही
इस साल अगस्त में तीन मुख्य समूहों ने दक्षिण सूडान की महीनों की मध्यस्थता के बाद एक शुरुआती समझौता भी किया था.
एक और ताक़तवर विद्रोही ग्रुप सूडान पीपल्स लिबरेशन मूवमेंट-नॉर्थ ने शुरूआती शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लिया था लेकिन पिछले महीने वो भी वार्ता में शामिल होने को राज़ी हो गया.
अमरीका के सूडान और दक्षिण सूडान के लिए दूत डोनल्ड बूथ ने कहा, "ये ऐतिहासिक उपलब्धि दशकों के विवाद और पीड़ा का समाधान है. इसके लिए समझौते को पूरी तरह बिना देरी के अटल और अटूट प्रतिबद्धता के साथ लागू करना होगा."
इस मौक़े पर इथोपिया के राष्ट्रपति, मिस्त्र और यूगांडा के प्रधानमंत्री भी मौजूद थे. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के कई अधिकारी भी शामिल हुए.
इस शांति समझौते में सुरक्षा, ज़मीन के हक़, न्यायिक प्रणाली और युद्ध से विस्थापित हुए लोगों की वापसी पर सहमति हुई है. साथ ही हथियारबंद विद्रोहियों को हटाकर देश की सेना में शामिल किया जाएगा.
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