सूडान और इसराइल के बीच रिश्ते सुधारने के लिए ऐतिहासिक समझौता

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सूडान और इसराइल के बीच रिश्ते सामान्य करने को लेकर ऐतिहासिक समझौता हो गया है. इसी के साथ इसराइल और अरब देशों के बीच हो रहे समझौतों में अब एक और देश का नाम जुड़ गया है.
इसी दौरान अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सूडान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की अमरीकी सूची से बाहर कर दिया है. इस सूची में शामिल होने पर आर्थिक मदद और निवेश रोक दी जाती है.
इससे पहले संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने हाल ही में इसराइल से शांति समझौता किया था. ये दो पहले ऐसे खाड़ी देश हैं जिन्होंने पिछले 26 सालों में पहली बार इसराइल को मान्यता दी.
सूडान, इसराइल और अमरीका के संयुक्त बयान के मुताबिक आने वाले हफ़्तों में एक प्रतिनिधिमंडल की बैठक आयोजित की जाएगी. इस बैठक में तीनों देश कृषि, विमानन और प्रवासन संबंधी मुद्दों पर चर्चा करेंगे. लेकिन, ये बैठक कब होगी इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
तीनों देशों के संयुक्त बयान के मुताबिक, ''सूडान और इसराइल के बीच संबंध सामान्य करने और टकराव ख़त्म करने को लेकर सहमती बनी है.''
1948 में इसराइल की स्वतंत्रता की घोषणा के बाद से मिस्र ने 1979 में और जॉर्डन ने 1994 में इसराइल के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसराइल के साथ अरब देशों के बढ़ते संबंधों की फ़लस्तीन ने आलोचना करता रहा है. फ़लस्तीन इन समझौतों को धोखा मानता है.
ऐतिहासिक तौर पर अरब देश कुछ शर्तों पर इसराल के साथ शांति समझौते की बात कहते रहते हैं. इन शर्तों में 1967 में इसराइल ने जिन इलाक़ों पर कब्ज़ा किया है उन्हें छोड़ना और फ़लस्तीन को पूर्वी येरुशलम राजधानी के साथ एक देश के तौर पर मान्यता देना शामिल है.

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कैसे हुआ ये फ़ैसला?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सूडान को आतंक प्रायोजित देशों की सूची से बाहर करने के थोड़ी देर बाद रिपोर्ट्स को राष्ट्रपति के ऑफ़िस (ओवल ऑफ़िस) ले जाया गया. यहां राष्ट्रपति ट्रंप सूडान और इसराइल के नेताओं के साथ फ़ोन पर बातचीत कर रहे थे.
इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने इस समझौते को लेकर कहा है कि ये 'शांति के लिए एक आकस्मिक सफलता' और एक 'नए युग' की शुरुआत है.
सूडान के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला हमदोक ने उनके देश को आतंकवाद की सूची से हटाने के लिए अमरीका का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि सुडान सरकार ऐसे अंतरराष्ट्रीय संबंधों की ओर काम कर रही जिसमें उनके लोगों का सबसे ज़्यादा हित हो.
सूडान के सरकारी न्यूज़ चैनल ने कहा है कि इससे 'टकराव की स्थिति' ख़त्म हो जाएगी.
दोनों देशों के नेताओं से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, 'क्या आपको लगता है कि 'स्लीपी जो' (सुस्त जो) ये समझौता कर पाते? मुझे ऐसा नहीं लगता.'
राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिद्वंद्वी और रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जो बाइडन के लिए उनके विरोधी 'स्लीपी जो' नाम का इस्तेमाल करते हैं.
इसके जवाब में बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा, ''राष्ट्रपति जी, मैं आपको एक बात कह सकता हूं कि हम शांति के लिए अमरीका से किसी की भी मदद की सराहना करते हैं.''
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अमरीकी चुनावों से पहले हुए समझौते को राष्ट्रपति ट्रंप की विदेश नीति की सफलता के तौर पर देखा जा रहा है. बीबीसी संवाददाताओं का कहना है कि इस फ़ैसले की घोषणा का समय कोई इत्तेफाक नहीं है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि सऊदी अरब भी इसराइल के साथ संबंधों को सामान्य करेगा.
हालाँकि, फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस समझौते की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि फ़लस्तीन की ओर से बोलने का अधिकार किसी के पास नहीं है.
फ़लस्तीन के चरमपंथी संगठन हमास ने इस समझौते को 'राजनीतिक गुनाह' कहा है.
इस दौरान इसराइल ने कहा है कि वो अमरीका के यूएई को हाई-ग्रेड मिलिट्री हार्डवेयर बेचने का विरोध नहीं करेगा.
अमरीका ने इसरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने के बाद यूएई को एफ-35 लड़ाकू जेट खरीदने की अनुमति देने पर विचार करने की सहमति जताई थी.

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सूडान और इसराइल के संबंध
1948 में इसराइल के बनने के बाद से ही सूडान और इसराइल के बीच दुश्मन देशों के संबंध रहे हैं.
सूडान ने 1948 और 1967 में इसराइल के ख़िलाफ़ युद्ध लड़ा था. साथ ही फ़लस्तीन के गुरिल्ला लड़ाकों के लिए ये स्वर्ग भी माना जाता है.
लेकिन, सूडान में राजनीतिक हालात तब बदले जब पिछले साल सुडान में तीन दशक से शासन कर रहे ओमर अल-बशीर का तख़्तापलट हो गया और उनकी जगह सिविलियन मिलिट्री काउंसिल ने ले ली.
इसके बाद इसराइल के संबंध सुधारने की शुरुआत हुई ताकि अमरीकी प्रतिबंधों को हटाया जा सके और सूडान को आर्थिक मदद मिल सके.
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