ओलंपिक के दौरान भी जारी है जापान-दक्षिण कोरिया की राजनीतिक लड़ाई

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, श्रेयर रेड्डी
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
टोक्यो ओलंपिक खेल 23 जुलाई को शुरू हो गए हैं. लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया के बीच लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक गतिरोध दोनों देशों के ख़िलाड़ियों के प्रदर्शन पर हावी हो सकता है.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन ओलंपिक समारोह में शामिल नहीं हुए. उन्होंने जापानी प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा के साथ पहली संभावित वार्ता भी टाल दी. ये देनों देशों के बीच विवादों में सबसे ताज़ा है.
20वीं शताब्दी के शुरुआती सालों में जापान ने कोरियाई प्रायद्वीप पर क़ब्ज़ा किया था, ये तनाव तब ही, या उससे पहले, पैदा हुआ था और अब टोक्यो ओलंपिक में भी दिखाई दे रहा है.
ओलंपिक खेल गाँव में भले ही खिलाड़ी अपने सपने पूरे करने में जुटे हों, औपनिवेशिक काल का ये तनाव और राष्ट्रीय गौरव की भावना स्पष्ट नज़र आ रही है.
जापान और दक्षिण कोरिया की मीडिया में कई सप्ताह से कयास लगाए जा रहे थे कि कोरियाई राष्ट्रपति मून जे इन ओलंपिक समारोह में शामिल होंगे. लेकिन 19 जुलाई को उन्होंने घोषणा कर दी कि वो नहीं जाएँगे.
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से कहा गया कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक मतभेदों और भविष्य में सहयोग को लेकर गंभीर वार्ता हुई है लेकिन अभी दोनों देशों के बीच इतनी प्रगति नहीं हुई कि ये समझा जा सके कि मून और सूगा की वार्ता से कुछ ठोस निकल पाएगा.
मून का ओलंपिक समारोह में शामिल न होने का फ़ैसला इससे पिछले सप्ताह जापानी राजदूत के विवादित बयान के नतीजे में लिया गया हो सकता है.
सोल में जापान के दूतावासा के डिप्टी चीफ़ ऑफ़ मिशन हीरोहीशा सोमा ने कथित तौर पर दक्षिण कोरियाई पत्रकार से कहा कि जापान के पास इतना समय नहीं है कि वह कोरिया के साथ द्विपक्षीय रिश्तों का ध्यान रखे.
आपत्ति

इमेज स्रोत, EPA
दक्षिण कोरिया ने जापान के राजदूत को बुलाकर अपना विरोध दर्ज करवाया वहीं जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि एक राजनयिक को इस तरह की टिप्पणी शोभा नहीं देतीं.
सरकारी सूत्रों के हवाले से जापान की समाचार सेवा क्योडो न्यूज़ ने दावा किया कि जापान सूमा को दक्षिण कोरिया से वापस बुलाने पर विचार कर रहा है. हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी.
इस ताज़ा विवाद का नतीजा ये निकला कि मून और सुगा के बीच होने वाली पहली संभावित वार्ता टल गई. दोनों देशों को ओलंपिक के बहाने संबंध सुधारने की उम्मीद थी.
दोनों नेताओं के पास अब आगे बहुत वक्त भी नहीं होगा. मून का कार्यकाल अगले साल समाप्त हो रहा है और सुगा को तो इसी साल चुनावों का सामना करना है. लेकिन कूटनीति अपनी जगह चलती रहेगी.
भले ही दोनों देशों के नेताओं के बीच पहली वार्ता टल गई हो लेकिन अमेरिका की मदद से दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तो वार्ता चल ही रही है.
अमेरिका इस क्षेत्र में एक बड़ा खिलाड़ी है. तीनों देशों के अधिकारी मिलकर काम कर रहे हैं ताकि 'हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र और मुक्त सहयोग' चलता रहे.
दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के राजनयिक अधिकारी तीनों देशों के बीच संबंधों को मज़बूत बनाए रखने में जुटे हुए हैं.
उपनिवेशवाद की विरासत

इमेज स्रोत, Getty Images
सोमा की टिप्पणी भले ही दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया का कारण बनीं हो लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव की जड़े गहरी हैं. ऐतिहासिक कारणों और व्यापारिक विवादों की वजह से दक्षिण कोरिया और जापान के संबंधों मे लंबे समय से तनाव है.
जापानी साम्राज्य ने साल 1910 से 1945 के बीच कोरियाई प्रायद्वीप को अपना उपनिवेश बनाए रखा. उस समय कोरियाई प्रायद्वीप बँटा नहीं था. दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने कोरियाई लोगों पर ज़ुल्म किया, जिसकी यादें अभी ताज़ा हैं.
युद्ध के दौरान जापान ने कोरियाई युद्धबंदियों से ज़बरदस्ती काम करवाया और कोरियाई महिलाओं को जापानी सैनिकों के आनंद के लिए वेश्यावृत्ति में धकेल दिया. इन महिलाओं को कंफर्ट वीमेन कहा जाता है.
ज़बरदस्ती श्रम के दक्षिण कोरियाई पीड़ितों ने हाल के सालों में जापानी कंपनियों पर हर्जाने के मुक़दमे ठोके हैं. वेश्यावृत्ति की पीड़ित महिलाओं ने भी जापान को क़ानूनी चुनौती दी है.
वहीं जापान ये कहता रहा है कि साल 1965 में हुए समझौते के तहत इन मुद्दों का पूरी तरह समाधान हो चुका है. लेकिन मून प्रशासन का मानना है कि अभी इस दिशा में और भी बहुत कुछ किया जाना है.
कंफर्ट वीमेन के मुद्दे पर जापान और दक्षिण कोरिया में हमेशा विवाद रहा है.
दक्षिण कोरियाई प्रशासन वाला एक द्वीप समूह भी विवाद का केंद्र हैं. लियानकोर्ट रॉक्स नाम के इन द्वीपों को कोरिया डोक्डो कहता है जबकि जापान ताकेशीमा पुकारता है.
इन द्वीपों पर जापान भी अपना दावा ठोकता है.

इमेज स्रोत, EPA
मई में जब टोक्यो 2020 ओलंपिक खेलों की वेबसाइट पर जापान ने इन द्वीपों को अपना हिस्सा दिखाया तो दक्षिण कोरिया ने इसका विरोध किया.
दक्षिण कोरिया के कुछ नेताओं ने तो ओलंपिक के बहिष्कार तक का सुझाव दे डाला था.
हालांकि दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रालय ने बहिष्कार की बात को तो नकार दिया लेकिन इन द्वीपों पर अपने देश के दावे को फिर से मज़बूती से पेश किया.
नतीजतन ओलंपिक के आयोजकों ने वेबसाइट पर जारी नक़्शे से इस द्वीप समूह को ही हटा दिया लेकिन जब दक्षिण कोरियाई लोगों को इसका पता चला तो उन्होंने फिर से विरोध किया.
हालांकि 2018 में जब प्योंगचांग में विंटर ओलंपिक का आयोजन हुआ था तो दक्षिण कोरियाई सरकार ने भी जापान के विरोध के बाद अपने झंडे से इन द्वीपों को हटा दिया था.
वहीं टोक्यो 2020 के नक़्शे में लियानकोर्ट रॉक्स को जापान का हिस्सा दिखाने की दक्षिण कोरियाई संसद ने एक सुर में आलोचना की.
टोक्यो ओलंपिक में दिख रही है ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता
ओलंपिक खेल गांव में भी दोनों देशों के बीच का ऐतिहासिक तनाव नज़र आ रहा है.
दक्षिण कोरियाई खेल दल के खेलगांव पहुंचने से पहले ही खिलाड़ियों के निवास स्थल विवाद के केंद्र में आ गए थे.
'मेरे पास अब भी पांच करोड़ कोरियाई लोगों का समर्थन है' लिखे बैनर दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों की खिड़कियों के बाहर टांग दिए गए थे. ये चर्चित कोरियाई एडमिरल यी सन-शिन के संदर्भ में थे.
1597 में हुए एक युद्ध से पहले उन्होंने कहा था, 'मेरे पास अब भी 12 जंगी जहाज़ हैं.' उन्होंने इस युद्ध में जापान की 300 जंगी जहाज़ों के बेड़े को हरा दिया था.
जापानी कार्यकर्ताओं ने इन बैनरों का विरोध किया था. ओलंपिक समिति ने इन्हें राजनीतिक प्रोपेगैंडा कहकर हटवा दिया था.

इमेज स्रोत, EPA
दक्षिण कोरिया ने 17 जुलाई को ये बैनर तो हटा दिए लेकिन इनकी जगह कोरियाई प्रयाद्वीप की आकृति में एक टाइगर की तस्वीर वाले बैनर लगा दिए. उपनिवेश काल के दौरान ये टाइगर कोरियाई राष्ट्रवाद का प्रतीक था. बैनर पर लिख दिया गया- द टाइगर इज़ कमिंग.
दक्षिण कोरियाई ओलंपिक समिति का कहना है कि वह बैनर हटाने पर इसलिए राजी हो गई क्योंकि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने कट्टरवादी जापानी लोगों को जापानी साम्राज्य के दौर के राइज़िंग सन फ्लैग (उगते हुए सूरज वाला जापानी झंडा) के इस्तेमाल से रोक दिया था. कोरियाई लोग लंबे समय से इसका विरोध कर रहे थे.
हालांकि खेल के आयोजकों का कहना है कि इस झंडे का इस्तेमाल करने दिया जा सकता है क्योंकि ये डिज़ाइन जापान में काफी सामान्य है और इसके पीछे कोई राजनीतिक संदेश नहीं है.
दक्षिण कोरियाई खिलाड़ियों के फ्लैट में इस समय टाइगर की तस्वीर वाला बैनर लगा है.
दक्षिण कोरियाई ओलंपिक समिति ने अपने खिलाड़ियों के लिए आने वाले भोजन की स्क्रीनिंग करके और खिलाड़ियों के लिए अपने किचेन में खाना तैयार करने का निर्णय लेकर भी विवाद पैदा कर दिया है.
ऐसा फुकुशिमा से आ रहे खाद्य पदार्थों के चलते किया जा रहा है. फुकुशिमा में 2011 में आई सुनामी के बाद परमाणु केंद्र में विकरण हुआ था.

इमेज स्रोत, Getty Images
जापान का कहना है कि ओलंपिक खेलों में आ रही खाद्य सामग्री सुरक्षित और सेहतमंद है.
जापानी सांसद मसाहीसा सातो ने एक बयान में कहा है कि दक्षिण कोरिया ने जो किया है वो फुकुशिमा के लोगों के ज़ख़्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.
दोनों देशों के बीच भले ही विवाद कितना ही गहरा क्यों ना हो, खिलाड़ियों का पूरा ध्यान बेहतर से बेहतर प्रदर्शन करने पर है.
यही वजह है कि तमाम विवाद के बावजूद खेल का मैदान एकजुटता दिखानों का अवसर भी बन जाता है.
दक्षिण कोरिया के सिर्फ़ आज के दौर के ख़िलाड़ी ही राजनीतिक विवाद में नहीं घसीटे जा रहे हैं. जापान की ओलंपिक समिति ने कोरियाई मूल के आठ ओलंपिक एथलीटों को जापानी दिखाया है. इन्होंने उपनिवेश काल के दौरान जापान का प्रतिनिधित्व किया था. कोरियाई कार्यकर्ताओं का कहना है कि बिना ऐतिहासिक संदर्भ दिए ऐसा करना सही नहीं है.
कोरियाई सरकार के फंड से चलने वाले एक ऑनलाइन नेटवर्क ने जापान की ओलंपिक समिति से इस ग़लती को सुधारने के लिए कहा है. दबाव बनाने के लिए ये नेटवर्क ऑनलाइन अभियान भी चला रहा है जिसमें दक्षिण कोरिया के लोगों को जोड़ा जा रहा है.

इमेज स्रोत, Getty Images
इन एथलीटों में सबसे चर्चित मैराथन धावक सोन की चुंग हैं जिन्होंने 1936 ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने के बाद जापान के राष्ट्रगान को गाने से इनकार कर दिया था.
उन्होंने उपहार में मिले एक तोहफे से अपनी पोशाक पर लगे जापानी झंडे को छुपाने की कोशिश भी की थी.
दिवंगत एथलीट सोन की चुंग अब भी अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति की वेबसाइट पर जापानी एथलीट कीटेई सोन के नाम से दिखाई देते हैं. जापान ने उन्हें इसी नाम से खेलों में शामिल होने के लिए कहा था.
हालांकि वेबसाइट पर उनकी कोरियाई पहचान और उनके नाम को लेकर विवाद का भी ज़िक्र है.
सोन की चुंग की विरासत अभी ज़िंदा है. अब स्वतंत्र कोरिया के झंडे तले कोरियाई एथलीट ओलंपिक में पदक जीतने के प्रयासों में जुटे हैं.
जापान और दक्षिण कोरिया के बीच तनाव राजनीतिक मैदान में चल रहा है.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

















