चीन आया क्यूबा के बचाव में, हालात के लिए अमेरिका को बताया ज़िम्मेदार

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चीन ने क्यूबा में हो रहे विरोध प्रदर्शनों को लेकर वहाँ की सरकार का समर्थन किया है और किसी भी बाहरी दखल की कड़ी आलोचना की है.
साथ ही चीन ने क्यूबा पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने की वकालत भी की और उन्हें क्यूबा में दवाइयों और खाने-पीन के सामान में आ रही परेशानियों की वजह भी बताया.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा- "हमने देखा कि 11 जुलाई को क्यूबा में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति मिगेल दियाज़ कनेल प्रदर्शनकारियों की बात सुनने मौक़े पर पहुँचे और उन्होंने 12 जुलाई को लोगों को टीवी पर संबोधित भी किया."
चाओ लिजियान ने कहा कि जैसा कि क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि देश में दवाइयों और ऊर्जा की कमी के पीछे अमेरिकी प्रतिबंध ज़िम्मेदार हैं. लगातार 29वें वर्ष, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारी बहुमत के साथ एक प्रस्ताव स्वीकार किया है, जिसमें अमेरिका के क्यूबा पर लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों को समाप्त करने का आह्वान किया गया है.
उन्होंने कहा कि चीन क्यूबा के आंतरिक मामलों में बाहरी दखल का कड़ा विरोध करता है. साथ ही कोविड-19 से लड़ने, लोगों की आजीविका में सुधार करने और सामाजिक स्थिरता लाने में क्यूबा के प्रयासों का पुरजोर समर्थन करता है. क्यूबा को उसकी राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुकूल विकास का रास्ता खोजने में भी दृढ़ता से समर्थन देता है.
चाओ लिजियान ने ये भी कहा, ''मैं इस बात पर ज़ैर देना चाहता हूँ कि चीन दोनों राष्ट्राध्यक्षों की महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने के लिए क्यूबा के साथ काम करने के लिए तैयार है और दोनों देशों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को गहरा करने के लिए दृढ़ता से प्रतिबद्ध है.
झाओ चाओ लिजियान ने ये बातें एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहीं. उनसे क्यूबा के राष्ट्रपति के टीवी पर दिए गए संबोधन को लेकर सवाल पूछा गया था.

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क्यूबा के राष्ट्रपति ने क्या कहा
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल दियाज़ कनेल ने टीवी पर एक संबोधन के दौरान क्यूबा में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के लिए बाहरी तत्वों को ज़िम्मेदार बताया था.
उन्होंने कहा कि 11 जुलाई को सरकार विरोधी कार्रवाई बिल्कुल भी अचानक नहीं हुई थी. कुछ क्यूबा विरोधी तत्व आजीविका में सुधार के बहाने क्यूबा के लोगों की शांतिपूर्ण ज़िंदगी को बिगाड़ रहे हैं.
राष्ट्रपति मिगेल दियाज़ कनेल ने अमेरिका से क्यूबा पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग भी की.

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क्यूबा में क्या चल रहा है
क्यूबा में मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इनकी शुरुआत 11 जुलाई को हुई थी.
क्यूबा में अनाधिकृत सार्वजनिक सभाएँ अवैध हैं और विरोध प्रदर्शन बहुत ही कम देखे जाते हैं. लेकिन, अब क्यूबा में दशकों में पहली बार इतने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं.
मीडिया और विपक्षी सूत्रों का कहना है कि क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार के ख़िलाफ़ दशकों से चल रहे सबसे बड़े विरोध प्रदर्शन में हज़ारों लोग शामिल हुए थे. प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में देखा गया कि सुरक्षा बलों ने कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया, उनकी पिटाई की और मिर्च पाउडर डाला.
क्यूबा के राष्ट्रपति ने विरोध करने वालों को "किराए के लोग" करार दिया है.
उन्होंने चार घंटे चले अपने संबोधन में विरोध प्रदर्शनकारियों को 'क्रांति विरोधी' कहा. वहीं, क्यूबा के विदेश मंत्री ने आरोप लगाया कि अमेरिका इन प्रदर्शनों को भड़का रहा है और वित्तीय मदद दे रहा है.

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क्या कहते हैं प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वो अर्थव्यवस्था की बुरी हालत, खाने-पीने के सामान, दवाइयों की कमी, महंगाई और सरकार के कोविड-19 से निपटने के तरीकों से नाराज़ हैं.
क्यूबा में हुए ये विरोध प्रदर्शन कई जगहों पर फैल गए थे. रविवार को सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने आज़ादी और तानाशाही ख़त्म करो- जैसे नारे लगाए.
सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर तेज़ी से प्रतिक्रिया दी. क़ानूनी सहायता केंद्र क्यूबलेक्स के जुटाए आँकड़ों के मुताबिक़ रविवार को लगभग 100 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.
गिरफ़्तार हुए लोगों में पत्रकार कैमिला एकोस्टा भी थीं, जो स्पेन के अख़बार एबीसी के लिए प्रदर्शन की तस्वीरें ले रही थीं.
स्पने के विदेश मंत्री ने उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है.

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बीबीसी न्यूज़ मुंडो को अपना नाम कार्लोस एलबर्टो बताने वाले एक नौजवान ने कहा कि वो प्रदर्शनों में भाग लेने के बाद अपनी प्रेमिका के घर पर छुपे हुए हैं.
उन्होंने फोन पर बातचीत में बताया, ''मेरे एक सहयोगी को गिरफ़्तार किया गया है. मुझे डर है कि ये मेरे साथ भी हो सकता है. हम कुछ भी ग़लत नहीं कर रहे थे, हम सिर्फ आज़ादी मांग रहे थे. इस रवैए के साथ वे दिखा रहे हैं कि वे क्या हैं: एक तानाशाह."
क्यूबा की अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुज़र रही है. पर्यटन यहाँ कमाई का महत्वपूर्ण क्षेत्र है लेकिन कोरोना के कारण यात्रा पर लगी पाबंदियों के चलते इस क्षेत्र की हालत खराब है.
क्यूबा में चीनी के निर्यात से आने वाला राजस्व भी बहुत बड़ा हिस्सा रखता है. लेकिन इस बार उस पर भी मार पड़ी है.
इस कारण सरकार के पास विदेशी मुद्रा भंडार ख़त्म हो रहा है और वो बाहर से भी सामान ख़रीदने में सक्षम नहीं है.
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