क्यूबा के ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों की क्या है वजह, तीन बातों से समझिए

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- Author, बीबीसी मुंडो
- पदनाम, लंदन
क्यूबा में हाल के समय का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन देखा जा रहा है. 60 सालों में पहली बार हज़ारों की संख्या में लोग देश के कई क़स्बों और शहरों में सड़कों पर हैं. वे 'आज़ादी' और 'तानाशाही का ख़ात्मा हो' के नारे लगा रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों की संख्या और जगह-जगह फैलते विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए राष्ट्रपति मिगेल दियाज़ कनेल ने राष्ट्रीय टेलीविज़न पर आकर अपने समर्थकों को संबोधित किया और उन्हें भी सड़कों पर उतर कर प्रदर्शनकारियों का सामना करने को कहा.
राष्ट्रपति ने कहा, "क्रांतिकारियों को सड़कों पर उतर कर लड़ाई का आदेश दे दिया गया है." राष्ट्रपति कनेल ने मौजूदा संकट का जिम्मेदार अमेरिका की पाबंदियों और डोनाल्ड ट्रंप की सरकार के क़दमों को ठहराया.
प्रदर्शन हवाना के दक्षिण पश्चिम में स्थित सैन अंटारियो डी लॉस बैनोस शहर से शुरू हुआ. उसके बाद तेज़ी से देश के दूसरे हिस्सों में फैल गया.
सैन अंटारियों से एक प्रदर्शनकारी ने बीबीसी मुंडो को फ़ोन पर बताया, "ये लोगों की आज़ादी के लिए है.अब हम और बर्दाश्त नहीं करेंगे. हमें कोई डर नहीं है. हम बदलाव चाहते हैं. हमें अब और तानाशाही की आवश्यकता नहीं."
पिनार डेल रियो में प्रदर्शन में शामिल हुए एलेजांड्रो ने बीबीसी मुंडो को बताया कि सोशल मीडिया पर सैन अंटारियो में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बारे में पढ़कर उनके प्रांत में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए.

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उन्होंने बताया, "हमने सोशल मीडिया नेटवर्क पर प्रदर्शन होते देखा और लोग बाहर आने लगे. अब हमें और बर्दाश्त नहीं. अब वो दिन आ गया है. हमारे पास खाना नहीं है, हमारे पास दवा नहीं है और आज़ादी भी नहीं है. वे हमें जीने देना नहीं चाहते."
बीबीसी मुंडो ने सरकार का पक्ष जानने के लिए अधिकृत संस्था इंटरनेशनल प्रेस सेंटर से संपर्क किया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया है.
सोशल मीडिया पर आ रहे वीडियो और कई लोगों के बयानों के मुताबिक़ क्यूबा में इस रविवार को हुए विरोध प्रदर्शनों का बुरी तरह दमन किया गया. क्यूबा के लिए ये एक असामान्य घटना है, जहाँ सरकार के विरोध की अनुमति नहीं है.
इस स्थिति में ये कैसे संभव हुआ कि हज़ारों की संख्या में क्यूबा के लोग सड़कों पर उतर आए, वो भी एक जगह नहीं. देश के कई हिस्सों में.
बीबीसी मुंडो ने इसे तीन बिंदुओं में समझाने की कोशिश की है.
1. कोरोना वायरस का संकट

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रविवार को क्यूबा में हुआ प्रदर्शन लोगों की लगातार बढ़ रही थकान का भी नतीजा हो सकती है जो वे कई महीनों से महसूस कर रहे हैं. देश ने हाल के महीनों में बड़ा आर्थिक और स्वास्थ्य के मोर्चे पर संकट झेला है. माना जा रहा है ये संकट उस ख़ास अवधि के बाद पहली बार हुआ है, जब 1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ के विघटन के बाद क्यूबा ने भुगता था.
मौजूदा स्थिति को हवा दी है कोरोना वायरस से पैदा हुई गंभीर स्थिति और आर्थिक मोर्चे पर सरकार की ओर से उठाए गए क़दमों ने. इन वजहों से क्यूबा में जीवन काफ़ी कठिन हो गया है.
वर्ष 2020 के शुरुआती महीनों में क्यूबा ने कोरोना महामारी को नियंत्रण में रखा था. लेकिन हाल के महीनों में कोरोना के मामलों में तेज़ी आई है. दक्षिण अमेरिकी देशों में कोरोना के सबसे ज़्यादा मामले क्यूबा में ही सामने आ रहे हैं.
सिर्फ़ रविवार को आधिकारिक रूप से क्यूबा में कोरोना के 6750 नए मामले दर्ज किए गए और 31 लोगों की मौत भी हो गई. हालाँकि कई विपक्षी संगठनों का दावा है कि सरकार सही आँकड़ों को छुपा रही है और सरकारी आँकड़ों से देश की वास्तविक स्थिति का पता नहीं चल रहा है. उनका आरोप है कि कोरोना से हुई कई मौतों को अन्य वजहों से बताया जा रहा है.
पिछले सप्ताह क्यूबा ने दैनिक संक्रमण और मौतों के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया. कई रिपोर्टों के मुताबिक़ कोरोना के बढ़ते मामलों के कारण स्वास्थ्य केंद्रों में स्थिति चरमरा गई है.
बीबीसी मुंडो ने पिछले दिनों क्यूबा के कई लोगों से बात की, जिन्होंने दावा किया कि उनके कई परिजनों की घर में मौत हो गई. उन्हें चिकित्सा सुविधा नहीं मिली. इन लोगों ने ये भी दावा किया कि दवा के अभाव में कई लोगों की अस्पतालों में भी मौत हुई है.
इन्हीं में से एक हैं लिसवेलिस इचेनिक. उन्होंने बताया कि उनके 35 वर्षीय भाई की घर में ही मौत हो गई, क्योंकि अस्पतालों में उन्हें जगह नहीं मिल पाई. लेनियर मिगेल पेरेज़ का आरोप है कि अस्पताल में हुई लापरवाही ने उनकी गर्भवती पत्नी की जान ले ली.
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर लोगों ने ऐसी ही आपबीती शेयर की है. #SOSCuba हैशटैग से सोशल मीडिया पर संदेश भरे हुए हैं. लोगों ने सोशल मीडिया पर अंतरराष्ट्रीय मदद भी मांगी है. लोगों ने कोरोना वायरस के कारण पैदा हुई गंभीर स्थिति को देखते हुए दखल की मांग भी की है.
क्यूबा के हज़ारों लोग इस पहल में शरीक हुए हैं. कई अस्पतालों के वीडियो वायरल हो रहे हैं, जहाँ अव्यवस्था फैली है.
रविवार को दिए अपने संदेश में क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति वैसी ही है, जैसी कई अन्य देशों की है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस क्यूबा में देर से पहुँचा है, क्योंकि उन्होंने वायरस पर नियंत्रण रखने में सफलता पाई थी.
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि क्यूबा ने कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ अपना वैक्सीन बना लिया है. हालाँकि ज़्यादातर प्रांतों में वैक्सीन की डोज़ काफ़ी सीमित मात्रा में उपलब्ध है.
2. आर्थिक स्थिति

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क्यूबा की अर्थव्यवस्था का इंजन है पर्यटन. लेकिन कोरोना के कारण देश का पर्यटन ठप है. क्यूबा की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर कोरोना ने काफ़ी असर डाला है. इस कारण देश में मुद्रा स्फ़ीति बढ़ी है, बिजली में लगातार कटौती हो रही है, खाद्यान्न की कमी है, दवा और कई बुनियादी चीज़ों की भी उपलब्धता कम हो रही है.
इस साल के शुरू में सरकार ने आर्थिक सुधार के लिए नए पैकेज का प्रस्ताव रखा था. इसमें वेतन बढ़ाने की बात थी. लेकिन इसने क़ीमतों में एकाएक काफ़ी उछाल ला दिया. कैली के जवेरियाना यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री पावेल विदाल का आकलन है कि अगले कुछ महीनों में क़ीमतों में 500 से 900 प्रतिशत तक का उछाल आ सकता है.
क्यूबा में विदेशी मुद्रा का अभाव है. इसे देखते हुए सरकार ने पिछले साल से अन्य करेंसी में भी ख़रीदारी को बढ़ावा देने के लिए स्टोर्स बनाना शुरू किया. इन स्टोर्स में खाद्यान्न और अन्य ज़रूरी चीज़ें ऐसी मुद्राओं में बेचनी शुरू की गई, जिनमें देश के अधिकतर लोगों को वेतन नहीं मिलता है.
इस महामारी के कारण लोगों को दुकानों के बाहर लंबी लंबी कतारों में देखा जा सकता है. बिजली की कटौती तो सामान्य बात हो गई है.
दवा की दुकानों और अस्पतालों तक में दवाएँ नहीं मिल पा रही हैं. कई प्रांतों में तो गेहूँ के आटे की कमी के कारण लोगों ने कद्दू से बनाई जाने वाली ब्रेड बेचनी शुरू कर दी है.
पिछले सप्ताह जब बीबीसी मुंडो ने कई लोगों से बात की, तो उन्होंने बताया कि कई मेडिकल सेंटर्स में बुख़ार कम करने वाली दवा एस्पिरिन तक उपलब्ध नहीं है. जबकि क्यूबा में स्कैबिज़ और अन्य संक्रामक बीमारियाँ भी फैलती रहती हैं.
पिछले महीने क्यूबा की सरकार ने अस्थायी रूप से डॉलर्स में नक़द लेने पर रोक लगाने का फ़ैसला किया. बाहर से क्यूबा में जो पैसा आता है, वो उन्हें डॉलर्स में ही मिलता है. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार का ये क़दम अमेरिकी मुद्रा पर लगाई गई बड़ी पाबंदी है. पहले फ़िदेल कास्त्रो की सरकार ने ऐसा किया था.
क्यूबा की सरकार अमेरिका की पाबंदियों को देश के मौजूदा आर्थिक संकट से जोड़ती है.
रविवार को टेलीविज़न पर दिए अपने संदेश में राष्ट्रपति दियाज़ कनेल ने कहा कि यही प्रमुख समस्या है और इसी के कारण देश के लोगों की प्रगति पर ख़तरा पैदा हुआ है और स्वास्थ्य पर संकट आया है.
3. इंटरनेट

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रविवार से पहले क्यूबा में सबसे बड़ा प्रदर्शन अगस्त 1994 में फ़िदेल कास्त्रो की क्रांति की शुरुआत के बाद हुआ था. ये ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन हवाना में हुआ था. अन्य प्रांतों के लोगों को तो ये भी पता नहीं चल पाया कि हवाना में हुआ क्या था.
लेकिन उस घटना के 30 वर्षों के बाद परिदृश्य बिल्कुल अलग हैं. ये सच है कि फ़िदेल कास्त्रो की सरकार के समय क्यूबा में इंटरनेट की पहुँच काफ़ी सीमित थी, लेकिन राउल कास्त्रो ने इसे खोलने के लिए क़दम उठाए, जिसके कारण क्यूबा को अधिक कनेक्टिविटी मिली.
उस समय से क्यूबा के लोगों ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार से अपनी नाराज़गी के लिए किया है. कई बार तो अधिकारियों को इसका जवाब तक देना पड़ा है.
आज क्यूबा की ज़्यादातर आबादी (जिनमें युवा काफ़ी हैं) फ़ेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करती है. सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें सरकारी मीडिया से अलग सूचनाओं की जानकारी भी मिलती है.
इंटरनेट के कारण क्यूबा में बड़ी संख्या में स्वतंत्र मीडिया का उदय हुआ है. ऐसे संस्थान उन मुद्दों पर रिपोर्ट करते हैं, जिन पर आम तौर पर सरकारी मीडिया नहीं करता.
सोशल मीडिया नेटवर्क्स कलाकारों, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों के लिए भी एक मंच बन गया है, जो प्रदर्शनों के अपने अधिकार का दावा करते हैं.
पिछले साल नवंबर में एक अन्य प्रदर्शन हुआ था, जिसे सोशल मीडिया के माध्यम से ही आयोजित किया गया था. ये विरोध प्रदर्शन उस समय हुए, जब पुलिस भूख हड़ताल कर रहे कुछ युवा कलाकारों के घरों में घुस आई.
दरअसल सैन अंटारियो से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बारे में ही लोगों को जानकारी सोशल मीडिया से ही मिली.
क्यूबा की सरकार ये कहती रही है कि सोशल मीडिया नेटवर्क का इस्तेमाल क्रांति के दुश्मन कर रहे हैं ताकि देश की नीतियों को अस्थिर किया जा सके. सरकार का आरोप है कि ये लोग अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के हिसाब से चल रहे हैं.
कई लोगों के लिए ये विरोध प्रदर्शन अनुमान के मुताबिक हैं, लेकिन आगे क्या होगा, उसको लेकर अनिश्चितता अवश्य है.
क्यूबा इस समय असाधारण प्रदर्शन और पुलिस दमन का सामना कर रहा है. ये देखना होगा कि आने वाले दिनों में सरकार क्या क़दम उठाती है और क्यूबा के लोग क्या करते हैं.
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