कोविड वैक्सीन : कोरोना के टीके के लिए जहां गाय से लेकर शराब तक का लालच दिया जा रहा है

थाईलैंड

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    • Author, फ़र्नैंडो डुआर्टे
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस

जब थाईलैंड ने मई में कोविड-19 वैक्सीन के टीकाकरण को शुरू किया, तो उत्तरी ज़िले चेम के अधिकारियों ने पाया कि कुछ लोग ही लोग टीका लेने के लिए पंजीकरण कर रहे थे.

लेकिन कुछ ही दिनों में सब कुछ बदल गया. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि हर दिन की माँग सैकड़ों से हज़ारों तक पहुँच गई. इसकी वजह थी- गाय जीतने का मौक़ा.

सुनने में अजीब लगता है लेकिन साल 2021 में वहाँ के निवासियों को टीकाकरण के बदले हर सप्ताह एक जीवित जानवर जीतने का मौक़ा मिलेगा.

थाईलैंड उन देशों में से हैं, जो टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रलोभन दे रहे हैं.

अमेरिका में भी ऐसी पहल की गई है. इनमें एक मिलियन डॉलर की लॉटरी से लेकर मुफ़्त बीयर, पेस्ट्री, यहाँ तक कि गांजा जीतने का मौक़ा शामिल है.

चीन में, टीका लेने के बदले में मुफ़्त अंडे, दुकानों में सामानों को लेकर डिस्काउंट और दूसरे भत्ते दिए जा रहे हैं.

पिछले महीने, सर्बिया की सरकार ने एक टीकाकरण अभियान शुरू किया, जिसने टीका पाने वाले लोगों को लगभग 30 डॉलर नक़द के साथ पुरस्कृत करने का प्रावधान था.

वैक्सीनेशन को बढ़ावा

सर्बिया

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भारत में भी कुछ प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं, जिनमें टीका लेते हुए सेल्फी पर पुरस्कार दिए गए.

ऑस्ट्रेलिया में भी डॉक्टरों को टीका के बदले इनाम देने की बात कही गई थी.

इस तरह की योजनाओं का उद्देश्य बड़े टीकाकरण को बढ़ावा देना है. दुनिया भर में स्वास्थ्य अधिकारी चाहते हैं कि कोविड-19 को फैलने से रोकने के लिए अधिक से अधिक लोगों को टीके दिए जाएँ.

यह कार्य जटिल है, उन देशों में भी जहाँ वैक्सीन की आपूर्ति कोई बड़ा मुद्दा नहीं है.

ब्रिटेन में 70 प्रतिशत से अधिक वयस्कों को 20 मई तक कम से कम एक खुराक मिल गई थी. लंदन में टेक-अप दर आधे से कम थी, लेकिन लंदन में ये दर 50 फ़ीसदी से कम थी.

भारत

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अमेरिका में, जहाँ 12 साल से अधिक उम्र के सभी लोग अब एक शॉट ले सकते हैं, सीडीसी के आँकड़े बताते हैं कि 50 में से केवल 13 राज्यों में कम से कम 70% वयस्क निवासियों का टीकाकरण हुआ है. राष्ट्रपति जो बाइडन ने 4 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर पर इस आंकड़े तक पहुँचने का लक्ष्य रखा है.

दूसरी बीमारियों के लिए टीकाकरण के पिछले अध्ययनों से पता चला है कि प्रलोभन देने की पहल टीकाकरण बढ़ाने में मदद करती है.

2015 में किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया कि नक़द वाउचर की पेशकश ने लंदन में युवा महिलाओं के बीच ह्यूमन पैलिलोमा वायरस (एचपीवी) के टीकों को बढ़ाने में मदद की.

इसी तरह का असर 2019 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के ग्रामीण नाइजीरिया में महिलाओं और टेटनस टीकाकरण से जुड़े अध्ययन में देखा गया था.

वैक्सीन

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उदासीनता और हिचकिचाहट

लेकिन कोविड-19 टीकाकरण उन अध्ययनों से बहुत अलग संदर्भ में हो रहा है.

महामारी विज्ञान में विशेषज्ञता रखने वाले कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री डॉ फ्लावियो टोक्सवार्ड कहते हैं, "वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट हमेशा अस्तित्व में रही है, लेकिन यह कभी भी इस तरह से सामने नहीं आई."

"इंटरनेट ने शायद 'वैक्सीन विरोधी' आंदोलनों को तेज़ कर दिया है और ऐसा लगता है कि वे कॉन्स्पिरेसी थ्योरी के साथ मिल गए हैं."

लेकिन अमेरिका के वैज्ञानिक डॉक्टर मितेश पटेल का मानना है कि केवल इनाम देना ही एकमात्र समाधान नहीं है.

उनका कहना है कि जिन लोगों को वैक्सीन की पेशकश की गई है, लेकिन अभी नहीं मिली है, उन्हें दो मुख्य समूहों में विभाजित किया जा सकता है: वैक्सीन हिचकिचाहट और वैक्सीन उदासीनता.

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पटेल कहते हैं, "वैक्सीन उदासीनता समूह के लोग टीकाकरण के ख़िलाफ़ नहीं हैं, लेकिन वो अप्वाइंटमेंट लेकर और बाहर जाकर वैक्सीन लेने के लिए प्रयास नहीं करेंगे."

उनके मुताबिक़, वैक्सीन से हिचकिचाने वाले लोग कई कारणों से कोविड -19 टीके से परहेज़ कर रहे हैं. यह वो समूह है, जिसे वित्तीय प्रोत्साहन द्वारा टीके के लिए प्रेरित किया जा सकता है.

डॉक्टर पटेल कहते हैं, "अगर हम लोगों को यह समझाएँ कि टीका सुरक्षित है, तो ऐसे प्रलोभन मददगार साबित हो सकते हैं."

ग़लत अवधारणा और नीतियाँ

डॉक्टर टोक्सवार्ड चेतावनी देते हैं कि केवल पुरस्कार देने से असल में टीकों के प्रति संदेह को मज़बूत किया जा सकता है.

वो कहते हैं, "लोगों के दिमाग़ में ये बात आ सकती है कि अगर टीका इतना अच्छा है, तो वे मुझे बदले में सामान क्यों दे रहे हैं?"

वीडियो कैप्शन, अमेरिका में कोरोना वायरस की वैक्सीन लगने की शुरुआत

यही कारण है कि दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय की अर्थशास्त्र की प्रोफेसर इसाबेल ब्रोकास कहती हैं कि लोगों को राज़ी करने के लिए नीतिगत निर्णय लेने होंगे जैसे कि टीका लेने वालों को मास्क पहनने से छूट देना.

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय में मानव वैज्ञानिक डॉक्टर बेन कास्तन, ऐसे लोगों के लिए यात्रा के प्रलोभन को अच्छा क़दम मानते हैं.

वो कहते हैं, "हम पहले से ही देख रहे हैं कि फ्रांस जैसे देश पूरी वैक्सीन ले चुके लोगों को बिना टेस्ट के अपने यहाँ आने की अनुमति दे रहे हैं."

"अधिकांश लोगों के लिए ये क़दम काम, छुट्टियों या विभिन्न देशों में दोस्तों और परिवार से मिलने के लिए प्रोत्साहित करेगा."

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