चीन ने कहा, वुहान लैब पर 'अमेरिका की रिपोर्ट' पूरी तरह झूठी

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कोरोना संक्रमण की शुरुआत से पहले अपने वुहान शहर में तीन शोधकर्ताओ के बीमार होकर अस्पताल जाने की ख़बर को चीन ने 'पूरी तरह झूठ' क़रार दिया है.
रविवार को 'वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा था कि वुहान लैब के तीन शोधकर्ता साल 2019 के नवंबर महीने में किसी ऐसी बीमारी से जूझ रहे थे जिसके "लक्षण कोविड-19 और आम सर्दी-ज़ुकाम, दोनों से मेल खाते थे."
चीन शुरू से ही ऐसे दावों को ग़लत बताता रहा है कि यह वायरस उसकी किसी प्रयोगशाला से लीक होकर आम लोगों के बीच फैला है.
चीन ने पहली बार 31 दिसंबर, 2019 को विश्व स्वास्थ्य संगठन को जानकारी दी थी कि वुहान में निमोनिया के केस अचानक बढ़ गए हैं.
इसके बाद कोरोना वायरस की पहचान हुई और देखते ही देखते यह पूरी दुनिया में फैल गया. अब तक 34 लाख से ज़्यादा लोगों की जान इस वायरस के कारण जा चुकी है.

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'आज तक संक्रमित नहीं हुआ वुहान लैब का कोई स्टाफ़'
सोमवार को जब पत्रकारों ने चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान से सवाल किया तो उन्होंने ऐसी ख़बरों को झूठा बता दिया.
लिजियान ने कहा, "वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरलॉजी ने 23 मार्च को बयान जारी किया था. उस बयान के मुताबिक़ वहाँ पर 30 दिसंबर, 2019 से पहले कोविड-19 का कोई मामला सामने नहीं आया था और अभी तक यहाँ का कोई भी स्टाफ़ या छात्र संक्रमित नहीं हुआ है."
उन्होंने कहा, "इसी साल जनवरी में चीन और डब्ल्यूएचओ की संयुक्त टीम ने कई संस्थानों का दौरा किया जिनमें वुहान सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ कंट्रोल और वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरलॉजी भी शामिल थे."
"इसके साथ ही बायोसेफ़्टी प्रयोगशालाओं का दौरा करके वहाँ के विशेषज्ञों से खुलकर बात की गई. इन सबके बाद एकमत से यह कहा गया कि इस वायरस के किसी लैब से लीक होने के दावों के सच होने की संभावना न के बराबर है."

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चीन ने पूछा, अमेरिका का असल मक़सद क्या है?
चाओ लिजियान ने इस पूरे मामले को लेकर अमेरिका पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, "मैं यह भी बताना चाहूँगा कि ऐसी बहुत सारी रिपोर्ट्स सामने आई हैं कि साल 2019 के दूसरे हिस्से में दुनिया भर में वायरस और कोविड-19 महामारी के मौजूद होने की बात कही गई है."
"साथ ही फ़ोर्ट डेट्रिक में मौजूद बायोलॉजिकल लैब और दुनिया भर में 200 से ज़्यादा बायो-लैब बनाने के पीछे अमेरिका के असल मक़सद को लेकर भी को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता है."
लिजियान ने पूछा, "लैब से लीक होने की थ्योरी को बार-बार उछालने के पीछे अमेरिका का असल मक़सद क्या है? वह इस वायरस के मूल का पता लगाने को लेकर गंभीर है या फिर ध्यान बँटाने की कोशिश कर रहा है?"
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका के संबंधित विभाग इस बारे में दुनिया को जल्द से जल्द स्पष्टीकरण देंगे.
उन्होंने कहा, "आशा है कि संबंधित पक्ष वायरस के मूल का पता लगाने में चीन से सीख लेकर वैज्ञानिक और सहयोगात्मक रवैया अपनाकर डब्ल्यूएचओ के साथ मिलकर काम करेंगे. साथ ही महामारी को जल्द ख़त्म करने और भविष्य में आने वाली स्वास्थ्य आपदाओं से निपटने की तैयारियों में योगदान देंगे."
लिजियान से फिर पूछा गया कि क्या वह पुष्टि कर सकते हैं कि नवंबर 2019 मे वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरलॉजी के तीन सदस्य बीमार होकर अस्पताल गए थे या नहीं.
इस पर उन्होंने कहा, "मैंने वुहान इंस्टीट्यूट के बयान के आधार पर चीन का पक्ष स्पष्ट कर दिया है. इसलिए जिस रिपोर्ट में इंस्टीट्यूट के तीन सदस्यों के बीमार होने की ख़बर है, वह पूरी तरह झूठी है."

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वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी ख़बर में क्या लिखा था?
अमेरिकी अख़बार वॉल स्ट्रीट जर्नल की ख़बर के मुताबिक़ वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ़ वायरॉलजी के तीन शोधकर्ता नवंबर 2019 में बीमार पड़े थे और उन्होंने अस्पताल की मदद माँगी थी.
अख़बार ने यह ख़बर एक ख़ुफ़िया अमेरिकी रिपोर्ट के हवाल से छापी थी.
इस ख़ुफ़िया रिपोर्ट में वुहान लैब के बीमार शोधकर्ताओं की संख्या, उनके बीमार पड़ने के समय और अस्पताल जाने से जुड़ी विस्तृत जानकारियाँ हैं.
उम्मीद जताई जा रही थी कि ख़ुफ़िया रिपोर्ट की जानकारियाँ उस दावे की जाँच करने पर बल देंगी जिनमें वुहान लैब से कोरोना वायरस फैलने की आशंका जताई गई है.
यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन की उस बैठक से एक दिन पहले आई थी जिसमें डब्ल्यूएचओ के कोरोना वायरस के उद्गम के बारे में अगले चरण की जाँच पर चर्चा का अनुमान है.

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बाइडन प्रशासन ने क्या कहा था?
अमेरिकी सिक्योरिटी काउंसिल की प्रवक्ता ने वॉल स्ट्रीट जर्नल की इस ख़बर पर कोई टिप्पणी नहीं की थी लेकिन उन्होंने कहा था कि बाइडन प्रशासन 'कोरोना वायरस की उत्पति की जाँच को लेकर गंभीर है.'
इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम महामारी से जुड़े तथ्यों का पता लगाने के लिए वुहान गई थी.
हालाँकि फिर डब्ल्यूएचओ ने कहा था कि यह साबित करने के लिए पर्याप्त तथ्य नहीं है कि कोरोना वायरस वुहान की लैब से दुनिया भर में फैला.
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस को 'चीनी वायरस'और 'वुहान वायरस' कहा करते थे और चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की थी.
चीन पर जाँच में विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम को पूरा सहयोग न देने और वुहान लैब से जुड़ी जानकारियाँ छिपाने के आरोप भी लगते रहे हैं.
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