इसराइली पीएम नेतन्याहू के हमास पर दिए बयान से बढ़ी आशंका

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भारी हिंसा के बाद इसराइल और हमास के बीच युद्धविराम तो हो गया है लेकिन बावजूद कुछ ऐसे बयान सामने आ रहे हैं, जिनसे ज़ाहिर हो रहा है कि तनाव अभी ख़त्म नहीं हुआ है.
इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने सीज़फ़ायर के ऐलान के बाद हमास को एक बेहद कड़ा संदेश दिया है. उन्होंने हमास को चेताया है कि वो भविष्य में रॉकेट हमला करने के बारे में सोचे भी न.
शुक्रवार को युद्धविराम प्रभाव में आने के बाद नेतन्याहू ने अपने एक भाषण में कहा, "अगर हमास को लगता है कि हम भविष्य में रॉकेट की बौछार सह लेंगे तो वो ग़लत हैं."
उन्होंने यह भी कहा कि अब अगर इसराइल के किसी भी हिस्से में किसी भी तरह की आक्रामकता देखने को मिली तो उसका जवाब 'नए दमखम' से दिया जाएगा.
इससे पहले हमास ने कहा था कि "उसके हाथ ट्रिगर से हटे नहीं हैं". यानी वो हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है.
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इसराइल ने युद्ध शुरू नहीं किया था: नेतन्याहू
इसराइली प्रधानमंत्री के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से नेतन्याहू के भाषण की एक छोटी सी वीडियो क्लिप जारी की गई है.
इसमें वो कहते नज़र आ रहे हैं, "इसराइल ने यह युद्ध शुरू नहीं किया था. आतंकी संगठन हमास ने हम पर बिना उकसावे के हमला किया. उन्होंने हमारी राजधानी में और बाक़ी शहरों में 4,000 रॉकेट दागे. ऐसे आपराधिक तरीक़े से हमला होने पर कोई भी देश चुप नहीं बैठेगा. इसराइल भी नहीं बैठा."
नेतन्याहू ने कहा, "हम ऐसे आतंकियों से लड़ रहे थे जो धरती पर सबसे अधिक घनी आबादी वाली जगह पर आम नागरिकों के बीच छिपे हुए थे. वो हमारे लोगों पर रॉकेट बरसा रहे थे और अपने लोगों को इंसानी ढाल (ह्यूमन शील्ड) की तरह इस्तेमाल कर रहे थे. हमने आम लोगों को मारे जाने से रोकने के लिए अपनी क्षमता के मुताबिक़ सब कुछ किया."
इसराइली प्रधानमंत्री के ने कहा कि उन्हें हरेक शख़्स की मौत का पछतावा है.
उन्होंने कहा, "मैं आपको स्पष्ट रूप से यह भी बताना चाहता हूँ कि दुनिया की कोई सेना ऐसी नहीं है जो इसराइली सेना से ज़्यादा लचीले तरीक़े से काम करती है."
नेतन्याहू ने अपने भाषण में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन का शुक्रिया अदा किया.
उन्होंने कहा, "मैं अपने पुराने दोस्त जो बाइडन का शुक्रिया अदा करना चाहूँगा क्योंकि वो इस जंग के दौरान इसराइल के समर्थन में खड़े रहे. उन्होंने इसराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का खुलकर समर्थन किया."
नेतन्याहू ने कहा, "मैं दुनिया के उन सभी नेताओं को भी धन्यवाद कहूँगा जो इसराइल के साथ खड़े हुए. मुझे लगता है कि उन्हें जीवन का जश्न मनाने वाले लोकतंत्र और मौत का महिमामंडन करने वाले आतंकी संगठन में अंतर समझ आता है."
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'हमास अब हमसे छिप नहीं सकता, इसराइल की बड़ी जीत'
नेतन्याहू ने दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम को इसराइल की जीत बताया है और कहा है कि हमास पर इसराइली सैन्य अभियान 'बेहद सफल' रहा.
उन्होंने कहा, "अपने इस ऑपरेशन में अपना मक़सद हासिल कर लिया है."
11 दिनों तक चली हिंसा के बाद हुए इस युद्धविराम को इसराइल और हमास, दोनों ही अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं.
युद्धविराम के ठीक बाद नेतन्याहू ने टीवी पर देश के नाम अपने संबोधन में कहा था कि 'हमास अब छिप नहीं सकता. यह इसराइल के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है.'
उन्होंने कहा, "हमारे ऑपरेशन ने हमास की इसराइल पर मिसाइल दागने की क्षमता को नष्ट कर दिया है."
नेतन्याहू का दावा है कि इसराइली सेना ने हमास के विस्तृत सुरंग नेटवर्क, रॉकेट फ़ैक्ट्रियों, हथियार बनाने और जमा करने वाली जगहों को नष्ट कर दिया है.
उन्होंने कहा कि इसराइली सैन्य अभियान में हमास के 200 चरमपंथी मारे गए हैं जिनमें से 25 संगठन के वरिष्ठ नेता थे.
वहीं, हमास के प्रमुख इस्माइल हनिया ने कहा कि संगठन ने सैन्य और आर्थिक मोर्चे पर कहीं ज़्यादा ताक़तवर दुश्मन का सफलतापूर्वक सामना किया.
उन्होंने कहा, "हम अपनी नष्ट हुई चीज़ों को दोबारा बनाएंगे. हम शहीदों और उनके परिवारों के प्रति अपने कर्तव्य नहीं भूलेंगे. हम उनके प्रति अपने कर्तव्य नहीं भूलेंगे जो घायल हुए और जिनके घर तबाह हुए."

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कैसे हुआ युद्धविराम?
दोनों पक्षों के बीच पिछले कई दिनों से लड़ाई बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा था.
बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से कहा कि "उन्हें अपेक्षा है कि आज ग़ज़ा में जारी लड़ाई में "ठोस कमी" आएगी जिससे युद्धविराम का रास्ता निकल सके".
मिस्र, क़तर और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसराइल और हमास के बीच मध्यस्थता करने में अहम भूमिका निभाई.
मिस्र के सरकारी टीवी पर बताया गया कि राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी ने संघर्षविराम करवाने के लिए दो सुरक्षा प्रतनिधिमंडलों को इसराइल और फ़लस्तीनी क्षेत्रों में भेजा है.
इसराइल और हमास के बीच लड़ाई यरुशलम में पिछले लगभग एक महीने से अशांति के बाद छिड़ी.

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कैसे भड़की हिंसा?
हिंसा की शुरुआत पूर्वी यरुशलम के शेख़ जर्रा इलाक़े से फ़लस्तीनी परिवारों को निकालने की धमकी के बाद शुरू हुई, जिन्हें यहूदी अपनी ज़मीन बताते हैं और वहाँ बसना चाहते हैं.
इस वजह से वहाँ अरब आबादी वाले इलाक़ों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हो रही थीं.
सात मई को यरुशलम की अल-अक़्सा मस्जिद के पास प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई.
अल-अक़्सा मस्जिद के पास पहले भी दोनों पक्षों के बीच झड़प होती रही है मगर सात मई को हुई हिंसा पिछले कई सालों में सबसे गंभीर थी.
इसके बाद तनाव बढ़ता गया और 10 मई को लड़ाई छिड़ गई.
हमास ने इसराइल को यहाँ से हटने की चेतावनी देते हुए रॉकेट दागे और फिर इसराइल ने भी जवाब में हवाई हमले किए. यह लड़ाई 11 दिनों तक चलती रही.
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