चीन और फिलीपींस आमने-सामने, दक्षिण चीन सागर में फिर हलचल

दक्षिण चीन सागर

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फिलीपींस ने दक्षिण चीन सागर में अपने जल क्षेत्र पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए चीन से 200 से अधिक जहाज़ों को हटाने के लिए है.

फिलीपींस के रक्षा मंत्री डेल्फ़िल लोरेन्ज़ाना ने कहा है कि चीन के जहाज़ फिलीपींस के समुद्री अधिकारों का उल्लंघन कर रहे हैं.

फिलीपींस का कहना है कि ऐसा नहीं लगता कि मछली पकड़ने वाले जहाज़ मछली पकड़ रहे हैं और इन जहाज़ों पर चीन के समुद्री लड़ाके हैं.

पाँच साल पहले एक अंतरराष्ट्रीय अदालत ने 90% पानी पर प्रभुत्व के चीनी दावों को ख़ारिज कर दिया था.

फिलीपींस, ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम दशकों से पूरे दक्षिण चीन सागर पर चीन से दावों पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में तनाव काफ़ी बढ़ गया है.

चीन उस क्षेत्र पर बार-बार दावा करता है, जो 'नाइन डैश लाइन' कहा जाता है. चीन ने अपने दावे के समर्थन में वहाँ द्वीपों का निर्माण किया है और वहाँ गश्त भी करता रहता है. चीन ने वहाँ अपनी सैन्य मौजूदगी का विस्तार किया है. हालाँकि उसका ये कहना है कि उसके इरादे शांतिपूर्ण हैं.

फिलीपींस का क्या कहना है?

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7 मार्च को दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस के तटरक्षकों ने कई तस्वीरें जारी की थीं, जिसमें व्हिटसन रीफ़ (फिलीपींस इसे जुलियन फिलीप रीफ़ कहता है) पर कई चीनी जहाज़ों को एक साथ खड़े देखा जा सकता है.

फिलीपींस के क्रॉस-गवर्नमेंट टास्क फ़ोर्स ने शनिवार को कहा कि ये रीफ़ फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र के भीतर हैं.

वीडियो कैप्शन, दक्षिण चीन सागर पर अपने दावे को लेकर क्यों जूझ रहे हैं ये देश?

फिलीपिंस के मुताबिक़ रीफ़ के पास चीन के क़रीब 220 जहाज़ मौजूद हैं.

रक्षा मंत्री लोरेन्ज़ाना ने कहा, "हम चीन से अपील करते हैं कि वो अतिक्रमण बंद करे और तुरंत अपने जहाज़ों को वापस बुलाए. ये फिलीपींस के अधिकारों का उल्लंघन है और हमारे संप्रभु इलाक़े में अतिक्रमण है.

उन्होंने चीन पर आरोप लगाया कि ये चीन के इस इलाक़े में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने की उकसाने वाली कार्रवाई है.

चीन के अधिकारियों ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

हालाँकि चीन पहले कई बार उन रिपोर्टों को ख़ारिज कर चुका है कि अपने दावे को मज़बूती से रखने के लिए चीन मछली पकड़ने वाले जहाज़ों का इस्तेमाल करता है.

दो साल पहले फिलीपींस के राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बारे में चुटकी लेते हुए समुद्री विवाद पर अपने ग़ैर टकराव वाले रवैए का बचाव किया था.

समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक़ उन्होंने कहा था, "जब शी कहते हैं कि चीनी जहाज़ फिशिंग करने जाएँगे, तो उन्हें कौन रोक सकता है. अगर मैं चीनी मछुआरों को खदेड़ने के लिए अपने नौ सैनिक भेजूँगा, तो मेरी गारंटी है कि उनमें से कोई ज़िंदा वापस नहीं आएगा."

आपत्तियाँ

चीन के तटरक्षक जहाज़

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हाल के सालों में चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम रूप से बनाए गए टापुओं पर सैन्य अड्डे स्थापित कर लिए हैं. चीन दलील देता है कि इन इलाक़ों पर उसका सदियों पुराना अधिकार है.

फिलीपींस के अलावा ब्रुनेई, मलेशिया, ताइवान और वियतनाम जैसे देश चीन के इन दावों पर आपत्ति जताते हैं. इन देशों में इस इलाक़े को लेकर विवाद कई दशकों से जारी है, लेकिन हाल के सालों में इसे लेकर तनाव में तेज़ी से इज़ाफा हुआ है. इस दौरान समुद्र में कई बार टकराव हुए हैं.

चीन "नाइन-डैश लाइन" के नाम से मशहूर एक बड़े इलाक़े पर अपना दावा ज़ाहिर करता है. चीन ने अपने दावों को पुख्ता शक्ल देने के लिए यहां टापू बना लिए हैं और समुद्र में गश्त करने लगा है.

चीन ने यहाँ एक बड़ा सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है. हालांकि, वह दावा यह करता है कि उसके मकसद शांतिपूर्ण हैं.

हालांकि, मोटे तौर पर यहाँ रिहायश नहीं है, लेकिन इस इलाक़े में मौजूद दो आइलैंड चेन- पारासेल्स और स्प्रैटलिस के इर्द-गिर्द प्राकृतिक संसाधन हो सकते हैं. यह समुद्र एक अहम शिपिंग रूट भी है और यहाँ बड़ी तादाद में मछलियाँ भी हैं.

2016 में एक अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल ने चीन के ख़िलाफ़ फ़ैसला दिया था. इस ट्राइब्यूनल ने कहा था कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि चीन का इस इलाक़े पर ऐतिहासिक रूप से कोई अधिकार रहा है. लेकिन, चीन ने इस फ़ैसले को मानने से इनकार कर दिया था.

कहानी दक्षिणी चीन सागर की

दक्षिण चीन सागर

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सवाल ये है कि अंतरराष्ट्रीय इलाक़ा माने जाने वाले दक्षिणी चीन सागर पर चीन इकतरफ़ा हक़ क्यों जताता रहता है?

इंडोनेशिया और वियतनाम के बीच पड़ने वाला समंदर का ये हिस्सा, क़रीब 35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. इस पर चीन, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ताईवान और ब्रुनेई अपना दावा करते रहे हैं. क़ुदरती ख़ज़ाने से भरपूर इस समुद्री इलाक़े में जीवों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं.

आज से तीन-चार साल पहले तक इस इलाक़े को लेकर इतनी तनातनी नहीं थी. फिर अचानक, क़रीब तीन साल पहले चीन के समंदर में खुदाई करने वाले जहाज़, बड़ी तादाद में ईंट, रेत और बजरी लेकर दक्षिणी चीन सागर पहुँचे.

उन्होंने एक छोटी समुद्री पट्टी के इर्द-गिर्द, रेत, बजरी, ईंटों और कंक्रीट की मदद से बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया.

पहले एक बंदरगाह बनाया गया. फिर हवाई जहाज़ों के उतरने के लिए हवाई पट्टी. देखते ही देखते, चीन ने दक्षिणी चीन सागर में एक आर्टिफ़िशियल द्वीप तैयार करके उस पर सैनिक अड्डा बना लिया.

इस इलाक़े में चीन ने धीरे-धीरे करके कई छोटे द्वीपों पर सैनिक अड्डे बना लिए. आज हालात ये बन पड़े हैं कि दक्षिणी चीन सागर पर कई देश दावेदारी कर रहे हैं.

दक्षिणी चीन सागर की इतनी अहमियत क्यों?

चीन के लड़ाकू विमान

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दक्षिणी चीन सागर, प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के बीच स्थित बेहद अहम कारोबारी इलाक़ा भी है. दुनिया के कुल समुद्री व्यापार का 20 फ़ीसदी हिस्सा यहाँ से गुज़रता है.

क्लाइव स्कोफ़ील्ड बताते हैं कि 2016 में दक्षिणी चीन सागर से होकर 6 ख़रब डॉलर का समुद्री व्यापार हुआ था. इस इलाक़े में अक़्सर अमेरिकी जंगी जहाज़ गश्त लगाते हैं, ताकि समुद्री व्यापार में बाधा न पहुँचे. मगर, चीन इसे अमेरिका का आक्रामक रवैया कहता है.

चीन का इरादा है कि दक्षिणी चीन सागर से होने वाली कारोबारी आवाजाही पर उसका नियंत्रण हो. लेकिन अमेरिका मानता है कि ये दुनिया के कारोबार के लिए ठीक नहीं होगा. ये चीन की दादागिरी है.

जानकार कहते हैं कि चीन का इरादा दक्षिणी चीन सागर का आर्थिक रूप से फ़ायदा उठाने का है.

भारत का क्या रुख़ है

शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी

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हाल के दिनों में भारत-चीन विवाद के बाद ये चर्चा होने लगी है कि क्या दक्षिणी चीन सागर के विवाद में भारत की भूमिका बढ़ेगी?

भारत दक्षिणी चीन सागर को एक तटस्थ जगह मानता रहा है. भारत मानता है कि ये तटस्थता क़ायम रहनी चाहिए और ये किसी भी देश का समुद्र नहीं है.

वीडियो कैप्शन, समंदर में बनी चीन की 'दीवार' तोड़ पाएगा अमरीका?

जानकार मानते हैं कि पिछले कुछ समय में चीन से बिगड़ते रिश्तों के कारण भारत अमेरिका के क़रीब आया है लेकिन ये समझना कि दक्षिणी चीन सागर में भारत कोई बहुत बड़ी भूमिका अदा करेगा, ये सही नहीं है.

साल 2015 में जब बराक ओबामा भारत आए थे तब एक साझा बयान में भारत ने कहा था कि वो दक्षिणी चीन सागर में स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.

चीन ने इस बयान के बाद आक्रोश दिखाया था. उसके बाद भारत ने कभी सीधे तौर पर चीन का नाम लेकर इस मुद्दे का ज़िक्र नहीं किया. कई बार भारत ने बिना नाम लिए चीन के विस्तारवाद की बात की है और दक्षिण चीन सागर की तरफ़ इशारा किया है.

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