दक्षिण चीन सागर पर चीन के ख़िलाफ़ क्यों जा रहा है ऑस्ट्रेलिया?

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ऑस्ट्रेलिया ने औपचारिक रूप से दक्षिण चीन सागर (साउथ चाइना सी) पर चीन के अधिकार के दावों को ख़ारिज कर दिया है.

इसके साथ ही दक्षिण चीन सागर को लेकर बढ़ते तनाव के बीच ऑस्ट्रेलिया ने साफ़ कर दिया है कि वह इस मामले में अमरीका के ज्यादा क़रीब है.

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में एक घोषणा में ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि चीन के इन दावों का कोई 'कानूनी आधार' नहीं है.

चीन ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ऑस्ट्रेलिया का यह कदम ऐसे वक्त पर आया है जब अमरीका हाल में ही इस इलाके में चीन के कुछ कदमों को गैर-कानूनी बता चुका है.

कई देशों की आपत्तियां

हाल के सालों में चीन ने दक्षिण चीन सागर में कृत्रिम रूप से बनाए गए टापुओं पर सैन्य अड्डे स्थापित कर लिए हैं. चीन दलील देता है कि इन इलाकों पर उसका सदियों पुराना अधिकार है.

ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस, ताइवान और वियतनाम जैसे देश चीन के इन दावों पर आपत्ति जताते हैं. इन देशों में इस इलाके को लेकर विवाद कई दशकों से जारी है, लेकिन हाल के सालों में इसे लेकर तनाव में तेजी से इजाफा हुआ है. इस दौरान समुद्र में कई दफा टकराव हुए हैं.

चीन "नाइन-डैश लाइन" के नाम से मशहूर एक बड़े इलाके पर अपना दावा ज़ाहिर करता है. चीन ने अपने दावों को पुख्ता शक्ल देने के लिए यहां टापू बना लिए हैं और समुद्र में गश्त करने लगा है.

चीन ने यहां एक बड़ा सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया है. हालांकि, वह दावा यह करता है कि उसके मकसद शांतिपूर्ण हैं.

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हालांकि, मोटे तौर पर यहां रिहायश नहीं है, लेकिन इस इलाके में मौजूद दो आइलैंड चेन- पारासेल्स और स्प्रैटलिस के इर्द-गिर्द प्राकृतिक संसाधन हो सकते हैं. यह समुद्र एक अहम शिपिंग रूट भी है और यहां बड़ी तादाद में मछलियां भी हैं.

2016 में एक अंतरराष्ट्रीय ट्राइब्यूनल ने चीन के खिलाफ फैसला दिया था. इस ट्राइब्यूनल ने कहा था कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि चीन का इस इलाके पर ऐतिहासिक रूप से कोई अधिकार रहा है. लेकिन, चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया था.

क्या है ऑस्ट्रेलिया का रुख?

ऑस्ट्रेलिया के गुरुवार को यूएन में दाखिल किए गए डिक्लेयरेशन में कहा गया हैः "ऑस्ट्रेलिया दक्षिण चीन सागर में चीन के लंबे वक्त की ऐतिहासिक गतिविधि के ज़रिए स्थापित हुए एतिहासिक दावे या समुद्री अधिकारों और हितों को खारिज करता है."

इसमें पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के 2016 के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है, "दक्षिण चीन सागर में चीन के मैरीटाइम फीचर्स के सबसे बाहरी बिंदुओं को जोड़ने वाली बेसलाइन बनाने या आइलैंड ग्रुप बनाने का कोई कानूनी आधार नहीं है."

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इसमें यह भी कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया चीन के इस बात पर जोर देने को स्वीकार नहीं करता है कि पारासेल्स और स्प्रैटलिस पर उसकी संप्रभुता के दावे को बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मान्यता हासिल है. ऑस्ट्रेलिया ने इस मामले में वियतनाम और फिलीपींस की आपत्तियों का हवाला दिया है.

विश्लेषकों का कहना है कि यह डिक्लेयरेशन ऑस्ट्रेलिया की पहले की पोजिशन से एक बड़ा शिफ्ट है. पहले ऑस्ट्रेलिया अपील करता था कि दक्षिण चीन सागर पर दावा करने वाले सभी देशों को इस मामले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक सुलझाना चाहिए.

यह कदम ऐसे वक्त पर सामने आया है जबकि कई मसलों के चलते ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंधों में गिरावट आई है. इन मुद्दों में ऑस्ट्रेलिया की कोविड-19 की जड़ों का पता लगाने के लिए जांच की मांग शामिल है. कोविड-19 की शुरुआत चीन के वुहान शहर में हुई थी.

यूएन में ऑस्ट्रेलिया का डिक्लेयरेशन ऐसे वक्त पर भी आया है जबकि मंगलवार को वॉशिंगटन में ऑस्ट्रेलिया और यूएस के बीच सालाना बातचीत होनी है. दोनों देशों के क़रीबी रिश्ते हैं.

क्या है अमरीका का रुख?

अमरीका लंबे वक्त से इस इलाके में चीन के सैन्यीकरण का विरोध करता रहा है. ट्रंप प्रशासन ने हाल में ही पक्ष न लेने की एक नीति को पलट दिया है. इस तरह से यूएस ने चीन के दक्षिण पूर्व में मौजूद देशों के दावों का समर्थन कर दिया है.

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो इस महीने की शुरुआत में कह चुके हैं कि चीन के कुछ कदम पूरी तरह से गैरकानूनी हैं. इसकी प्रतिक्रिया में चीन ने कहा है कि अमरीका जानबूझकर तथ्यों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तोड़मरोड़ रहा है.

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चीन और यूएस के रिश्ते भी हालिया वक्त में नीचे आए हैं. चीन के कोरोना महामारी से निबटने के तरीकों, हॉन्गकॉन्ग में इसके सख्त कदमों और मुस्लिम अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव दोनों देशों के बीच हालिया तनाव बढ़ने की वजह रहे हैं.

इस हफ्ते की शुरुआत में अमरीका ने टेक्सस के ह्यूस्टन में एक चीन के वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने का आदेश दे दिया था. दूसरी ओर, चीन ने जवाबी कार्रवाई में चेंगडू में अमरीका के वाणिज्यिक दूतावास को बंद करने के लिए कह दिया था.

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