अमरीका ने पकड़ा चीनी जासूस, बढ़ सकता है तनाव

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अमरीका और चीन के बीच जारी तनाव में एक ताज़ा घटनाक्रम और जुड़ गया है. दरअसल सिंगापुर के एक नागरिक को अमरीका में चीन के जासूस के तौर पर काम करने का दोषी ठहराया गया है.

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक़, जुन वेई येओ अमरीका में एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी चला रहे थे, जिसके ज़रिए वो चीन की ख़ुफ़िया एजेंसी के लिए जानकारी जुटा रहे थे.

इसके अलावा एक चीनी रिसर्चर को भी हिरासत में लिया गया है, जिन पर चीनी सेना के साथ अपने संबंधों को छिपाने का अभियोग है.

इससे पहले चीन ने चांगडू में अमरीका के महावाणिज्य दूतावास को बंद करने का आदेश दिया था.

चीन ने ये जवाबी कार्रवाई के तौर पर किया था, क्योंकि अमरीका ने ह्यूस्टन स्थित चीनी दूतावास को बंद कर दिया था.

अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने इस फ़ैसले के पीछे वजह बताई थी कि चीन बौद्धिक संपदा "चुरा" रहा था.

चीनी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इसके जवाब में कहा था कि अमरीका का ये क़दम "चीन विरोधी झूठों के घालमेल" पर आधारित है.

चीनी राजनयिकों को ह्यूस्टन छोड़ने के लिए 72 घंटे का वक़्त दिया गया था, जो शुक्रवार शाम चार बजे ख़त्म हो गया.

पत्रकारों ने देखा कि डेडलाइन ख़त्म होने के बाद कुछ आदमी, जो अमरीकी अधिकारी लग रहे थे, वो जबरन दरवाज़ा खोलकर चीनी दूतावास में घुस गए. अमरीकी विदेश विभाग के डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी ब्यूरो के स्टाफ़ के लोग प्रवेश द्वार पर खड़े हो गए थे.

परमाणु शक्ति वाले दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है.

राष्ट्रपति ट्रंप का प्रशासन चीन से बार-बार किसी ना किसी मुद्दे पर भिड़ रहा है. फिर वो मुद्दा चाहे व्यापार का हो, कोरोना वायरस महामारी का हो, या हॉन्ग कॉन्ग में चीनी की ओर से लागू किए गए विवादित नए सुरक्षा क़ानून का.

ह्यूस्टन में चीन के वाणिज्य दूतावास के बाहर खड़ा एक सुरक्षाकर्मी

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सिंगापुर के नागरिक के बारे में

अमरीका के न्याय विभाग ने एक बयान में बताया कि जुन वेई येओ जिनका दूसरा नाम डिक्सन येओ है, उन्हें शुक्रवार को एक संघीय अदालत ने इस बात का दोषी ठहराया कि वो 2015-19 में चीनी सरकार के एक ग़ैर-क़ानूनी एजेंट के तौर पर काम कर रहे थे.

वीडियो कैप्शन, अब चीन ने अमरीका से चांगडू स्थित वाणिज्य दूतावास बंद करने को कहा है.

उन्हें इन अभियोगों के साथ पकड़ा गया था कि वो देश में एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी चलाकर महत्वपूर्ण और ग़ैर-सार्वजनिक जानकारी जुटा रहे हैं और चीनी इंटेलिजेंस को दे रहे हैं.

जुन वेई येओ ने ये स्वीकार भी किया कि वो उच्च-स्तरीय सुरक्षा मंज़ूरी वाले अमरीकियों को ढूंढते थे और फिर अपने फ़र्ज़ी क्लाइंट्स के लिए रिपोर्ट लिखवाते थे. येओ को 2019 में गिरफ्तार किया गया था.

गिरफ़्तार चीनी रिसर्चर कौन?

अमरीकी अधिकारियों के मुताबिक़, 37 वर्षीय रिसर्चर का नाम है जुआन टैंग.

वो उन चार चीनी नागरिकों में शामिल थीं जिन्हें इस हफ़्ते की शुरुआत में वीज़ा धोखाधड़ी के मामले में पकड़ा गया था.

ट्रंप और जिनपिंग

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उन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर ये बात छिपाई कि वो चीनी सेना के लिए काम कर रही थीं.

अमरीका ने सैन फ्रांसिस्को के चीनी दूतावास पर जुआन को शरण देने का आरोप लगाया था. जिसके बाद जुआन टैंग को चार लोगों के साथ कैलिफ़ोर्निया से हिरासत में लिया गया.

हालांकि अभी ये साफ़ नहीं है कि जुआन को किस तरह गिरफ्तार किया गया.

एसोसिएशन प्रेस की ख़बर के मुताबिक़, एफ़बीआई को जुआन टैंग की तस्वीरें मिली हैं, जिसमें वो सेना की वर्दी में दिख रही हैं और कुछ लेख भी मिले हैं, जिनमें उन्हें सेना से जुड़ा बताया गया है.

ख़बर में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया डेविस को कोट किया गया है कि उन्होंने जून में रेडिएशन ओन्कोलॉजी विभाग में विज़िटिंग रिसर्चर की नौकरी छोड़ दी थी.

अब देखना होगा कि ये ताज़ा घटनाक्रम चीन और अमरीका के बीच के तनाव को और कहां लेकर जाता है.

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