चीन से तनाव के बीच जयशंकर की अमरीका को खरी-खरी

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भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि बदलते वैश्विक परिवेश में अमरीका को ‘गठबंधन’ से आगे सोचने और ‘बहुध्रुवीय दुनिया’ में काम करना सीखने की ज़रूरत है.
विदेश मंत्री ने ये बातें बुधवार को यूएस-इंडिया बिज़नस काउंसिल के वार्षिक शिखर सम्मेलन ‘इंडिया आइडियाज़ समिट’ में कहीं.
उन्होंने कहा, “अमरीका को अब उन गठबंधनों से आगे बढ़ना होगा जिनके साथ वो पिछली दो पीढ़ियों से रहा है. उसे ऐसी दुनिया में काम करने सीखना होगा जो बहुध्रुवीय और बहुपक्षीय हैं.”
जयशंकर ने कहा कि भारत और अमरीका को लंबित व्यापारिक मुद्दे सुलझाने के लिए ‘व्यापक नज़रिए’ से सोचने की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि ये दोनों देशों के हित में होगा. हमें लंबित पड़े मसलों को सुलझा कर बड़े लक्ष्यों पर काम करना होगा. मैं आर्थिक संबंधों की अहमियत समझता हूँ. ये हमारी रोज़ी-रोटी के मसले हैं और देशों के आपसी संबंधों के मूल कारण हैं. लेकिन इसके साथ ही मेरा ये भी मानना है कि भारत और अमरीका को इससे आगे सोचने की ज़रूरत है.”
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत और अमरीका के बीच व्यापार से ‘ज़्यादा बड़े’ आपसी रिश्ते हैं. जैसे ज्ञान और नई खोज का रिश्ता.
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सामानों के आयात-निर्यात और एक-दूसरे के लिए निवेश का बेहतर माहौल बनाने के अलावा, भारत और अमरीका को तकनीक और नई खोज के क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है. मुझे लगता है कि इससे हमारे रिश्तों को एक अलग पहचान मिलेगी.”
'दुनिया को नया आयाम दे सकते हैं भारत-अमरीका'

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विदेश मंत्री ने कहा, “जब हम दुनिया को देखते हैं तो इसका परिदृश्य हमें एक जैसा नज़र आता है, हमारी महत्वाकांक्षाएँ ज़्यादा समान नज़र आती हैं. ऐसी स्थिति में किसी तकनीक या नई खोज पर साथ काम करने के लिए दोनों देशों के बीच आपसी भरोसा होना बहुत ज़रूरी है.
भारत और अमरीका के संबंधों का व्यापक रूप से ज़िक्र करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि दोनों देश अगर साथ मिलकर काम करें तो वो दुनिया को एक नया आयाम दे सकते हैं.
उन्होंने कहा, “हम समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-विरोधी रणनीति, कनेक्टिविटी, कोरोना वायरस महामारी से निबटने, अर्थव्यवस्था और यहाँ तक कि जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर भी साथ मिलकर काम कर रहे हैं.”
विदेश मंत्री ने ये बातें ऐसे वक़्त में कही हैं जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी की गिरफ़्त में है और भारत-चीन सीमा पर लंबे वक़्त से तनाव जारी है.
एस जयशंकर ने पिछले हफ़्ते ही कहा था कि भारत कभी किसी गुट का हिस्सा नहीं बनेगा.
वहीं, इस वक़्त अमरीका भी कोविड-19 से बुरी तरह त्रस्त है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार चीन पर महामारी से जुड़ी जानकारियाँ न देने का आरोप लगा रहे हैं.
दो दिन पहले ही, ब्रिटेन के दौरे पर गए अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा था कि चीन ने अपनी दादागिरी से दुनिया को डरा रहा है.
उन्होंने कहा था कि चीन ने समुद्र में अवैध क़ब्ज़ा किया है, हिमालयी देशों को धमकाया है और महामारी का इस्तेमाल अपने हितों की पूर्ति के लिए किया है.
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