हागिया सोफ़िया: अर्दोआन अब किस मस्जिद की ‘आज़ादी’ की बात कर रहे हैं: पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

हागिया सोफ़िया

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    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते कोरोना के अलावा कुलभूषण जाधव से जुड़ी ख़बरें तो सुर्ख़ियों में थीं ही, लेकिन तुर्की की हागिया सोफ़िया मस्जिद का भी ख़ास ज़िक्र था.

सबसे पहले बात हागिया सोफ़िया की.

तुर्की के इस्तांबुल में ऐतिहासिक हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को मस्जिद में बदलने के फ़ैसले के बाद इसी हफ़्ते 24 जुलाई को वहां 86 साल बाद पहली बार जुमे की नमाज़ अदा की गई. यहां तुर्की के अलग-अलग शहरों से हज़ारों लोग तो आए ही थे, नमाज़ पढ़ने वालों में ख़ुद तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन भी मौजूद थे.

वीडियो कैप्शन, हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने से तुर्की के लोग कितने खुश हैं?

पाकिस्तान के सारे अख़बारों में तस्वीरों के साथ ये ख़बर पहले पन्ने पर छपी है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, "86 बरस बाद अल्लाह-ओ-अकबर की आवाज़, हागिया सोफ़िया में जुमे की नमाज़ में लाखों शरीक, अर्दोआन ने कहा अगली मंज़िल मस्जिद-ए-अक़्सा."

अख़बार के अनुसार अर्दोआन कैबिनेट के सदस्यों के अलावा कई सांसद और देश के उच्च अधिकारी शामिल हुए. अर्दोआन ने मुसलमानों के पवित्र ग्रन्थ 'क़ुरान शरीफ़' का पाठ किया.

तुर्की के धार्मिक मामलों के मंत्री डॉक्टर अली एयरबाश ने एक हाथ में तलवार थामे जुमे का ख़ुतबा (नमाज़ के पहले दी जाने वाली तक़रीर) दिया.

हागिया सोफ़िया

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नमाज़ के बाद राष्ट्रपति अर्दोआन ऑटोमन साम्राज्य के सुल्तान मेहमेत द्वितीय के मज़ार पर भी गए. 1453 में सुल्तान मेहमेत द्वितीय ने ही उस वक़्त के क़ुस्तुनतुनिया पर क़ब्ज़ा कर उसका नाम बदलकर इस्तांबुल कर दिया था और हागिया सोफ़िया चर्च को मस्जिद बना दिया था. 1453 में भी पहले जुमे की नमाज़ पर सुल्तान मेहमेत द्वितीय शामिल हुए थे.

अर्दोआन ने हागिया सोफ़िया ग्रैंड मॉस्क के नाम से ट्विटर हैंडल भी शुरू किया. सरकार ने इसके लिए एक विशेष सिक्का भी जारी किया.

इस मौक़े पर अर्दोआन ने कहा, "हागिया सोफ़िया के बाद हमारी अगली मंज़िल मस्जिद-ए-अक़्सा होगी जिसे हम आज़ाद करवाएंगे."

अल-अक़्सा मस्जिद येरुशलम में है और जिस जगह पर यह है वो मुसलमानों के साथ-साथ इसाइयों और यहूदियों के लिए भी बहुत पवित्र मानी जाती है.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के संपादकीय पेज पर हागिया सोफ़िया के बारे में नुसरत जावेद का एक लंबा लेख छपा है.

तुर्की

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नुसरत जावेद लिखते हैं कि अर्दोआन का ये फ़ैसला हर तरह से ऐतिहासिक है जिसका असर न सिर्फ़ तुर्की में बल्कि पूरी दुनिया में देखा जाएगा. ये फ़ैसला आधुनिक तुर्की के निर्माता मुस्तफ़ा कमाल पाशा अतातुर्क के धर्मनिरपेक्ष विचार को रद्द करने का एक ठोस राजनीतिक प्रयास है. तुर्की की पहचान अब बुनियादी तौर पर एक इस्लामिक देश के रूप में होगी.

वो लिखते हैं कि 1994 में इस्तांबुल का मेयर बनने के बाद से ही अर्दोआन ने अतातुर्क की विचारधारा से बग़ावत शुरू कर दी थी. उस वैचारिक बग़ावत का एक पहलू ये भी है कि वो अपने समर्थकों को सामने ऑटोमन साम्राज्य को दोबारा बहाल करने का सपना बेचते हैं.

उनके ख़िलाफ़ हुई सैन्य बग़ावत तो नाकाम हो गई लेकिन आगे बग़ावत न हो इसके लिए उन्होंने ख़ुद को आवाम का चुना हुआ एक नेता की छवि के बजाए तुर्की के सुल्तान के रूप में पेश करना शुरू कर दिया.

लेकिन इसी बीच हाल ही में हुए स्थानीय चुनाव में विपक्षी पार्टी ने इस्तांबुल का मेयर पद जीत लिया. ख़ुद उनकी पार्टी में उनके ख़िलाफ़ आवाज़ें उठने लगीं. नुसरत जावेद लिखते हैं कि हागिया सोफ़िया को मस्जिद में बदलने के फ़ैसले को इस नज़रिए से भी देखने की ज़रूरत है.

कुलभूषण जाधव मामला

पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में मौत की सज़ा सुनाए गए भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव से जुड़ी ख़बरें भी इस हफ़्ते पाकिस्तानी अख़बारों में छायी रहीं.

कुलभूषण जाधव

इस मामले में इमरान ख़ान की सरकार ने लाए गए अध्यादेश का बचाव किया है जबकि विपक्षी पार्टियाँ इसके लिए सरकार को घेरने की कोशिश कर रही हैं.

पाकिस्तान ने 20 मई को एक अध्यादेश लाया था जिसके तहत सैन्य अदालत से सज़ा सुनाए गए कुलभूषण जाधव को इसके ख़िलाफ़ इस्लामाबाद हाईकोर्ट में अपील करने का अधिकार दिया गया था और साथ ही कुलभूषण जाधव को कॉन्सुलर ऐक्सेस दिया गया था.

पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो ने इमरान ख़ान की सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार बिना संसद और देश की जनता को विश्वास में लिए ये सबकुछ कर रही है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार बिलावल ने कहा, "इमरान ख़ान कश्मीर के सफ़ीर बनने के बजाए, कुलभूषण के वकील बन गए."

बिलावल भुट्टो ने कहा कि जब सदन सेशन में हो तो अध्यादेश नहीं लाया जा सकता लेकिन इमरान ख़ान लोकतंत्र और संसद में यक़ीन ही नहीं रखते. उन्होंने कहा कि वो सदन और अदालत दोनों जगह इस अध्यादेश का विरोध करेंगे.

लेकिन केंद्रीय क़ानून मंत्री फ़रोग़ नसीम ने अध्यादेश का जमकर बचाव किया. अख़बार जंग के अनुसार क़ानून मंत्री फ़रोग़ नसीम ने संसद में कहा कि "कुलभूषण से संबंधित अध्यादेश लाकर भारत के हाथ काट दिए. भारत चाहता था कि हम इंटरनेशल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) का फ़ैसला ना मानें ताकि वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ज़रिए हम पर पाबंदियाँ लगवा सके."

मंत्री ने कहा कि आईसीजे के फ़ैसले की रोशनी में अध्यादेश लाया गया है और इस राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर मामले में विपक्ष को राजनीति नहीं करनी चाहिए.

उन्होंने कहा कि अध्यादेश में अगर कुलभूषण जाधव की सज़ा माफ़ कर दी गई होती तो वो ख़ुद विपक्ष के साथ खड़े होकर इसका विरोध करते.

भारत का कहना है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नेवी के रिटायर्ड अफ़सर हैं और वो ईरान में थे जब ईरान-पाकिस्तान की सीमा पर पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के अधिकारियों ने उनका अग़वा कर लिया था.

लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के सर्विंग अफ़सर हैं और रॉ के एजेंट की हैसियत से पाकिस्तान में चरमपंथी गतिविधियों में शामिल थे. उन्हें पाकिस्तान में पकड़ा गया था और सेना की अदालत ने उन्हें मौत की सज़ा सुनाई थी लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत के आदेशानुसार उनकी फाँसी पर फ़िलहाल रोक लगी हुई है.

और अब बात कोरोना की

पाकिस्तान में अब तक क़रीब दो लाख 72 हज़ार लोग कोरोना संक्रमित हुए हैं और पाँच हज़ार आठ सौ (5800) से ज़्यादा लोग कोरोना से मारे जा चुके हैं. सिंध में सबसे ज़्यादा संक्रमित हैं जिनकी संख्या क़रीब एक लाख 18 हज़ार है, दूसरे नंबर पर पंजाब है, जहां क़रीब 92 हज़ार लोग अब तक संक्रमित हो चुके हैं.

राजधानी इस्लामाबाद में अब तक क़रीब 15 हज़ार लोग संक्रमित हुए हैं और 162 लोग मारे गए हैं. अब तक पंजाब में 2113 और सिंध में 2135 लोगों की मौत हो चुकी है.

पाकिस्तान

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अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार कोरोना मामले में धीरे-धीरे कमी आ रही है और अब देश भर में केवल 45 हज़ार मामले सक्रिय रह गए हैं.

लेकिन मुसलमानों के पर्व ईद-उल-अज़हा को देखते हुए मवेशियों की ग़ैर-क़ानूनी मंडी पर पुलिस ने सख़्त कार्रवाई शुरू कर दी है. शुक्रवार को ईद-उल-अज़हा जिसमें जानवरों की क़ुर्बानी दी जाती है. मंडी में स्क्रीनिंग के इंतज़ाम किए जा रहे हैं और लोगों से अपील की गई है कि ईद के मौक़े पर ज़्यादा घूमें नहीं.

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