अमरीका और चीन वीगर मुसलमानों पर फिर आमने-सामने

चीन के शिन्जियांग प्रांत से निर्यात होने वाले कई उत्पादों पर अमरीका प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है क्योंकि ऐसे आरोप हैं कि ये उत्पाद बंधुआ मज़दूरी से बनवाए जाते हैं.
जिन सामानों पर बैन लगाने का प्रस्ताव किया गया है उनमें सूती कपड़ों और टमाटर जैसी चीज़ें शामिल हैं जो चीन के निर्यात में शामिल मुख्य उत्पाद हैं.
ट्रंप सरकार शिन्जियांग में वीगर मुसलमानों के साथ हो रहे सलूक को लेकर चीन पर लगातार दबाव बना रही है.
पिछले कुछ सालों में चीन ने शिन्जियांग में चरमपंथ और अलगाववाद के ख़तरे के नाम पर सुरक्षा कड़ी कर दी है.
ऐसा अनुमान है कि लगभग 10 लाख लोगों को छोटी ग़लतियों पर बिना किसी मुक़दमे के हिरासत में रखा गया है. मगर चीन कहता है कि ये शिविर हैं जिनमें लोगों को दोबारा शिक्षा दी जा रही है.
अमरीका का कस्टम एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग(सीबीपी) एक ड्राफ़्ट तैयार कर रहा है जिससे वो बंधुआ मज़दूरी के शक़ के आधार पर किसी आयात को रोक अपने कब्ज़े में ले सकता है.

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अमरीका और चीन
इस क़ानून की मंशा मानव तस्करी, बाल मज़दूरी और मानवाधिकार हनन को रोकने की है.
साल की शुरुआत में अमरीका के सांसदों ने एक क़ानून का प्रस्ताव रखा था जिसमें ये मानकर चला गया कि शिन्जियांग में जो भी उत्पाद बन रहा है वो बंधुआ मज़दूरी से बन रहे है. इसलिए अगर ऐसा नहीं हो रहा है तो इसके लिए उत्पादकों को सर्टिफ़िकेट देने होंगे.
अमरीका और चीन शिन्जियांग के इन कड़ी सुरक्षा वाले डिटेंशन कैंप्स को लेकर कई बार टकरा चुके हैं लेकिन चीन कहता है कि सुरक्षा के लिए ये ज़रूरी है.
सीबीपी की एक अधिकारी ब्रैंडा स्मिथ ने समचारा एजेंसी रॉयटर्स से एक इंटरव्यू में कहा, "हमारे पास किसी अंतिम फ़ैसले पर पहुंचने के लिए तो नहीं लेकिन वाजिब सबूत हैं कि शिनजियांग में बनने वाले कॉटन के कपड़ों और टमाटर उत्पादों की सप्लाई चेन में बंधुआ मज़दूरी की आशंका है."
उन्होंने कहा कि हम और सबूतों के लिए अपनी जांच जारी रखेंगे.
क्या हो सकता है असर
इस प्रस्तावित बैन का असर अमरीका के उन लोगों पर पड़ सकता है जो कपड़े और खाद्य पदार्थ के व्यापार से जुड़े हैं.
चीन पूरे विश्व का 20 फ़ीसदी कपास अपने यहां उगाता है और मुख्य तौर पर शिन्जियांग में.
हाल ही में अमरीका की एक बड़ी फ़िल्म निर्माता कंपनी डिज़्नी, शिनजियांग में फ़िल्म मुलान की शूटिंग करने को लेकर विवादों में आ गई थी.
इस फ़िल्म को लेकर बहिष्कार की बातें हो रही हैं क्योंकि इसकी मुख्य कलाकार ने हॉन्गकॉन्ग में विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारियों का समर्थन किया था.
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