कोरोना के चलते इस जोड़े का हनीमून ऐसे बना क़ैद

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    • Author, सिकंदर किरमानी
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

मिस्र की राजधानी काहिरा में छह मार्च को हुई एक शादी से यह कहानी शुरू होती है.

दुबई में सेट हो चुके 36 साल के ख़ालेद और 35 साल की परी अपने दोस्तों और परिवार वालों के सामने शादी के बंधन में बंध गए. दोनों पहली बार आठ साल पहले मिले थे.

शादी के कुछ दिनों के बाद दोनों दुबई से अपने हनीमून के लिए मैक्सिको के कैनकुन रवाना हो गए. कोरोना वायरस संक्रमण की चर्चा शुरू हो गई थी लेकिन तब तक इसने दुनिया भर में महामारी का रूप नहीं लिया था.

हनीमून मनाते हुए ख़ालेद और परी को बहुत ज़्यादा चिंता नहीं थी लेकिन वे भीड़भाड़ की जगह पर जाने से बचने की कोशिश ज़रूर करते थे. उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि कोरोना के चलते जल्दी ही पाबंदियों का दौर शुरू होने वाला है, जिससे उनका सारा प्लान बदल जाएगा.

19 मार्च को जब दोनों तुर्की के रास्ते संयुक्त अरब अमीरात लौट रहे थे, तब तक पाबंदियों का दौर शुरू हो चुका था.

परी ने बीबीसी को बताया, "जब हम विमान पर सवार हुए और इंटरनेट की सुविधा भी थी, तब हमारे पास ढेरों संदेश आने लगे कि क्या दुबई पहुंच पाओगे? नया नियम लागू किया गया है, बाहर से आने वाले लोगों पर पाबंदी लगी हैं."

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लेकिन दोनों विमान में सवार में थे और उन्हें उम्मीद थी कि उन्हें वहां तक जाने की अनुमति मिल जाएगी. लेकिन जब इस्तांबुल में उन्होंने कनेक्टिंग फ़्लाइट पर चढ़ने की कोशिश की तो उन्हें कहा गया कि वे विमान पर नहीं चढ़ सकते.

नया नियम तब आया था जब मैक्सिको से उनका विमान उड़ने ही वाला था. नवविवाहिता दंपति इस्तांबुल एयरपोर्ट पर दो दिनों तक फंसे रहे. तुर्की में भी पाबंदियां लागू थीं जिसके चलते उन्हें शहर के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी.

उनके पास वैध बोर्डिंग पास भी नहीं था जिसके चलते उन्हें टॉयलेटरीज़ और कपड़े ख़रीदने के लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ रहा था. वे अपना सामान भी नहीं ले सकते थे.

संयुक्त अरब अमीरात वे जा नहीं जा सकते, मिस्र के लिए फ़्लाइट निलंबित हो चुकी हैं. इस हालात से निकलने के लिए उन्हें अब कुछ ना कुछ सोचना था.

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परी ने बताया, "हमने गूगल से मदद लेने का फ़ैसला लिया. हमने उन देशों की तलाश की जहां मिस्र के लोगों को बिना वीज़ा के आने की अनुमति थी और फिर देखा कि वहां के लिए कोई फ़्लाइट है या नहीं. इसके बाद हमें पता चला कि एक ही विकल्प है- मालदीव."

हिंद महासागर का द्वीप समूह मालदीव अपनी सफ़ेद रेत और फ़िरोज़ी पानी के लिए दुनिया भर में मशहूर है. इसे दुनिया के सबसे सुंदर स्थानों में गिना जाता है. ख़ालेद और परी ने अपने हनीमून के लिए मैक्सिको के बदले मालदीव जाने के बारे में भी सोचा था.

लेकिन इस मुश्किल समय में, ये दोनों मालदीव के समुद्री तटों पर श्वासनली लगाकर गोता लगाने के बारे में नहीं सोच रहे थे. ये बात दूसरी है कि दोनों इसको लेकर हमेशा रोमांचित हो जाते हैं.

परी ने बताया, "जब हम इमिग्रेशन काउंटर से अंदर गए तो हमने एक दूसरे को देखा. हम इस बात से ख़ुश थे कि हमें सोने के लिए एयरपोर्ट की कुर्सियों के बदले अब बेड तो मिलेगा."

वहीं पेशे से टेलीकॉम इंजीनियर ख़ालेद ने बताया, "हम अपने सामान को देखकर भी काफ़ी ख़ुश हुए थे."

कोई जगह तलाशने की समस्या तो दूर हो चुकी थी लेकिन नयी मुश्किलें शुरू होने वाली थीं.

मीडियाकर्मी परी ने बताया, "हमें लगने लगा था कि हम पर बहुत सारा वित्तीय बोझ आ गया है. हमने अपनी नौकरियों के बारे में नहीं सोचा था. हमने अपना लैपटाप भी नहीं लिया था. जब आप हनीमून पर जाते हैं तो काम के बारे में ज़्यादा नहीं सोचते हैं. उसकी उम्मीद भी नहीं करते हैं."

मालदीव में रिज़ॉर्ट पहुंचने के बाद दोनों को महसूस हुआ कि गिनती के ही पर्यटक हैं और उनमें से ज़्यादातर अपने-अपने देशों की फ़्लाइट का इंतजार कर रहे हैं. जब सारे मेहमान चले गए तो होटल बंद हो गया. इसके बाद दोनों को दूसरे द्वीप पर जाना पड़ा. वहां भी ऐसा ही हुआ.

पिछला पूरा महीना दोनों ने मालदीव सरकार की ओर से ओलहुवेली द्वीप के एक रिज़ॉर्ट में बनाए गए स्पेशल आइसोलेशन फ़ैसिलिटी सेंटर पर बिताया है.

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ख़ालेद और परी दोनों इसके लिए मालदीव सरकार के अधिकारियों और रिज़ॉर्ट के कर्मचारियों के प्रति आभार भी जताते हैं क्योंकि यह सेंटर सस्ता भी है.

ख़ालेद ने बताया, "हमें अच्छा अनुभव हो, इसके लिए वे लोग अपना बेस्ट दे रहे हैं. शाम में वे लोग संगीत बजाते हैं, हर दिन डीजे बुलाते हैं. इसके बाद भी हमें कई बार ख़राब लगता है क्योंकि कोई डांस करने के लिए नहीं होता."

इस रिज़ॉर्ट पर 70 अन्य लोग भी मौजूद हैं, इनमें से ज़्यादातर हनीमून मनाने के लिए आए हुए हैं. परी के मुताबिक लेकिन इन लोगों से उनमें एक अंतर है, "इन लोगों ने हनीमून डेस्टिनेशन के तौर पर मालदीव को चुना था, हम लोगों ने नहीं."

मालदीव में इस वक़्त 300 के क़रीब पर्यटक हैं. दूसरे देशों से आने वाले पर्यटकों पर अब मालदीव ने भी रोक लगा दी है.

वैसे ख़ालेद और परी अब अपने घर दुबई लौटने के लिए बेचैन हैं. इनका कहना है कि मौजूदा मॉनसून में होने वाली भारी बरसात और रमज़ान महीने के रोज़े के चलते कुछ ही बार समुद्र तट पर जा पाए हैं.

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दोनों अपने-अपने काम पर लौट गए हैं, लेकिन वाई-फ़ाई के ज़रिए कनेक्ट होने में उन्हें काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

लेकिन घर वापसी इतनी आसान भी नहीं है. ये दोनों दुबई में रहते हैं लेकिन वहां के नागरिक नहीं हैं. ऐसे में दुबई जाने वाली फ़्लाइट में उन्हें उड़ान भरने की अनुमति नहीं है.

मिस्र जाने का विकल्प इनके पास है, क्योंकि मिस्र अपने देश के नागरिकों को मालदीव से निकालने के लिए विमान सेवा मुहैया करा रहा है. लेकिन उस सूरत में उन्हें सरकारी क्वारंटाइन सेंटर में 14 दिन बिताने होंगे. इस विकल्प के ज़रिए भी दोनों दुबई नहीं पहुंच पाएंगे.

दोनों संयुक्त अरब अमीरात के अधिकारियों से लगातार मदद मांग रहे हैं. सरकारी पोर्टल पर आवेदन भी जमा कराया है लेकिन अभी तक उन्हें अनुमति नहीं मिली है.

इतना ही नहीं, अभी तो कोई विमान उड़ान सेवा भी उपलब्ध नहीं है.

परी ने बताया, "जब जब हम ये ख़बर देखते हैं कि एयरलाइंस सर्विस अपनी सेवाओं को शुरू करने की तारीख़ें आगे बढ़ा रही हैं, हमारा तनाव बढ़ जाता है. हमें होटल में या फिर घरों में ही क्वारंटाइन करने को कहा जाएगा तो हम उसे करने के लिए तैयार हैं."

बहरहाल, उनके इस हनीमून ट्रिप का ख़र्च लगातार बढ़ता जा रहा है. अब दोनों ने इसका हिसाब रखना छोड़ दिया है. वे कहते हैं, "जब तक हम वापस दुबई नहीं पहुंच जाते, तब तक हम हिसाब नहीं करेंगे. हमें नहीं मालूम कि ये कब तक जारी रहेगा."

दोनों को यह भी मालूम है कि दुनिया में लोग किन मुश्किल स्थितियों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अपनी मुश्किल भी काफ़ी बड़ी लग रही है.

ख़ालेद ने बताया, "जब आप किसी रिज़ॉर्ट में अंतिम मेहमान हों और सभी स्टाफ़ आपको बाय-बाय कह रहे हों तो बुरा लगता है. उन कर्मचारियों के लिए बुरा लगता है. यह हमारे साथ दो बार हो चुका है. ऐसी जगह लोगों और अच्छे पलों से भरा होना चाहिए. लेकिन ऐसा अभी नहीं है."

वहीं परी ने बताया, "जब भी हम लोगों को बताते हैं कि मालदीव में फंसे हुए हैं, तो लोग हंसते हुए कहते हैं, 'यह बुरी स्थिति है, काश आपकी जगह हम होते.' यह इतना सहज भी नहीं है और ख़ुश होने की बात भी नहीं है. यह काफ़ी तनाव भरा है. किसी भी ख़ुशी के बदले मैं अपने घर में परिवार के साथ समय व्यतीत करना चाहूंगी."

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