सऊदी अरब अपने ही एक बड़े ख़ुफ़िया अधिकारी के पीछे क्यों?

सऊदी अरब

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    • Author, फ्रैंक गार्डनर
    • पदनाम, सुरक्षा संवाददाता

कई वर्षों तक ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी एमआई16 और अन्य पश्चिमी देशों की ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने वाले सऊदी अरब के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी पर उनके परिजनों के साथ मुक़दमा चलाया जा रहा है.

पश्चिमी देशों के पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारियों ने ये जानकारी दी है.

तीन साल पहले डॉक्टर साद अल जाबरी मुल्क छोड़कर भाग गए थे. उन्होंने पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ अल क़ायदा के बम धमाके की साज़िश को नाकाम करने में मदद की थी.

उनके बड़े लड़के ख़ालिद के मुताबिक़ अब उनके बच्चों को बंधकों की तरह पकड़ लिया गया है.

ख़ालिद अल जाबरी ने कहा, "उमर और सारा को 16 मार्च की सुबह पकड़ लिया गया. क़रीब 50 सुरक्षा अधिकारी 20 कारों में पहुँचे थे. उस समय वे सो रहे थे, लेकिन वे उन्हें बिस्तर से उठाकर ले गए."

उसके बाद रियाद स्थित उनके घर की तलाशी ली गई, सीसीटीवी का मेमोरी कार्ड निकाल लिया गया. दोनों को एक डिटेंशन सेंटर पर रखा गया है और उनसे कोई संपर्क नहीं कर सकता है.

ख़ालिद अल जाबरी ने कनाडा से फ़ोन पर बीबीसी से कहा कि ये नहीं बताया गया है कि उनपर क्या आरोप लगाए गए हैं, न ही उनकी गिरफ़्तारी की कोई वजह परिवार को बताई गई है.

ख़ालिद और उनके पिता साद अल जाबरी इस समय कनाडा में रह रहे हैं. ख़ालिद का कहना है कि उन्हें ये नहीं पता कि उमर और सारा ज़िंदा भी हैं या नहीं.

ख़ालिद का ये मानना है कि उमर और सारा को इसलिए बंदी बनाया गया ताकि उनके पिता को सऊदी अरब वापस आने को मजबूर किया जा सके. लेकिन उनके पिता को डर है कि सऊदी अरब लौटते ही उन्हें ग़िरफ़्तार कर लिया जाएगा और जेल में डाल दिया जाएगा.

खालिद अल जाबरी (बाएँ) को लगता है कि उनके भाई उमर (दाएँ) को अगवा किया गया है

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इमेज कैप्शन, खालिद अल जाबरी (बाएँ) को लगता है कि उनके भाई उमर (दाएँ) को अगवा किया गया है

ख़ालिद को ये डर है कि उनके पिता के ख़िलाफ़ झूठा मामला बनाया जा सकता है, जबकि वे निर्दोष हैं.

सऊदी अरब के अधिकारियों ने इस मामले पर कोई टिप्पणी नहीं की है, जबकि बीबीसी ने उनसे इस पर अपना पक्ष रखने का अनुरोध किया था.

साद अल जाबरी कौन हैं?

वर्षों तक साद अल जाफ़री सऊदी प्रिंस मोहम्मद बिन नाएफ़ के दाहिने हाथ माने जाते थे. उन्हें 2000 के दशक में देश में अल क़ायदा के विद्रोह को हराने का श्रेय दिया जाता है.

उन्हें अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड की ख़ुफ़िया एजेंसियों के साथ सऊदी अरब के रिश्तों की अहम कड़ी माना जाता था.

सारा अल जाबरी

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इमेज कैप्शन, सारा अल जाबरी से भी कोई संपर्क नहीं हो पाया है

उनके साथ काम करने वाले पश्चिमी देश के एक पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी का मानना है कि इसी अहम कड़ी ने 2010 में सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी.

यमन स्थित अल क़ायदा ने शिकागो जाने वाले एक कार्गो विमान में शक्तिशाली बम प्लांट किया था. ये बम प्रिंटर के इंक टोनर कारट्रिज़ में छिपाया गया था.

सऊदी ख़ुफ़िया अधिकारी का एक मुख़बिर अल क़ायदा में था, जिसने एमआई16 को ये सूचना दी. उस मुख़बिर ने उस डिवाइस का सीरियल नंबर तक बता दिया गया था, जिसमें बम छिपाया गया था.

ब्रिटेन की आतंकवाद निरोधक पुलिस ने बम का पता लगा लिया और फिर ईस्ट मिडलैंड्स एयरपोर्ट पर प्लेन के अंदर ही इस बम को निष्क्रिय कर दिया गया.

पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी के मुताबिक़ अगर पूर्व नियोजित साज़िश के अनुसार शिकागो में धमाका होता, तो सैकड़ों लोगों की जान जा सकती थी.

इस अधिकारी ने ये भी बताया कि डॉक्टर साद अल जाबरी ने सऊदी अरब की आतंकवाद के ख़िलाफ़ कोशिशों का काया पलट करके रख दिया था. उनके मुताबिक़ पुराने सिस्टम की जगह साद अल जाबरी ने सऊदी ख़ुफ़िया को आधुनिक बनाया, जिसमें फ़ॉरेंसिक्स और कंप्यूटर आधारित डेटा का इस्तेमाल होने लगा.

सबसे स्मार्ट अधिकारी

वो ये भी मानते हैं कि सऊदी ख़ुफ़िया में उन्होंने जिन भी अधिकारियों के साथ काम किया, उनमें डॉक्टर साद अल जाबरी सबसे स्मार्ट थे.

कम बोलने वाले डॉक्टर साद अल जाबरी ने एडिनबरा यूनिवर्सिटी से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस में डॉक्टरेट किया था. वे कैबिनेट मंत्री के रैंक तक पहुँचे थे और आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय में मेजर जनरल के रैंक पर भी काम किया था.

लेकिन 2015 आते आते सब कुछ बदल गया. किंग अब्दुल्लाह की मौत हो गई और उनके सौतले भाई सलमान सत्ता पर आसीन हुई. उन्होंने अपने युवा भाई मोहम्मद बिन सलमान को रक्षा मंत्री बना दिया.

मोहम्मद बिन सलमान ने अपने देश की सेना को यमन के गृह युद्ध में दखल देने का आदेश दिया. लेकिन डॉक्टर साद अल जाबरी ने इस क़दम का विरोध किया. उनका तर्क ये था कि सऊदी अरब के पास वहाँ से बाहर निकलने की कोई रणनीति नहीं है.

आज पाँच साल बाद भी सऊदी अरब यमन से निकलने का रास्ता तलाश रहा है, जो उसके लिए काफ़ी ख़र्चीला भी साबित हुआ है.

वर्ष 2017 में मोहम्मद बिन सलमान ने अपने पिता की सहमति से बग़ावत की. हालांकि इसमें कोई ख़ून ख़राबा नहीं हुआ. प्रिंस मोहम्मद बिन नाएफ़ की जगह वे ख़ुद क्राउन प्रिंस बन गए.

आज मोहम्मद बिन नाएफ़ हिरासत में हैं, उनकी संपत्तियाँ जब्त हो गई हैं. जिन लोगों ने भी उनके साथ काम किया था, उन्हें उनके पद से हटा दिया गया है. डॉक्टर साद भाग कर कनाडा चले गए.

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ख़तरा

लेकिन पश्चिमी ख़ुफ़िया अधिकारी ये मानते हैं कि मोहम्मद बिन सलमान अब भी डॉक्टर साद अल जाबरी को अपने लिए ख़तरा मानते हैं.

एक ख़ुफ़िया अधिकारी कहते हैं, "मोहम्मद बिन सलमान एक ऐसे व्यक्ति को आज़ाद नहीं देख सकते जो उनके ख़िलाफ़ शक्तियों को एकजुट कर सकता है."

उनके परिजनों का कहना है कि उन्होंने किसी तीसरी जगह सऊदी अधिकारियों से मिलने की कोशिश की थी, लेकिन ऐसा हो न सका और इस कारण वे सबसे सामने आए हैं.

डॉक्टर साद के बेटे ख़ालिद कहते हैं, "इसके संकेत हैं कि डॉक्टर साद को निशाना बनाया जा रहा है. कई तरह की धमकियाँ दी जा रही हैं और कनाडा के अधिकारी इसे गंभीरता से ले रहे हैं. हम देशभक्त हैं. हम अपने देश से प्यार करते हैं. हम सऊदी अरब को शर्मिंदा नहीं करना चाहते. लेकिन उमर और साद का इस तरह अपहरण करना एक सरकार की ओर से दिन-दहाड़े की गई ठही है."

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