कोरोना वायरस: संकट में सऊदी अरब लेने जा रहा ये कड़े फ़ैसले

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सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने शनिवार को कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण से अर्थव्यवस्था पर जो चोट पहुंची है उससे निपटने के लिए कड़े और तकलीफ़देह फ़ैसले लिए जाएंगे. उन्होंने कहा कि इस संकट से निकलने के लिए सारे विकल्प खुले हैं.
अल-अरबिया टीवी को दिए इंटरव्यू में अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब बजट खर्चों में भारी कटौती करेगा. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस का असर इस साल की दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखेगा. अल-जदान ने कहा कि सऊदी अरब के वित्त मामलों को टाइट किया जाएगा ताकि सब कुछ और अनुशासित रहे.
सऊदी के वित्त मंत्री ने कहा कि मुल्क भीतर मेगा प्रोजेक्ट के खर्चों में भी कटौती की जाएगी. दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश सऊदी अरब ऐतिहासिक रूप से तेल की कम क़ीमतों से जूझ रहा है.
सऊदी अरब के केंद्रीय बैंक में विदेशी मुद्रा भंडार मार्च महीने में पिछले 20 सालों में सबसे तेजी से गिरा है. 2011 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गया है.
तेल की क़ीमत गिरने के बाद से पहली तिमाही में 9 अरब डॉलर का बजट घाटा हुआ है. जदान ने पिछले महीने कहा था कि सऊदी अरब इस साल 26 अरब डॉलर का क़र्ज़ ले सकता है ताकि विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित रखा जा सके. सऊदी अरब की मॉनेटरी अथॉरिटी ने मंगलवार को कहा था कि मार्च में सऊदी अरब की विदेशी संपत्ति में 464 अरब डॉलर की गिरावट आई है. यह पिछले 19 सालों में सबसे निचले स्तर पर है. सऊदी का कहना है ऐसा कोरोना वायरस की महामारी के कारण हुआ है.
सऊदी के वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने कहा कि अगले क़दम और फ़ैसले को लेकर विचार चल रहा है ताकि नुक़सान की भरपाई की जा सके. वित्त मंत्री ने कहा कि तेल और नॉन-ऑइल राजस्व में गिरावट आगामी तिमाही में दिखेगी.
जदान ने कहा, ''इस साल की शुरुआत में तेल की क़ीमत 60 डॉलर प्रति बैरल थी और आज 20 डॉलर प्रति बैरल है. यह 50 फ़ीसदी से भी ज़्यादा की गिरावट है.''

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सऊदी अरब ने भी संक्रमण रोकने के लिए ज़्यादातर शहरों में लॉकडाउन लगा रखा है और कर्फ़्यू भी लगा हुआ है. अंतर्राष्ट्रीय हवाई सेवा पूरी तरह से बंद है. इस वजह से भी सऊदी का नॉन ऑइल राजस्व बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. लोग घरों में हैं और सारा कारोबार बंद है.
सऊदी अरब के वित्त मंत्री अल जदान ने कहा, "कोरोना वायरस को लेकर एहतियाती क़दम उठाए जाने की वजह से जो आर्थिक गतिविधियां ठप पड़ी है, उससे तेल के अलावा बाक़ी की कमाई भी प्रभावित हुई है. हमें इन हालात का ख़ुदा की मर्ज़ी से समझदारी और कुशलता के साथ मुक़ाबला करना होगा. हम इस महामारी से निपटने के लिए कई सारे रास्तों को तलाशने में जुटे हुए हैं. ऐसे हालात दूसरे विश्व युद्ध के बाद सत्तर सालों में दुनिया ने नहीं देखी है. वैश्विक स्तर पर इस तरह की महामारी पहले कभी नहीं देखी गई थी."
उन्होंने पिछले हफ़्ते कहा था कि सरकार अपने राजस्व भंडार से सीमित मात्रा में धन निकालेगी. वो अधिकतम 32 अरब डॉलर ही अपने राजस्व भंडार से निकालेगी. इसके बदले सरकार क़र्ज़ लेने की अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करेगी और 60 अरब डॉलर का ऋण जारी करेगी.
उन्होंने आगे कहा, "हम क़र्ज़ लेना जारी रखेंगे. सरकारी क़र्ज़ को लेकर सुरक्षा की वजह से इसकी हमने बड़ी मांग देखी है. मार्केट और उपलब्ध नक़दी की स्थिति के हिसाब से हमारी योजना 220 अरब रियाल लोन लेने की है." अल जदान का कहना है कि सऊदी की सरकार हो या फिर बाक़ी दुनिया वो कोरोना से पहले की आर्थिक स्थिति में नहीं लौटने जा रहे हैं. ख़ासतौर पर जिस तरह से इस महामारी का असर आर्थिक गतिविधियों और आपूर्ति चेन पर पड़ा है.

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'उठाए जाने वाले क़दम दुखदायी होंगे'
सऊदी अरब के सामने मौजूदा आर्थिक चुनौतियों के बारे में अल-जदान कहते हैं कि सऊदी की आर्थिक स्थिति अब भी बड़े पैमाने पर लोगों के बाज़ार में खर्च करने की हैसियत पर निर्भर करती है और इसलिए वो लोगों की खर्च करने की हैसियत बरकरार रखेंगे ताकि आने वाले भविष्य में अर्थव्यवस्था की हालत ठीक बनी रहे.
हालांकि उन्होंने आगे कहा कि इस दिशा में और क़दम उठाए जाने की ज़रूरत है ताकि यह कायम रह सके. उन्होंने कहा, "सार्वजनिक वित्तीय निवेश को और मज़बूत करने की ज़रूरत है. सरकार चार-पांच साल से इस दिशा में काम कर रही है और घाटा कम करने की कोशिश कर रही है. लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना है. हम खर्च कम करेंगे. उठाए गए क़दम दुखदायी हो सकते हैं लेकिन वो सब के भले के लिए होंगे. देश और नागरिकों की भलाई के लिए होंगे. आगे ख़ुदा की मर्ज़ी है."
उन्होंने सार्वजनिक वित्तीय निवेश को बरकरार रखने के मक़सद से स्वास्थ्य क्षेत्र में भी पूंजी निवेश करने की बात कही है.
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परियोजनाएँ अधर में लटकीं
वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार कुछ परियोजनाओं को देर से पूरा करने पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा, "एहितायतन उठाए गए क़दमों के तहत हम परियोजनाओं के ऊपर होने वाले खर्च में कमी लाएंगे. 2030 विजन के तहत काम कर रही कुछ अहम परियोजनाओं या फिर कुछ कार्यकर्मों पर होने वाले खर्च पर हम एहतियात बरतते हुए देरी से फ़ैसले लेंगे. इससे हमारे खर्च में कमी आएगी."
वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार दूसरे मदों पर भी खर्च में कटौती को लेकर विचार कर रही है. बशर्ते कि लोगों की बुनियादी सेवाएं प्रभावित न हों. उन्होंने कहा, "हम दूसरे क्षेत्रों में भी कटौती के बारे में सोच रहे हैं लेकिन लोगों की बुनियादी सेवाओं को प्रभावित करने वाले कोई भी क़दम नहीं उठाएंगे. इसके अलावा सभी विकल्प सरकार के पास हैं, वो उन विकल्पों और उनसे पड़ने वाले प्रभावों को देख रही है. इसके आधार पर हम जल्दी ही अपनी योजनाएँ तैयार करेंगे."

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