कोरोना वायरसः भेदभाव का शिकार हो रहे होम क्वारंटीन में रह रहे लोग

चेतावनी स्टिकर
इमेज कैप्शन, उन लोगों के घर पर चेतावनी स्टिकर लगाए गए हैं जिन्हें होम क्वारंटीन में रखा गया है
    • Author, विकास पांडेय
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, दिल्ली

भारत में कोरोनावायरस के मामले

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स्रोतः स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय

11: 30 IST को अपडेट किया गया

भारत धींगरा के परिवार में छह लोग हैं. उनका परिवार दिल्ली में अपने घर में होम क्वारंटीन में है. धींगरा के भाई और भाभी अमरीका से 22 मार्च को भारत लौटे और उसके बाद उनका परिवार होम क्वारंटीन में चला गया.

इनमें से किसी में भी कोरोना के कोई लक्षण नहीं दिखाई दिए हैं, लेकिन पूरे परिवार ने सरकार की सलाह मानते हुए ख़ुद को क्वारंटीन कर लिया.

इसके बाद अधिकारियों ने उनके घर के बाहर एक स्टिकर चिपका दिया जिस पर लिखा थाः यहां न आएं. घर क्वारंटीन में है.

लोग घर की तस्वीर शेयर करने लगे

लॉकडाउन

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इसके पीछे मक़सद यह था कि लोग क़ानून का पालन करें. लेकिन, धींगरा जैसे लोग जो कि पहले से ही समझदारी के साथ नियमों को मान रहे थे, उनके लिए यह स्टिकर तनाव और मनोवैज्ञानिक दबाव पैदा करने वाला था.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "हमारा घर चिड़ियाघर जैसा बन गया है. घर के सामने से गुज़रने वाले लोग तस्वीरें लेते हुए जाते हैं. हम अगर एक मिनट के लिए भी बालकनी में भी आ जाएं तो हमारे पड़ोसी हमें घर के अंदर ही रहने के लिए कहने लगते हैं."

वह कहते हैं, "हम भी इस चीज़ की अहमियत को समझते हैं कि क्वारंटीन के तहत जो घर है उसे निशान लगाकर चिन्हित कर देना चाहिए ताकि जागरूकता बनी रहे. सरकारी अफ़सर हमारे साथ बेहद अच्छे से पेश आते हैं, लेकिन कुछ लोगों का व्यवहार चोट पहुंचाता है."

उन्होंने कहा, "कुछ लोगों ने हमारे घर की तस्वीरें स्थानीय व्हाट्सएप ग्रुप्स पर चेतावनी के तौर पर डाल दीं."

धींगरा कहते हैं कि इससे उनके परिवार की निजता का उल्लंघन होता है. उनके मुताबिक़, "लोगों को यह समझने की ज़रूरत है कि होम क्वारंटीन एक सतर्कता वाला क़दम है. इसका मतलब यह नहीं है कि हम संक्रमित हैं. लेकिन, मान भी लीजिए कि हम संक्रमित हैं, तब भी हमें इसके लिए बहिष्कृत करने की ज़रूरत नहीं है."

बीबीसी ने देशभर में कई लोगों से बात की है जिनका इसी तरह का अनुभव है.

शक भरी नज़र

हाथ पर निशान

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इमेज कैप्शन, कई लोगों के हाथ पर स्टांप लगा दिया गया है

नाम न छापने की शर्त पर एक कपल ने कहा कि नोएडा में उनका घर कई लोगों के लिए एक डरावनी जगह बन गया है.

उन्होंने बताया, "विदेश से लौटते ही हमने ख़ुद को होम क्वारंटीन में डाल लिया. लेकिन, हमें यह नहीं पता था कि समुदाय हमें पूरी तरह से नकार देगा."

वे चाहते हैं कि फोन या टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए ही उन्हें उत्साहित करने वाले कुछ शब्द बोल दिए जाएं.

वह कहते हैं, "लेकिन, हर कोई हमें शक की नज़र से देखता है यहां तक कि हम अपनी बालकनी में भी हों तब भी. लोगों की आंखों में यह दिखाई देता है."

वह कहते हैं, "हम किसी से मिल नहीं रहे हैं. यह वाक़ई दुखद है कि हमारे साथ लोग इस तरह से पेश आ रहे हैं."

अफ़वाहें फैलना शुरू

हाथ पर स्टांप के निशान

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उत्तर प्रदेश के फ़र्रुख़ाबाद के रहने वाले कुलजीत सिंह की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्हें अपने ही घर पर क्वारंटीन रहने के लिए बोल दिया गया था.

वह बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर से एक पार्टी में मिले थे. कपूर बाद में कोरोना वायरस के टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थीं.

सिंह कहते हैं, "मीडिया में यह केस लगातार चर्चा में बना रहा और इससे मेरे परिवार पर बेहद दबाव रहा. तरह-तरह की अफ़वाहें फैलने लगीं. कुछ ने कहा कि मुझे ख़ून की उल्टी हुई है और मैं अब कुछ दिनों का ही मेहमान हूं."

सिंह ने कहा, "लोग डरे हुए हैं और वे सोशल मीडिया में उड़ने वाले किसी भी अफ़वाह को सच मान लेते हैं."

सिंह का क्वारंटीन वाला वक़्त अब ख़त्म हो चुका है. लेकिन, वह कहते हैं कि उन पर लगा यह लांछन लंबे वक़्त में दूर होगा.

सिंह के मुताबिक़, "यहां तक कि दूध और सब्ज़ी वालों ने भी हमारे यहां सामान देना बंद कर दिया."

पड़ोसी हैलो कहने से भी बचने लगे

डॉक्टर

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कुछ मामलों में, टेस्टिंग के तरीक़े ने कई तरह की दिक्क़तें पैदा कीं.

बिहार के रहने वाले एक कपल ने कहा कि उनके बेटे से बिल्डिंग में अपार्टमेंट से बाहर आकर सड़क टेस्टिंग के लिए स्वाब देने को कहा गया.

उन्होंने कहा, "कनाडा से लौटने के बाद वह होम क्वारंटीन में था. कई सारे डॉक्टरों को हज़मट सूट में देखकर हमारे पड़ोसी घबरा गए. लोगों ने दूर से भी हमें हैलो बोलना छोड़ दिया."

उन्होंने कहा कि उनका बेटा टेस्ट में नेगेटिव पाया गया, लेकिन भेदभाव जारी है.

उन्होंने कहा, "लोग अभी भी हमसे बातचीत करने से बचते हैं."

डेटा लीक हुआ

हैदराबाद और बेंगलुरू में क्वारंटीन में गए लोगों के नाम और पते सार्वजनिक कर दिए गए.

बेंगलुरू के एक सीनियर अफ़सर ने बीबीसी हिंदी के इमरान क़ुरैशी को बताया, "होम क्वारंटीन में रह रहे लोग ऐसे घूम-फिर रहे थे जैसे कि वे किसी छुट्टी पर आए हों. और इसी वजह से उनकी जानकारियां साझा की गई थीं."

लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे लोगों की निजता का हनन होता है.

बेंगलुरु के वकील के वी धनंजय कहते हैं, "अगर सरकार केवल नाम जाहिर करती तब तक ठीक था, लेकिन पता भी उजागर कर देना दिक्कतों को न्योता देने जैसा है."

क्वारंटीन इकाइयों को लेकर कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं. बेंगलुरू से 150 किमी दूर मैसूर में स्थानीय लोगों ने प्रशासन को एक होटल ख़ाली कराने के लिए मजबूर कर दिया. इस होटल में 27 लोगों को क्वारंटीन किया गया था.

मैसूर के पूर्व डिप्टी मेयर रहे और इस इलाक़े में रहने वाले एम जे रविकुमार ने कहा, "लोगों को डर था कि इस होटल में रहने वाले खिड़कियों से थूक सकते हैं और इससे उन्हें संक्रमण हो जाएगा."

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सी बी रिसिंथ ने कहा कि भेदभाव करने वालों और अफ़वाहें फैलाने वालों के ख़िलाफ़़ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

दूसरी ओर, हैदराबाद में होम क्वारंटीन में रह रहे कम से कम 19 लोगों की निजी जानकारियां लीक हो गईं. इन जानकारियों में उनके फ़ोन नंबर भी शामिल हैं.

इसकी वजह से कुछ परिवारों के यहां वक्त-बेवक्त फ़ोन कॉल्स आने लगीं. इन कॉल्स में उन्हें बिना मांगे सलाह मिलती थी कि वायरस को कैसे ख़त्म किया जाए.

24 मार्च को लॉकडाउन के ऐलान से एक दिन पहले शहर छोड़ देने वाले रमेश टुंगा ने कहा कि उन्हें भी इसी तरह के भेदभाव का शिकार होना पड़ा है.

उन्होंने कहा, "मैंने हैदराबाद छोड़ा ताकि मैं अपने गांव में रह सकूं. मैंने गांव के अधिकारियों को सूचना दी और मैं सेल्फ़-आइसोलेशन में चला गया जबकि मेरी कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं थी."

लेकिन, इससे मेरे लिए कई दिक्क़तें पैदा हो गईं.

उन्होंने कहा, "लोगों ने मेरे परिवार से बात करना बंद कर दिया. हर कोई यह मान रहा था कि मुझे कोरोना वायरस है और मैं पूरे गांव को संक्रमित कर दूंगा."

उन्होंने कहा, "सतर्क होना अच्छा है, लेकिन लोगों को अमानवीय नहीं होना चाहिए."

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