हाफ़िज़ सईद पर शिकंजा कसा, लाहौर हाईकोर्ट ने दी सुनवाई को मंज़ूरी

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- Author, शहज़ाद मलिक
- पदनाम, बीबीसी उर्दू
लाहौर हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित संगठनों जमात-ए-इस्लामी और फ़लाह-ए-इंसानियत के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ दाख़िल की गई याचिका पर सुनवाई को मंज़ूरी दे दी है.
भारत हाफ़िज़ सईद को 2008 के मुंबई हमलों का ज़िम्मेदार मानता है.
अदालत ने आदेश दिया है कि लाहौर के आतंकवाद रोधी पुलिस थाने की ओर से लगाए गए आरोपों को रिकॉर्ड के रूप में पेश किया जाए.
हाफिज़ सईद के वकील एके डोगर ने उनके ख़िलाफ़ लगाए गए मामलों को हटाने के लिए भी एक याचिका दायर की थी जिस पर मंगलवार को लाहौर हाईकोर्ट के जज मज़हर अली अकबर नक़वी की अगुवाई वाली डिविज़न बेंच ने सुनवाई की.
याचिका में कहा गया है कि हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ मामले न सिर्फ़ राजनीति से प्रेरित हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में लगाए गए हैं.

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हाफ़िज़ के वकील ने इस याचिका में कहा है कि उनके मुवक़्किल किसी ऐसी संस्था से नहीं जुड़े रहे जो चरमपंथ या राज्य के ख़िलाफ़ गतिविधियों में शामिल रही हो.
एके डोगर ने कहा है कि मुंबई हमलों के संबंध में भारत के दावे तथ्यपूर्ण नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि हाफ़िज़ सईद को किसी भी अपराध के लिए पाकिस्तान की किसी अदालत ने दोषी नहीं माना है और किसी अदालत में उनके ख़िलाफ़ मज़बूत सबूत पेश नहीं किए गए हैं.
उन्होंने कहा, "ऐसे में ध्यान रखा जाना चाहिए कि हमारे मुवक्किल पर पाबंदिया लगाना बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन है."
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आतंकवाद-रोधी विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ 23 मामले दर्ज हैं जिनमें से ज़्यादातर प्रतिबंधित और ग़ैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए फंड जुटाने से जुड़े हैं. इसके साथ ही हाफ़िज़ के अन्य सहयोगियों के ख़िलाफ़ कुल 56 मामले दर्ज हैं और उनमें से कुछ के ख़िलाफ़ हाईकोर्ट में भी अपील की गई हैं.
इस साल सरकार ने फ़लाह-ए-इंसानियत को भी प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल कर लिया और सरकार ने इसके सभी कल्याणकारी कार्यक्रमों को अपने अधीन ले लिया.
हाफ़िज़ सईद को बीते महीने उस वक़्त गिरफ़्तार कर लिया गया था जब वह लाहौर से गुजरांवाला शहर जा रहे थे. वह इस वक़्त लाहौर की एक जेल में हैं.
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