ट्रेड वॉरः चीन पर नए अमरीकी आयात शुल्क का क्या होगा असर?

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने चीन से आयातित उत्पादों पर 300 अरब डॉलर का आयात शुल्क लगाने का एलान किया है.

यह आयात शुल्क सितंबर से लागू होगा. अमरीका ने चीन से आयातित उत्पादों पर पहले ही 250 अरब डॉलर की क़ीमत का आयात शुल्क लगा रखा है.

अमरीका-चीन के बीच चल रहे इस ट्रेड वॉर की वजह से चीन की विकास दर में गिरावट आ रही है. आयात शुल्क की दरें ज़्यादा होने से चीन के निर्यात में भी गिरावट आई है.

इस ट्रेड वॉर की वजह से दुनिया भर में मंदी का ख़तरा मंडराने लगा है. दोनों देशों के बीच चल रहे ट्रेड वॉर में ट्रंप की इस घोषणा के बाद और तल्ख़ी आने की संभावना है.

नए आयात शुल्क पहली सितंबर से प्रभावी होंगे. इसके बाद चीन से आयातित सभी सामानों पर टैक्स लगेगा. यानी स्मार्टफ़ोन से लेकर कपड़ों तक सभी सामान आयात शुल्क के दायरे में आ जाएंगे.

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चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमरीका के इस क़दम की आलोचना की है.

बैंकाक में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के मंत्रियों की बैठक के मौक़े पर वांग ने कहा, "आयात शुल्क लगाना निश्चित ही आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते में खटास को हल करने का सकारात्मक तरीक़ा नहीं है."

ट्रंप ने आयात शुल्क की घोषणा ट्विटर पर भी की है. इसमें उन्होंने चीन पर और अधिक अमरीकी कृषि उत्पादों को ख़रीदने के वादे का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाया.

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बाद में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रंप ने संवाददाताओं को कहा कि 10 फ़ीसदी आयात शुल्क एक अल्पकालीन उपाय है और आगे चलकर इसे बढ़ा कर धीरे-धीरे 25 फ़ीसदी तक किया जा सकता है.

उन्होंने कहा, "चीन के साथ यह बहुत पहले किया जाना चाहिए था."

वीडियो कैप्शन, क्या अमरीका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का आपकी जेब पर भी होगा असर.

अब तक क्या रही प्रतिक्रिया?

इस आयात शुल्क की घोषणा के बाद से ही आर्थिक बाज़ार में गिरावट देखने को मिली है.

वॉल स्ट्रीट के डाउ जोन्स शेयर इंडेक्स में 1.1 फ़ीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ तो एशियाई बाज़ारों में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखी गयी. तेल की कीमतें धराशायी हो गयीं.

30 लाख से अधिक कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली अमरीकी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ने कहा कि चीन पर इस नये आयात शुल्क से अमरीकी बिजनेस, किसानों, कर्मचारियों, ग्राहकों पर बुरा असर पड़ेगा और साथ ही इससे मजबूत अमरीकी अर्थव्यवस्था कमजोर होगी.

इसने दोनों देशों से सभी तरह के आयात शुल्क को हटाने की मांग की है.

गुरुवार को ट्रंप के पूर्व आर्थिक सलाहकार गैरी कोहन ने बीबीसी से एक इंटरव्यू में कहा कि आयात शुल्क लगाने की इस लड़ाई का अमरीकी मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) और कैपिटल इन्वेस्टमेंट (पूंजी निवेश) सेक्टर में ख़राब असर पड़ रहा है.

इस आयात शुल्क का असर अमरीकी केंद्रीय बैंक, द फ़ेडरल रिज़र्व, की ओर से दरों में की गई कटौती पर भी पड़ेगा. यह कटौती बीते एक दशक में पहली बार की गई है.

वीडियो कैप्शन, अमरीका के साथ ट्रेड वॉर कैसे चीन के लिए बना सरदर्द

फ़ेडरल रिज़र्व के अध्यक्ष जेरोमी पॉवेल ने कहा कि अमरीकी व्यापार नीतियों की आलोचना करने का काम केंद्रीय बैंक का नहीं है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि मई और जून के महीने में व्यापारिक चिंताएं बढ़ी हैं.

ट्रंप ने कहा कि उनकी व्यापार नीतियां काम कर रही हैं और बीजिंग पर इसका असर हो रहा है. लेकिन इससे केवल चीन पर ही असर नहीं पड़ रहा. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने चेतावनी दी है कि अमरीका-चीन ट्रेड वॉर विश्व की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट है.

इस बात के भी सबूत हैं कि ट्रेड वॉर अमरीकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है. बीते हफ़्ते जारी किए गये आंकड़ों के अनुसार बीते वर्ष की तुलना में अमरीकी अर्थव्यवस्था में कम वृद्धि हुई है.

आंकड़ों के मुताबिक इस ट्रेड वॉर की वजह से व्यापार और निवेश में गिरावट आई है.

अमरीकी कंपनियों ने विस्तार और निवेश पर रोक लगा रखी है, मतलब यह कि नई फैक्ट्रियां और नए रोज़गारों का सृजन नहीं हो रहा है.

इन सभी परिस्थितियों से निवेशक बहुत परेशान हैं और यह भी चिंता जताई जा रही है कि ट्रेड वॉर अब कई मोर्चों पर लड़ा जाएगा. जापान और दक्षिण कोरिया के बीच इसके आसार दिखने भी लगे हैं.

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कैसे शुरू हुआ ट्रेड वॉर का सिलसिला?

डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद ही चीन और अमरीकी के बीच व्यापारिक मतभेद शुरू हो गये थे.

2016 में अपने राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार के दौरान ट्रंप ने चीन पर बार-बार चीन के माल को अमरीकी बाज़ार में डंप करने और अमरीकी बौद्धिक संपदा की चोरी का आरोप लगाया.

ट्रंप चीन के साथ अमरीकी व्यापार घाटे को भी कम करना चाहते हैं, वो कहते हैं कि इससे अमरीकी विनिर्माण क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है.

बीते एक साल में, दोनों देशों ने एक-दूसरे के उत्पादों पर अरबों डॉलर का टैरिफ लगाया है.

कई दौर की बातचीत के बावजूद दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं ट्रेड वॉर को ख़त्म करने के समझौते पर पहुंचने में अब तक नाकाम रही हैं जो न केवल निवेशकों की चिंता का विषय है बल्कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

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