विश्व शरणार्थी दिवस: 2018 में किन देशों ने सबसे ज़्यादा लोगों को दी शरण

विश्व शरणार्थी दिवस

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लड़ाई, ज़ुल्म और भुखमरी की वजह से जब लोगों की ज़िंदगी ख़तरे में आ जाती है तो वो कहां जाते हैं?

उनमें से 80% लोग कभी अपना देश नहीं छोड़ते, और जो छोड़ते हैं, उनमें से करीब 80% किसी पड़ोसी देश में चले जाते हैं. उससे ज़्यादा आगे वो नहीं जाते.

विश्व शरणार्थी दिवस के मौके पर हम उन छह देशों के बारे में बात करेंगे, जिनमें 2018 में सबसे ज़्यादा लोग शरण लेने पहुंचे.

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तुर्की

किसी भी अन्य देश के मुकाबले सबसे ज़्यादा शरणार्थी तुर्की में रहते हैं. इसकी एक वजह उसके पड़ोसी देश सीरिया में 2011 से चल रहा गृह युद्ध है. वहां से विस्थापित लोग यहां आ जाते हैं.

इसके अलावा दूर-दराज़ के अफ़ग़ानिस्तान से भी कई लोग वहां पहुंचते हैं.

यूएनएचआरसी के आदेशपत्र के तहत जितने भी शरणार्थी आते हैं, उनमें पांच में से करीब एक तुर्की में शरण लेता है.

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पेरू

2018 में दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा शरणार्थी पेरू पहुंचे. इनमें से ज़्यादातर वेनेज़ुएला से आए थे. वेनेज़ुएला में जारी आर्थिक संकट के चलते वहां के नागरिक लगातार देश छोड़कर जा रहे हैं.

2015 से अब तक करीब चालीस लाख लोग वेनेज़ुएला छोड़कर भागे हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक वेनेज़ुएला से भागे ज़्यादातर लोग पड़ोसी देश चले गए.

प्रवासियों के इस प्रवाह को रोकने के लिए पेरू ने पिछले हफ्ते ही कड़े कानून बनाए हैं.

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सूडान

2018 के दौरान सूडान में जितने भी शरणार्थी आए, उनमें से ज़्यादातर पड़ोसी दक्षिण सूडान के गृह युद्ध से भागकर आए थे.

यहां कई शरणार्थी दूर के देशों से भी आए.

सूडान मध्य पूर्व के बाहर तीसरा देश है, जहां सीरिया के सबसे ज़्यादा शरणार्थी पहुंचे.

लेकिन खुद सूडान से कई लोग देश छोड़कर दूसरे देशों में शरण मांगने पहुंचे. 2018 के अंत तक सूडान के 724,800 नागरिकों ने देश छोड़ा.

युगांडा

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युगांडा

युगांडा में सबसे ज़्यादा शरणार्थी आंतरिक संघर्ष से जूझ रहे दो पड़ोसी देशों से आए. इनमें कांगो गणराज्य (करीब 120,000) और दक्षिण सूडान शामिल हैं.

इसके अलावा 2018 के दौरान युगांडा में सबसे ज़्यादा वो बच्चे आए, जिनके साथ कोई नहीं था या वो अपने मां-बाप से बिछड़ गए थे.

लेकिन 2018 के आखिर तक दक्षिण सूडान के 83,600 शरणार्थी युगांडा से अपने देश वापस लौट गए.

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अमरीका

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के पद संभालने के बाद से अमरीकी सरकार ने प्रवासियों के प्रवाह को कम करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं.

लेकिन फिर भी 2018 में दुनिया में सबसे ज़्यादा शरण मांगने वालों की आबादी अमरीका में ही रही, और इसी साल शरण मांगने वालों के सबसे ज़्यादा आवेदन भी अमरीका के लिए ही आए.

अमरीका में 166 देशों से शरणार्थी आए, इनमें आधे से ज़्यादा चार सेंट्रल अमरीकी देशों और मेक्सिको से आए थे.

हालांकि पिछले साल के मुकाबले शरण मांगने वालों की तादाद कम रही. पिछले साल अमरीका में 331,700 लोगों ने शरण के लिए आवेदन किया था.

जर्मनी

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जर्मनी

जर्मनी में दस लाख के ज़्यादा शरणार्थी रहते हैं - इनमें आधे से ज़्यादा सीरिया से आए हैं. 2018 के आखिर तक 532,000 शरणार्थी जर्मनी पहुंचे.

2018 में जर्मनी में सबसे ज़्यादा शरणार्थी युद्ध-ग्रस्त सीरिया से आए, लेकिन कई लोग इराक़ से भी जर्मनी पहुंचे.

जर्मनी उन देशों में तीसरे नंबर पर है, जहां नए शरणार्थी शरण के लिए आवेदन करते हैं. हालांकि 2016 के मुकाबले यहां शरण के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या नाटकीय रूप से कम हुई है. 2016 में 722,000 लोगों ने जर्मनी में शरण के लिए आवेदन किया था.

सिर्फ 2018 को ही देखें तो जर्मनी में शरण मांगने वालों की तादाद 14 फीसदी तक कम हुई है.

(इस लेख के लिए सभी आंकड़े यूएनएचआरसी की इस रिपोर्ट से लिए गए हैं.)

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