पाकिस्तान को तगड़ा झटका, करोड़ों डॉलर खर्च कर खोदा समंदर मिला कुछ नहीं

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पाकिस्तान ने जब कराची के पास तटीय इलाक़े में तेल और गैस की खोज शुरू की थी तब बड़ा भंडार मिलने की उम्मीद ज़ाहिर की गई थी.
लेकिन शनिवार को पाकिस्तान ने अधिकारिक रूप से इस क्षेत्र में तेल और गैस की खोज के प्रयास रोक दिए हैं. इससे अपनी ईंधन ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर रहने वाले पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है.
शनिवार को पाकिस्तान ने अधिकारिक तौर पर केकरा-1 सेक्टर में ऑफ़शोर ड्रिलिंग (तट से दूर खुदाई) बंद करने की घोषणा की.
समाचार एजेंसी एपीपी के मुताबिक़ तेल के कुएं की खोज कर रहा दल अगले कुछ दिनों में इस कुएं को बंद कर देगा.
इससे पहले पाकिस्तान इस क्षेत्र में तेल की खोज के 17 प्रयास कर चुका है लेकिन सभी नाकाम रहे हैं. केकरा-1 तेल कुआं कराची के तट से 280 किलोमीटर दूर दक्षिणपश्चिम में स्थित है. ये इंदस-जी ब्लॉक में आता है.
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के विशेष सहायक नदीम बाबर ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि केकरा-1 में तेल की खोज के परिणाम इच्छानुसार नहीं रहे हैं.

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इसी साल मार्च में कहा था कि पाकिस्तान को अरब सागर में तेल का बड़ा भंडार मिल सकता है.
उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान तेल और गैस की बड़ी खोज करने के क़रीब पहुंच गया है और अगर ऐसा हुआ तो देश की आर्थिक समस्याएं ख़त्म हो जाएंगी.
मार्च में इमरान ख़ान ने कहा था, "मैं दुआ करता हूं और हम सभी दुआ करें कि पाकिस्तान को ये प्राकृतिक संसाधन बड़ी मात्रा मे मिले. एक्सनमोबिल के नेतृत्व के कॉन्सॉर्टियम की समुद्र में तट से दूर की जा रही ड्रिलिंग से हमारी उम्मीदें सच साबित हों."
इमरान ख़ान ने कहा था, "इसकी प्रबल संभावना है कि हम अपने पानी में बहुत बड़ा भंडार खोज लेंगे. अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान फिर अलग ही लीग में आ जाएगा."
पाकिस्तान के इस जलक्षेत्र में अमरीकी तेल कंपनी एक्सनमोबिल और इटली की ईएनआई तेल की खोज में साझा खुदाई कर रही हैं. इन कंपनियों ने तेल की खोज में समुद्र तल में गहरा कुआं खोदा है.
पाकिस्तान के पेट्रोलियम रिज़र्व के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक़ 5500 मीटर तक खुदाई करने के बाद कोई तेल भंडार नहीं मिला है.
अब इन कंपनियों ने कुएं को बंद करने का फ़ैसला लिया है.

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पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्री सैयद अली हैदर ने गल्फ़ न्यूज़ से कहा, "हमने तेल की खोज में अभी सिर्फ़ 18 कुएं ही खोदे हैं. भारत को 43वां कुआं खोदने के बाद कामयाबी मिली थी. लीबिया को 58वें प्रयास में तेल मिला था. नॉर्वे ऐसा देश है जहां तेल मिलने की उम्मीद किसी को नहीं थी, पर उसने 1954 और 63 के बीच में 78 कुएं खोदे और बड़ी कामयाबी मिली."
इस खोज अभियान पर क़रीब दस करोड़ डॉलर ख़र्च किए जा चुके हैं. अख़बार डॉन के मुताबिक पेट्रोलियम डिवीज़न के अधिकारियों का कहना है कि खोज अभियान से इकट्ठा किए गए डेटा का इस्तेमाल भविष्य के खोज अभियानों में किया जा सकेगा.
अधिकारियों का कहना है कि इस खुदाई के दौरान भूकंप से जुड़े शोध भी किए गए हैं जो मददगार साबित होंगे.
समुद्र में तेल खोजना एक बेहद जटिल और मुश्किल भरा काम है. इस क्षेत्र में निवेश जोखिम भरा होता है. भारत को अपने चर्चित तेल कुएं बॉम्बे हाई से 40 से अधिक प्रयासों के बाद तेल मिला था.


पाकिस्तान के केकरा-1 क्षेत्र में इटली की कंपनी ईएनआई ने जनवरी में तेल की खोज में खुदाई शुरू की थी. इसके अलावा अमरीका का प्रमुख कंपनी एक्सनमोबिल, पाकिस्तान की गैस कंपनियां पाकिस्तान पेट्रोलियम लिमिटेड और ऑयल एंड गैस डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड (ओजीडीसीएल) इसमें साझेदार हैं.
अधिकारियों का कहना है कि पहले एकत्रित किए गए डेटा के आधार पर यहां तेल मिलने की उम्मीदें बहुत ज़्यादा थीं और खुदाई जब शुरू की गई थी तब कामयाबी की संभावना 13-15 फ़ीसद तक थी. किसी क्षेत्र में तेल या गैस मिलने की अधिकतम संभावना 20 फ़ीसदी ही होती है.
ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में तेल या गैस खोजने की कोशिशें हुई हैं. पाकिस्तान के जलक्षेत्र में सबसे पहला कुआं अमरीकी कंपनी ने साल 1963 में खोदा था. ये कुआं सूखा निकला था.
पाकिस्तान में आख़िरी बार जलक्षेत्र में तेल की खोज की कोशिश 2005 में की गई थी. नीदरलैंड्स की कंपनी शेल ने 2005 में कुआं खोदा था लेकिन इसमें भी कोई हाइड्रोकार्बन भंडार नहीं मिला था.

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अब एक बार फिर पाकिस्तान को तेल की खोज में नाकामी मिली है. इसे प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है. उन्हें इस कुएं से बहुत उम्मीदें थीं और वो पहले ही इसकी कामयाबी का जश्न तक मना चुके थे.
इमरान ख़ान ने कहा था, "अल्लाह ने चाहा तो ये भंडार इतना बड़ा होगा कि पाकिस्तान को तेल ख़रीदने की ज़रूरत नहीं पडे़गी."
इमरान ख़ान ने बीते साल अगस्त में सत्ता संभाली थी. सत्ता संभलने के बाद से ही उनके सामने बेहद मुश्किल आर्थिक हालात हैं.
बीते कुछ दिनों में पाकिस्तान के रुपए में भारी गिरावट हुई है और इसे एशिया की सबसे कमज़ोर मुद्रा तक कहा जाने लगा है.
शनिवार को पाकिस्तान का रुपया टूटकर 150 रुपए प्रति डॉलर तक पहुंच गया था.
पाकिस्तान की सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से छह अरब डॉलर का लोन लेने पर सहमति दी थी. इस फ़ैसले के बाद से ही रुपया लगातार टूट रहा है.

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विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के रुपए में ये टूट जारी रहेगी और सबसे ख़राब समय अभी आना बाकी है.
पाकिस्तान अपनी ईंधन ज़रूरतों के लिए भी तेल आयात पर ही निर्भर है. फ़िलहाल पाकिस्तान अपनी ज़रूरतों का 85 फ़ीसदी तेल बाहर से ख़रीदता है और स्वंय 15 फ़ीसदी कच्चा तेल ही पैदा करता है.
पाकिस्तान को अपने विदेशी मुद्रा भंडार का बड़ा हिस्सा तेल ख़रीदने पर ही ख़र्च करना पड़ता है.
पाकिस्तान के आर्थिक हालात कितने ख़राब है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस समय पाकिस्तान का चालू खाता घाटा 18 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
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