'पाकिस्तान ने क़ब्ज़े में ली थीं भारतीय मिग-21 की चारों मिसाइल': उर्दू प्रेस रिव्यू

एफ-16 विमान

इमेज स्रोत, AFP

    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पाकिस्तानी वायु सेना के विमान एफ़-16 को मार गिराने के भारतीय दावे पर आरोप-प्रत्यारोप, अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया और पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात भारत-पाकिस्तान की.

भारत ने फ़रवरी में पाकिस्तान के एक विमान एफ़-16 को मार गिराने का दावा किया था. पाकिस्तान ने भारत के इस दावे को ख़ारिज कर दिया था.

अब लगभग एक महीने बाद अमरीका की एक प्रतिष्ठित मैगज़ीन फ़ॉरेन पॉलिसी ने दावा किया है कि पाकिस्तान के सारे एफ़-16 विमान सही सलामत हैं इसलिए भारत के इस दावे को स्वीकार करना मुश्किल है.

फिर क्या था, इस लेख के छपने के बाद भारत और पाकिस्तान में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने कहा कि सच्चाई का हमेशा बोल बाला होता है. अब वक़्त आ गया है कि भारत अपने झूठे दावों से सच बोले.

मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने कहा कि गिराए गए भारतीय विमान मिग-21 के मलबे से चारों मिसाइल सही सलामत क़ब्ज़े में लिए गए थे. पाकिस्तान ने इस मामले में शोर न मचाकर अपनी विनम्रता का सुबूत दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास बताने के लिए अभी बहुत सारे सच मौजूद हैं.

इस मामले में इमरान ख़ान ने भी ट्वीट किया कि, "सच की हमेशा जीत होती है और यही श्रेष्ठ नीति है. युद्ध का उन्माद फैला कर चुनाव जीतने का बीजेपी का प्रयास और पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमान को मार गिराने का झूठा दांव उल्टा पड़ गया है. अमरीकी अधिकारियों ने भी पुष्टि कर दी है कि पाकिस्तानी बेड़े से कोई एफ-16 गायब नहीं है."

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर, पाकिस्तान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर

वहीं, अख़बार जंग ने सुर्ख़ी लगाई है कि एफ़-16 का झूठ बेनक़ाब होने के बाद भारत सरकार और सेना आलोचना की शिकार हो रही है.

अख़बार लिखता है कि एफ़-16 विमान गिराने का दावा मोदी मीडिया का था, लेकिन भारतीय वायु सेना अपनी हठधर्मी पर क़ायम. दरअसल, अमरीकी मैगज़ीन में इस ख़बर के छपने के बाद भारतीय वायुसेना ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत अपने रुख़ पर क़ायम है कि 27 फ़रवरी को हुई हवाई झड़प में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के एफ़-16 विमान को मार गिराया था.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ भारतीय दावों को बेनक़ाब करने के लिए 'एंड यूज़र' समझौते के तहत पाकिस्तान ने अमरीकी अधिकारियों को पाकिस्तान आकर सभी एफ़-16 विमानों की गिनती करने की दावत दी थी. इसके बाद दो अमरीकी अधिकारियों ने पाकिस्तान जाकर एफ़-16 विमानों की जांच करने के बाद कहा कि सभी विमान सुरक्षित हैं.

अख़बार के अनुसार अधिकारियों ने ये भी कहा कि भारत ने झूठ बोलकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को गुमराह किया है. अख़बार के अनुसार अधिकारियों ने ये भी कहा कि पाकिस्तान जैसे चाहे एफ़-16 विमानों का इस्तेमाल कर सकता है.

अधिकारियों का कहना था, "ये सोचना बिल्कुल ग़लत होगा कि हम पाकिस्तान को जंग का सामान बेचें और वो जंग में उनका इस्तेमाल न करे."

अख़बार दुनिया लिखता है कि इस बात के कोई सुबूत नहीं है कि विंग कमांडर अभिनंद ने अपने विमान मिग-21 के तबाह होने से पहले पाकिस्तान के विमान एफ़-16 को मार गिराया था.

अख़बार लिखता है कि मुमकिन है कि कमांडर अभिनंदन ने एफ़-16 विमान को निशाना बनाया हो और उसे विश्वास भी हो कि निशाना सही लगा है लेकिन पाकिस्तानी एफ़-16 विमानों की गिनती भारत के इस दावे पर शक पैदा करती है.

अख़बार कहता है कि इस बात के साफ़ संकेत मिलते हैं कि एफ़-16 विमानों ने भारत के साथ हुई हवाई झड़प में हिस्सा लिया था लेकिन इस बात का कोई प्रमाण नहीं कि उनमें से किसी का कोई नुक़सान हुआ था.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी
इमेज कैप्शन, पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

अफ़ग़ानिस्तान शांति प्रक्रिया

अफ़ग़ानिस्तान के लिए अमरीका के विशेष दूत ज़िलमें ख़लीलज़ाद ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से इस्लामाबाद में मुलाक़ात की. शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली पाकिस्तान समेत पूरे क्षेत्र के लिए फ़ायदे की बात है.

अख़बार आगे लिखता है कि शांति बहाली प्रक्रिया में अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और अमरीका के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. अशरफ़ ग़नी सरकार इस प्रक्रिया से ख़ुद को बाहर किए जाने से नाराज़ है और अमरीका भी तालिबान से सीधे बातचीत करना चाहता है. तालिबान ने भी अशरफ़ ग़नी सरकार को कठपुतली क़रार दिया है.

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान का कहना है कि इस मामले में तालिबान से सीधे बात करने के बजाए अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान सरकार पाकिस्तान पर दबाव डालने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन दबाव डालने की भी एक हद होती है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान

इमेज स्रोत, Getty Images

बात पाकिस्तान के सियासत की

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी एक बार फिर आमने-सामने हैं. पीपीपी ने धमकी दी है कि वो सरकार के ख़िलाफ़ राजधानी इस्लामाबाद में धरना देंगे और इमरान ख़ान की सरकार को गिरा देंगे. इस पर इमरान ख़ान ने भी उन्हें चुनौती दी है.

अख़बार एक्सप्रेस ने इमरान ख़ान के बयान के हवाले से सुर्ख़ी लगाई है, "लुटेरों का हिसाब होकर रहेगा, सरकार कहीं नहीं जा रही है लेकिन ज़रदारी जेल जा रहे हैं."

इमरान ख़ान ने बिलावल भुट्टो और आसिफ़ ज़रदारी को इस्लामाबाद आकर धरना देने की चुनौती देते हुए कहा कि धरना तब कामयाब होता है जब आप आम लोगों के लिए खड़े होते हैं.

इमरान ख़ान का कहना था, "मैं उन्हें चैलेंज देता हूं कि एक हफ़्ते भी धरना नहीं दे सकेंगे क्योंकि धरना वो कामयाब होता है जो आम जनता की समस्याओं को समाप्त करने की नीयत से दिया जाए. जो धरना अपनी चोरियों और डकैतियों पर पर्दा डालने के लिए दिया जाए जनता उसको ख़ारिज कर देती है."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)