मसूद अज़हर पर चीन के रुख़ से बना रहस्य गहराया

अमरीकी सरकार ने बीते मंगलवार को आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अज़हर के मुद्दे पर चीन से कहा है कि अगर सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अज़हर को आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो इसका असर क्षेत्रीय शांति पर पड़ सकता है.
अमरीका की ओर से ये प्रतिक्रिया तब आई है जब चीन ने बीते सोमवार को मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी क़रार देने से पहले गंभीर चर्चा किए जाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था.
भारत सरकार बीते कई सालों से मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करवाने के लिए अलग-अलग मोर्चों पर कूटनीति का प्रयोग करती रही है.
हालांकि काफ़ी प्रयास के बाद भी चीन अपने वीटो पावर के दम पर मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले वाले प्रस्ताव को ख़ारिज करवाता आया है.
आख़िर क्या है मामला?
भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में अर्धसैनिक बल सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर आत्मघाती हमले के बाद फ्रांस, अमरीका और ब्रिटेन ने एक बार फिर यूएन के सुरक्षा परिषद में मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है.
सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के पास इस प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज करने के लिए दस दिन का समय था जो कि आज पूरा हो रहा है.
चीन इससे पहले तीन मौक़ों पर प्रस्ताव पर अपनी आपत्ति दर्ज कराकर ख़ारिज करा चुका है.

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लेकिन पुलवामा हमले के बाद भारत के बदले रुख़ और भारत के साथ फ़्रांस, अमरीका और ब्रिटेन के खड़े होने की वजह से चीन इस मुद्दे पर काफ़ी सोच-समझ कर टिप्पणी कर रहा है.
चीन ने अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कोई ऐसी टिप्पणी नहीं की जिससे ऐसा संकेत मिलता हो कि उसका क्या रुख़ होगा.


क्या कह रहा है चीन?
चीन के विदेश मंत्री लू केंग ने कहा है, "चीन इस मसले को ठीक से सुलझाने के लिए ज़िम्मेदारी पूर्वक सभी ज़रूरी पक्षों के साथ बात करता रहेगा. इस मसले को सिर्फ़ गंभीर चर्चाओं के बाद ही कोई फ़ैसला लेकर सुलझाया जा सकता है."
लू केंग इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखते हुए कहते हैं, "हम चाहते हैं कि इस मुद्दे पर होने वाली सभी चर्चाओं में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए. इसके साथ ही ऐसा समाधान निकाला जाना चाहिए जो कि सभी पक्षों को स्वीकार हो."


अमरीका ने चीन को दी चेतावनी
ये पहला मौक़ा नहीं है जब सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी को घोषित करने की कार्यवाही की गई हो.
लेकिन चीन लगातार इस मुद्दे पर वीटो पावर का प्रयोग करता आया है. ऐसे में अमरीका की ओर से इस बार चीन को चेतावनी जारी की गई है.

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चीनी विदेश मंत्री का बयान आने के बाद अमरीका ने चीन को इस मामले में सकारात्मक रुख़ दिखाने को कहा है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के उप प्रवक्ता रॉबर्ट पालाडिनो ने कहा है, "इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने में अमरीका और चीन के साझे हित हैं और अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित नहीं किया जाता है तो ये इस क्षेत्र की शांति के ख़िलाफ़ होगा."


इससे मसूद अज़हर को क्या नुक़सान होगा
अगर चीन इस बार मसूद अज़हर के ख़िलाफ़ जारी प्रस्ताव को ख़ारिज करने के लिए वीटो पावर का प्रयोग नहीं करता है तो यूएनएससी मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कर देगा.
ऐसे में दुनिया का कोई ऐसा देश जो कि सयुंक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य हो तो वह ऐसे व्यक्ति को अपने देश में शरण नहीं दे सकता है.
इसके साथ ही ऐसे व्यक्ति के आर्थिक लेनदेनों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
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