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नरेंद्र मोदी से चीन को 'गुड न्यूज़' क्यों चाहिए
चीन के सरकारी अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि चीन रोज़गार बढ़ाने में भारत की मदद कर सकता है.
ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में चीन के निवेश को बढ़ावा देते हैं तो इससे अधिक से अधिक रोज़गार बढ़ेंगे और इससे मोदी को लोकसभा चुनाव 2019 में फ़ायदा मिलेगा.
लोकसभा चुनाव 2019 से पहले भारतीय मीडिया में कराए गए सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के ग्राफ़ में क़रीब 46 फ़ीसदी की गिरावट नज़र आई है.
नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ असंतोष बढ़ रहा है क्योंकि लोगों में उनके सुधार कार्यक्रम से रोज़गार बढ़ने को लेकर शंका है.
ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि यह चीन के लिए अच्छी ख़बर नहीं है.
हमें उम्मीद है कि मोदी अपनी सार्वजनिक छवि में सुधार कर सकते हैं और उन्हें आगे सफलता मिल सकती है.
भारत सरकार अपनी अर्थव्यवस्था में सुधार और रोज़गार को बढ़ाने के लिए विदेशी निवेश आकर्षित करना चाहती है. और चीनी निवेश को आकर्षित करने से उन्हें ये मदद मिल सकती है.
ग्लोबल टाइम्स साथ ही यह भी लिखता है कि 'चीनी कंपनियों को लेकर भारत के लोगों में उलझन की स्थिति है.'
मोदी अपनी छवि में सुधार कैसे कर सकते हैं?
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि एक साल पहले दोनों देशों के बीच डोकलाम में गतिरोध हुआ था. दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने थीं और आपसी रिश्तों में तल्ख़ी अपने चरम पर थी.
लेकिन एक बार फिर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में सुधार हो रहा है.
हमें उम्मीद है कि लोगों का मोदी के प्रति नज़रिया बदलेगा जिससे देश की आर्थिक स्थिति और भारत-चीन के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए उन्हें पर्याप्त समर्थन मिल सकेगा.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा, "भारत के अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने लिखा कि 'भारत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की लड़ाई चीन से हार रहा है.' उसमें लिखा गया है कि एक साल पहले गूगल प्लेस्टोर पर टॉप-100 ऐप्स में केवल 18 चीनी मोबाइल ऐप थे, लेकिन अब यह संख्या दोगुनी हो गई है."
अब अगर नई दिल्ली चीनी निवेश पर लगाम लगाता है तो इससे वहां रोज़गार में बड़ी कटौती होगी.
भारत में चीनी निवेश केवल श्रम प्रधान सेक्टर पर है, जैसे- स्मार्टफ़ोन संयंत्र का निर्माण. इससे दक्षिण एशियाई देश में रोज़गार का सृजन होगा.
...तो होगी मोदी की जीत
भारत ख़ुद को चीनी निवेश के लिए एक बढ़िया जगह बना सकता है. इससे वहां रोज़गार बढ़ने में मदद मिलेगी.
हालांकि अपनी नीतियों के मुताबिक़ एक देश की अलग-अलग प्राथमिकताएं होती हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इसी महीने की शुरुआत में भारत में 10 करोड़ लोग दो दिनों की हड़ताल पर चले गए थे. जिससे पूरे देश में गतिरोध पैदा हो गया.
आज भारत रोज़गार बढ़ाने और मज़दूरों की स्थिति में सुधार को लेकर मुश्किलों का सामना कर रहा है.
दूसरे शब्दों में कहें तो नीतिगत पहल रोज़गार बढ़ाने को लेकर होगी. आगामी चुनाव से पहले मोदी सरकार को जॉब बढ़ाने वाली 'गुड न्यूज़' की ज़रूरत है.
भारत के श्रम प्रधान सेक्टर में चीनी कंपनियों के निवेश को प्रोत्साहित करने से इस लक्ष्य को पाया जा सकता है.
ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि चीनी निवेश में तेज़ी लाने पर आम चुनावों से पहले मोदी को उनकी राजनीतिक स्थिति मज़बूत करने में मदद मिलेगी.
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