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'...मोदीजी, आपका विकास रोज़गार को छू भी नहीं रहा है'
- Author, जय मकवाना
- पदनाम, बीबीसी गुजराती संवाददाता
गुजरात विधानसभा चुनावों में इस बार बेरोज़गारी एक अहम मुद्दा है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ख़ासकर हर मोर्चे से इस मुद्दे को उछाल रही है.
एक न्यूज़ चैनल से बात करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने दावा किया था कि बीते साल भारत में पैदा हुए नए रोज़गारों में से 83 प्रतिशत अकेले गुजरात में हुए हैं.
रूपाणी ने यह भी कहा था कि उनकी सरकार ने बीते एक साल में 72 हज़ार लोगों को नौकरियां दी हैं.
लेकिन क्या गुजरात में रोज़गार की स्थिति बेहतर हुई है. यही समझने के लिए हमने ये देखा कि सोशल मीडिया पर लोग बेरोज़गारी को लेकर क्या बातें कर रहे हैं.
गुजरात में सोशल मीडिया पर बेरोज़गारी का बहुत ज़्यादा शोर नहीं है. लेकिन जो लोग इस बारे में लिख रहे हैं वो इसे जीएसटी और नोटबंदी से जोड़कर देख रहे हैं.
मिहिर राठवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए लिखा, "प्रिय सर, हमारी मुश्किल कम नहीं हो रही हैं. हम बेरोज़गारी से परेशान हैं और आपका विकास रोज़गार को छू भी नहीं रहा है."
दिलीप सेडानी ने ट्विटर पर लिखा कि बेरोज़गारी के मुद्दे की वजह से राहुल गांधी गुजरात में चर्चित हो रहे हैं.
हरेश बाविषी ने लिखा, "गुजरात का चुनाव इस बार जीएसटी, नोटबंदी और बेरोज़गारी के मुद्दे पर लड़ा जाएगा और ये तीनों भाजपा सरकार की नाकामी हैं."
वहीं राज गढ़वी ने लिखा, "साहेब बेरोज़गारी दूर करो तब विकास कहलाएगा. गुजरात में दिन प्रतिदिन बेरोज़गार युवाओं की संख्या बढ़ रही है. साहेब रोजगारी लाकर विकास बढ़ाइए."
भाजपा की गुजरात गौरव यात्रा पर टिप्पणी करते हुए जिगरभाई रावल ने लिखा, "डैमेज कंट्रोल यात्राएं निकलेंगी लेकिन लोग महंगाई, नोटबंदी, जीएसटी, बेरोज़गारी और न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल बीमा को नहीं भूलेंगे."
अमरीश मकवाना ने लिखा, "गुजरात के बेरोज़गार युवाओं के हाथ में नौकरी के बजाए त्रिशूल और तलवार थमाने वालों को इस बार गिरा दो."
कुमार ने नरेंद्र मोदी को जवाब देते हुए लिखा, "मैं सूरत से हूं, आगर देखिए, कपड़ा उद्योग बर्बाद हो गया है. व्यापार 60 प्रतिशत तक गिर गया है."
वहीं अहदाबाद से कल्पना जैन ने तर्क दिया, "बेरोज़गारी ज़्यादा है, अर्थव्यवस्था सब को रोज़गार नहीं दे सकती. 2019 के बाद से शायद परिवार में से एक व्यक्ति को ही नौकरी मिले."
वहीं कुछ लोगों का ये भी कहना है कि गुजरात में रोज़गार की स्थिति बहुत ज़्यादा ख़राब नहीं है.
दिव्येश राजा ने लिखा कि गुजरात में बहुत से बाहरी लोगों को भी रोज़गार मिलता है. उन्होंने लिखा, "यहां के उद्योगों में अधिकतर बाहरी लोगों को काम करते हुए देखा जा सकता है. यहां बेरोज़गारी उस स्तर पर नहीं है."
राहुल कांबले ने लिखा, "ये सच है कि वो हमारे धर्म और हमारे देश पर कब्ज़ा करने का सोच रहे हैं और हम बेरोज़गारी और तेल की क़ीमतों के मुद्दे में फंसे हैं."
वासावा कृपालसिंह ने लिखा, "बेरोज़गार युवाओं से फार्म भरवाकर कह रहे हैं कि बेरोज़गारी भत्ता देंगे. इन्हें साठ सालों में बेरोज़गार याद क्यों नहीं आए."
वहीं कुछ लोग बेरोज़गारी के मुद्दे में हास्य भी तलाश रहे हैं.
इंजीनियर विकास पांडे ने लिखा- इंजीनियरिंग करके निकल रहे सभी छात्र मुझसे पूछते हैं आगे क्या करें. मैं कहता हूं आराम करो, अच्छे दिन आ रहे हैं.
रुचि शुक्ला ने तंज़ कसते हुए कहा, "जब से कांग्रेस के नेता बेरोज़गार हुए हैं तब से वो प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपनी बेरोज़गारी का मुद्दा उठा रहे हैं. लेकिन उन्हें मोदी ने नहीं देश के लोगों ने बेरोज़गार किया है."
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