फ्रीडम ट्रैशकैन: गुड़िया

हाल ही में पश्चिमी समाज में इस तरह के अभियान चलाए गए जिसमें खिलौने बनाने वाली कंपनियों पर यह दबाव बनाया गया कि वे एक ही जेंडर को ध्यान में रखकर खिलौने ना बनाए.
आलोचकों ने यह भी कहा कि लड़कियों के लिए हर समय जबरन गुलाबी रंग का इस्तेमाल ना किया जाए. बाज़ार में आमतौर पर गुड़िया को लड़िकयों को ध्यान में रखकर ही डिज़ाइन किया जाता है.
अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं ने कहा कि बचपन में जिस तरह के खिलौनों से बच्चे खेलते हैं बड़े होने पर उनके मस्तिष्क में इनकी छाप बनी रहती है और अपने साथी को उन खिलौनों की तरह होने की उम्मीद करते हैं.
आलोचकों ने तर्क दिए कि अगर बचपन में लड़कियों को सिर्फ़ घरेलू काम करने वाले खिलौने या फ़ैशन आदि से जुड़े खेल ही खिलवाए जाएंगे तो वह बड़ी होने तक भी खुद को किसी वैज्ञानिक, बिजनेसवुमेन या किसी नेता के रोल में सोच ही नहीं पाएगी.
कुछ कंपनियों ने इस ओर ध्यान देना शुरू किया है और अब वे अलग-अलग तरह के खिलौने बनाने लगे हैं. जैसे, ट्रांसजेंडर गुड़िया या फिर कोई शारीरिक अक्षमता वाली गुड़िया या अलग-अलग बॉडीशेप वाली गुड़िया.











