उर्दू प्रेस: पाकिस्तान में आसिया बीबी पर सस्पेंस बरकरार

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- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते आसिया बीबी की रिहाई, इमरान ख़ान का चीन दौरा और रूस में अफ़ग़ानिस्तान मामले पर हुई बैठक सबसे ज़्यादा सुर्ख़ियों में रही.
सबसे पहले बात आसिया बीबी की.
आसिया बीबी एक ईसाई महिला हैं जिन्हें पाकिस्तान की निचली अदालत ने अहानत-ए-रसूल यानी ईशनिंदा का दोषी पाते हुए मौत की सज़ा सुनाई थी.
लेकिन कुछ दिनों पहले पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें रिहा कर दिया.

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उनकी रिहाई के बाद से पाकिस्तान के कई शहरों में धरने प्रदर्शन हुए, यहां तक कि आसिया की रिहाई का फ़ैसला सुनाने वाले जजों को भी धमकियां मिल रही हैं.
इन सबकी अगुवाई पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन 'तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह' के प्रमुख ख़ादिम हुसैन रिज़वी कर रहे थे.
ख़ादिम हुसैन और उनके समर्थकों के ख़िलाफ़ पुलिस ने मुक़दमा दर्ज कर लिया. बाद में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच समझौता हो गया और धरना ख़त्म कर दिया गया.
लेकिन अख़बार जंग के अनुसार सरकारी संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने के आरोप में अब तक 1800 लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.

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अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि धरना ख़त्म करने का समझौता केवल वक़्ती हल है और चरमपंथ एवं हिंसक विरोध प्रदर्शन का कोई स्थाई हल ढूंढना होगा.
समझौते के तहत तहरीक़-ए-लब्बैक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन डालेगी और केंद्र सरकार उसका विरोध नहीं करेगी.
आसिया पर सस्पेंस
दूसरी शर्त ये थी कि आसिया बीबी को पाकिस्तान से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा. हालांकि इस मामले में सस्पेंस बना हुआ है कि आसिया बीबी इस समय कहां हैं.
पाकिस्तान की कुछ मीडिया का कहना है कि आसिया बीबी पाकिस्तान छोड़ कर चली गई हैं जबकि सरकार का कहना है कि आसिया बीबी पाकिस्तान में ही हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के कारण इस बात को गुप्त रखा गया है कि वो कहां रह रही हैं.
इस बीच, इमरान ख़ान ने इस बात को फिर दोहराया है कि उनकी सरकार सुप्रीम कोर्ट के साथ खड़ी है. शनिवार को लाहौर में शेल्टरहोम योजना की बुनियाद रखते हुए इमरान ख़ान ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि क़ानून का राज तभी चलेगा जब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों को तुरंत अमल में लाया जाए.
आसिया बीबी के अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की चीन यात्रा भी काफ़ी सुर्ख़ियों में रही.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार इमरान के चीन दौरे पर चीन और पाकिस्तान के बीच कुल 15 समझौते हुए. अख़बार नवा-ए-वक़्त लिखता है कि चीन ने आर्थिक संकट से गुज़र रहे पाकिस्तान की मदद करने का वादा किया है.

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इमरान ख़ान के चीन दौरा के अलावा रूस में अफ़ग़ानिस्तान के बारे में होने वाले सम्मेलन की चर्चा भी अख़बारों में ख़ूब रही.
तालिबान के साथ वार्ता
अफ़ग़ानिस्तान में स्थायी शांति बहाल करने की नियत से रूस में एक सम्मेलन हुई जिसमें 12 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है. अफ़ग़ान तालिबान के प्रतिनिधियों ने भी सम्मेलन में भाग लेने के लिए पहली बार रूस का दौरा किया और इसे तालिबान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है.
भारत और अमरीका ने इस सम्मेलन में आधिकारिक तौर पर तो हिस्सा नहीं लिया लेकिन दोनों देशों के अधिकारी सम्मेलन में शामिल हुए.
भारत ने अपने दो अधिकारी सम्मेलन में भेजे, जिस पर विपक्षी दलों ने सरकार की जमकर आलोचना की है. भारत की मोदी सरकार का अब तक का ये स्पष्ट संदेश रहा है कि वो तालिबान से किसी भी हालत में बातचीत नहीं करेगी. अब विपक्षी दल मोदी सरकार से पूछ रहे हैं कि भारत ने उस सम्मेलन में अपने अधिकारी क्यों भेजे जिसमें तालिबान को आधिकारिक तौर पर बुलाया गया.
अफ़ग़ानिस्तान की तरफ़ से हबीबा सराबी ने प्रतिनिधि मंडल का नेतृत्व किया. सम्मेलन में भाग लेने वाली वो इकलौती महिला थीं.
अख़बार जंग के अनुसार हबीबा सराबी का कहना था, ''रूस को जंग का अनुभव हासिल है, अगर उसे शांति का तजुर्बा भी हासिल हो जाता है तो हम इसका स्वागत करेंगे.''
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए रूस के विदेश मंत्री सरगेई लैवरोव ने कहा कि ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन के विदेशी समर्थक अफ़ग़ानिस्तान को दहशतगर्दों का गढ़ बनाना चाहते हैं.
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