पाकिस्तान ईशनिंदा मामला: आसिया बीबी के पति ने मांगी अमरीका-ब्रिटेन से मदद

आसिया बीबी

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पाकिस्तान में ईशनिंदा मामले में सुप्रीम कोर्ट से दोषमुक्त होकर रिहा हुईं ईसाई महिला आसिया बीबी के पति आशिक़ मसीह ने दोनों की जान को गंभीर ख़तरा होने की बात कही है और ब्रिटेन, अमरीका या कनाडा में पनाह मांगी है.

आशिक़ मसीह ने एक वी़डियो संदेश में कहा है, ''मैं ब्रिटेन की प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाता हूं कि वो हमारी मदद करें.''

मसीह ने इसी तरह की मदद कनाडा और अमरीका के नेताओं से भी मांगी है.

इससे पहले जर्मन प्रसारक डॉयचे वेले को दिए एक साक्षात्कार में मसीह ने कहा था कि वो और उनका परिवार बेहद डरा हुआ है.

आसिया बीबी के ख़िलाफ़ बीते आठ वर्ष से ईशनिंदा का मामला चल रहा था. वो पाकिस्तान की पहली ईसाई महिला हैं जिन्हें कथित रूप से पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान करने के मामले में मौत की सज़ा सुनाई गई. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत के इस फ़ैसले की समीक्षा करते हुए आसिया बीबी को निर्दोष पाया था.

लेकिन इस फ़ैसले के विरोध में पाकिस्तान के तमाम शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनों को रोकने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने कट्टरवादी इस्लामिक पार्टी के साथ एक समझौता किया है जिसके मुताबिक आसिया बीबी को देश छोड़कर जाने की अनुमति नहीं होगी.

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इस समझौते का ज़िक्र करते हुए मसीह ने डॉयचे वेले को दिए साक्षात्कार में कहा था, ''इस तरह का समझौता ग़लत है. इससे न्यायपालिका पर दबाव डालने की ग़लत परिपाटी बन जाएगी.''

उनका कहना है, ''मौजूदा हाल हमारे लिए बेहद ख़तरनाक है, हमें कोई सुरक्षा नहीं मिली है और हम यहां-वहां छिपते फिर रहे हैं. मेरी पत्नी आसिया बीबी पहले ही दस साल जेल में काट चुकी है, मेरी बच्चियां उसे देखने के लिए मरी जा रही हैं.''

हिफ़ाज़त का दावा

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इस बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी ने बीबीसी से कहा है कि आसिया बीबी को बचाने के लिए सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

उन्होंने कहा, ''वो पाकिस्तान में हैं और क़ानूनी एजेंसियां उनका ख़्याल रख रही हैं. उनकी जान को ऐसा कोई ख़तरा नहीं है क्योंकि उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि उनकी सुरक्षा को लेकर कोई ख़तरा नहीं है.''

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से समझौते का भी बचाव किया और कहा कि इससे हिंसा के बगैर हालात से निपटने में मदद मिली.

उन्होंने कहा, ''हालात ऐसे ही बन गए थे और हम हिंसा के बिना हालात बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे थे. सरकार में आए हमें 70 दिन ही हुए हैं. ये दुर्भाग्य की बात है कि पहले की सरकार ने इस मुद्दे के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाए. ख़तरा तो था, लेकिन उससे निपटा नहीं गया. हमने जो किया, वही विकल्प हमारे पास था. लेकिन अब हम आगे बढ़ेंगे.''

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आसिया बीबी के ख़िलाफ़ क्या था मामला?

आसिया बीबी के ऊपर एक मुस्लिम महिला के साथ बातचीत के दौरान पैग़ंबर मोहम्मद के बारे आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप था.

हालांकि पैग़ंबर मोहम्मद के अपमान के आरोप का आसिया बीबी पुरजोर खंडन करती रही हैं.

पाकिस्तान में ईशनिंदा एक बहुत संवेदनशील विषय रहा है. आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून का ग़लत इस्तेमाल कर अक्सर अल्पसंख्यकों को फंसाया जाता है.

पाकिस्तान में इस्लाम को राष्ट्रीय धर्म का दर्जा मिला हुआ है जो वहां की कानूनी प्रक्रिया में समाहित है.

पाकिस्तान में ईसाई समुदाय

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ईशनिंदा क़ानून से अल्पसंख्यकों को निशाना?

ईशनिंदा क़ानून को आम समाज का भी पुरज़ोर समर्थन मिला हुआ है.

कट्टरपंथी राजनेताओं ने भी अक्सर अपने लिए समर्थन जुटाने की ख़ातिर ईशनिंदा करने वालों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिए जाने का समर्थन किया है.

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस क़ानून का इस्तेमाल अक्सर निजी बदलों को लेने में किया जाता है जिनमें काफ़ी कमजोर सबूतों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहरा दिया जाता है.

इस कानून के तहत दोषी ठहराए जाने वाले लोगों में मुस्लिम समाज़ और अहमदी समुदाय के सदस्य शामिल हैं.

लेकिन 1991 के बाद से ईसाई समुदाय के कई लोग इस कानून के तहत दोषी ठहराए गए हैं. जबकि पाकिस्तान की जनसंख्या में ईसाई समुदाय सिर्फ़ 1.6 फीसदी है.

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