इमरान ने शरीफ़ की भैंसों से कमाए करीब 14 लाख रुपये

नवाज़ शरीफ़, इमरान ख़ान, पाकिस्तान, भैंसे नीलाम

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इमेज कैप्शन, यह नीलामी 27 सितंबर को वर्तमान प्रधानमंत्री निवास के प्रांगण में आयोजित हुआ जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री के कई समर्थक शामिल हुए
    • Author, आबिद हुसैन
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद से

पाकिस्तान सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पाली हुई आठ भैंसों की नीलामी कर अपने ख़ज़ाने में कुछ और रूपये जमा कर लिए हैं. कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री निवास की कारें नीलाम कर भी कुछ रक़म जमा की गई थी.

ये भैंसे प्रधानमंत्री निवास में रखी हुई थीं जहां नवाज़ शरीफ़ और उनका परिवार रहता था.

लेकिन पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने ख़र्चों में कटौती के अपने फ़ैसले के बाद इन्हें नीलाम करने का फ़ैसला किया था.

इमरान ख़ान की चुनावी जीत में उनके भ्रष्टाचार मिटाने के वादों का अहम रोल रहा है.

पद पर बैठने के बाद उन्होंने खर्चों में कटौती करने वाले कई क़दम उठाए हैं लेकिन आलोचकों का कहना है कि ये क़दम सिर्फ़ दिखावा हैं.

पिछले महीने ये पता चला कि इमरान ख़ान घर से 15 किलोमीटर दूर स्थित अपने दफ़्तर जाने के लिए हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल करते हैं. इसके बाद उनका ख़ूब मखौल उड़ाया गया.

नवाज़ शरीफ़, इमरान ख़ान, पाकिस्तान, भैंसे नीलाम

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इमेज कैप्शन, इमरान सरकार ने नवाज़ शरीफ़ की भैंसों की नीलामी से कमाए करीब 14 लाख रुपये

देसी घी

भैसों की नीलामी से कोई 13 लाख 78 हज़ार के क़रीब रक़म जमा की गई है. इससे पहले बुलेटप्रूफ़ कारों की नीलामी में 4 करोड़ 35 लाख की कमाई हुई थी.

नवाज़ शरीफ़ के समर्थकों में इन भैंसों के प्रति ख़ासा प्यार है.

हसन लतिफ़ नाम के ख़रीदार के पास पहले से ही एक पूरा डेरी फ़ार्म है लेकिन वो इन भैंसों को ख़रीदने का मौक़ा नहीं खोना चाहते थे.

उन्होंने बीबीसी उर्दू को बताया, "मेरे पास सौ से ज़्यादा भैंसें हैं. लेकिन मैं अपने नेता की एक भैंस ख़रीदना चाहता था. ये मेरे इज़्ज़त की बात है. और अगर मौका मिला तो मैं इसे दोबारा शरीफ़ साहब को लौटा दूंगा."

प्रधानमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी ने बीबीसी उर्दू को बताया, "नीलामी में हमारी उम्मीद से ज़्यादा कमाई हुई. हम इसकी क़ामयाबी से ख़ुश हैं."

लेकिन सभी इस नीलामी से ख़ुश नज़र नहीं आए.

रावलपिंडी से आए एक ग्राहक ने कहा, "ऐसी भैंसे बाज़ार में इससे आधी क़ीमत पर मिल रही हैं. इनकी क़ीमत बहुत ज़्यादा है. मुझे तो कुछ ग्राहक भी असली नहीं लग रहे हैं."

लेकिन ऊंची क़ीमत सरकार के लिए अच्छी ख़बर है क्योंकि वो गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है. हालांकि ये नीलामी उस समस्या से लड़ने के लिए ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है.

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