सीरिया में हमले की तैयारी, अमरीका और संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी

सीरिया

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संयुक्त राष्ट्र ने रूस और तुर्की से सीरिया में विद्रोहियों के क़ब्ज़े वाले इदलिब प्रांत में होने वाली तबाही को रोकने के लिए फ़ौरन कार्रवाई करने को कहा है.

संयुक्त राष्ट्र की ये चेतावनी ऐसी आशंकाओं और ख़बरों के बीच आई है कि सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना रूस के समर्थन से घनी आबादी वाले इदलिब में आक्रामक सैन्य कार्रवाई की योजना बना रही है.

इससे पहले मिली जानकारी के मुताबिक़, रूसी विमानों ने इदलिब के मुहमबल और जदराया में हमले किए जिनमें बच्चों समेत नौ लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

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यहां रहने वाले अबू मोहम्मद ने बताया, "सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक गांवों में हवाई हमले होते रहे.''

स्थानीय निवासी अहमद के ने कहा, "हम घर पर ही थे जब एयरोप्लेन हमारे घर के पास आ पहुंचे. हम घबरा गए और घर छोड़कर भाग गए. मैंने बाकी लोगों को भी घर खाली करने को कहा. मुझे पता था कि रूसी फिर हमला करेंगे. यही हुआ. उन्होंने प्लेन से घर पर पूरा दम लगाकर हमला किया और तीसरे बार में पूरा घर गिया."

इस बीच संयुक्त राष्ट्र के शांति दूत स्टाफ़न डा मिस्टूरा ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को इस बारे में बात करनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में विशेष सलाहकार और सीरिया में विशेष दूत यान एगलैंड ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "इदलिब में सचमुच अब एक मानवतावादी और राजनीतिक रणनीति की ज़रूरत है और अगर ये सफल होती है तो लाखों लोगों की जानें बच जाएंगी. अगर ये नाक़ामयाब होती है तो अगले कुछ दिनों और कुछ घंटों में हम ऐसा युद्ध देखेंगे जो पिछले किसी भी युद्ध से कहीं ज़्यादा क्रूर होगा, हमारी पीढ़ी का क्रूरतम युद्ध होगा.''

उन्होंने कहा, "इसलिए हम आख़िर में आप सब से समझदारी की अपील करते हैं. इस समझदारी का मतलब ये होगा कि हम वो सब नहीं दोहराएंगे जो पूर्वी अल्लेपो, पूर्वी गूटा और रक्क़ा में हुआ. किसी शहर को बचाने का मतलब ये नहीं कि शहर में रहने वाले लोगों को ही कुचल दिया जाए."

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एगलैंड ने कहा, "इदलिब में जो डर फैल रहा है उस पर यक़ीन करना मुश्किल है. पूरा इलाका चारों तरफ़ से सेना से घिरा हुआ है और बीच में लोग हैं. उन्हें डर है कि वो गोलीबारी का शिकार हो जाएंगे. यहां करीब 30 लाख लोग हैं, 10 लाख बच्चे हैं. इसलिए हमें चाहे जैसे भी इदलिब में होने वाले युद्ध को रोकना है. यहां पहले ही लाखों लोग अपने घर छोड़कर रहने को मजबूर हैं. इदलिब में युद्ध छेड़ना किसी शरणार्थी शिविर में युद्ध छेड़ने जैसा होगा."

संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की दूत निकी हेली ने कहा कि इदलिब में हालात गंभीर हैं और वहां से चीखें सुनाई दे रही हैं.

उन्होंने कहा, "रूस सारे आरोप वाइट हेलमेट्स के मत्थे डाल रहा है और असद भी यही कर रहे हैं. ऐसा हमेशा होता है, जब असद अपने ही लोगों पर रासायनिक हमला करने जा रहे होते हैं. आपने ईरान, रूस और असद के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की चेतावनी सुनी है. हम ये स्वीकार नहीं करेंगे. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इदलिब के लोगों पर रासायनिक हमले की मंजूरी नहीं देगा. सीरिया के लोग पहले ही बहुत कुछ झेल चुके हैं. ये त्रासदी वाले हालात हैं.''

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अमरीका पहले ही कह चुका है असद की सेना में लोगों पर रासायनिक हथियारों से हमला किया तो वो इसके ख़िलाफ़ 'उचित और त्वरित' जवाबी कार्रवाई करेगा.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी एक दिन पहले सीरियाई सरकार समेत ईरान और रूस को चेतावनी दी थी कि अगर वो विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इदलिब पर हमला करते हैं तो ये मानवता के प्रति एक गंभीर अपराध होगा. ट्रंप ने ट्वीट करके कहा कि अगर इदलिब पर हमला हुआ तो हज़ारों लोग मारे जा सकते हैं.

ट्रंप ने बुधवार को ट्वीट करके कहा कि असद को इदलिब में बिना सोचे-समझे हमला नहीं करना चाहिए.

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वहीं, दूसरी तरफ़, सीरिया के सरकारी टेलीविज़न चैनलों का कहना है कि इसराइल के युद्धक विमानों ने देश के उत्तर-पश्चिमी इलाके में स्थित सेना के ठिकनों को निशाना बनाया है.

टीवी चैनलों ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि एक युद्धक विमान को हमा और टार्टूस प्रांतों में काफ़ी कम ऊंचाई पर उड़ते देखा गया. अधिकारी के मुताबिक़, कुछ इसराइली मिसाइलों को गिरा दिया गया और कुछ को वहां से हटने के लिए मजबूर कर दिया गया.

इसराइल ने इस रिपोर्ट पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है कि इसराइल के सीरिया पर हमला करने की ख़बर है. इससे पहले भी इसराइल ने सीरिया में कई बार हवाई हमले किए हैं. इन हमलों में उसने अक्सर ईरानी सेना की गतिविधियों को निशाना बनाया है.

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