आख़िर 1982 में सीरिया में हुआ क्या था?

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- Author, ग्विलर्मो डी अल्मो
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
सीरियाई शहर हामा में साल 1982 में जो कुछ हुआ उसके बारे में स्पेन के एलिकान्ते विश्वविद्यालय में अरब और इस्लामिक स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर इग्नाशियो अल्वारेज़-ओसोरियो कहते हैं, "वो बेहद भयावह और निर्मम हत्याएं थीं."
हामा में उस वक्त सीरियाई सरकारी सेना और हथियारबंद विद्रोही गुटों के बीच लड़ाई चल रही थी.
जैसा कि आज भी दुनिया के कई हिस्सों में लड़ाई में हो रही है, यहां भी सरकारी सेना और विद्रोहियों के बीच होने वाली लड़ाई का बड़ा खामियाज़ा नागरिकों को भुगतना पड़ा था.
आज के सीरिया की बात करें तो अल-असद परिवार के एक ख़ास सदस्य हाफ़िज़ अल-असद का इस इलाके से गहरा नाता है. हाफ़िज़ के बेटे बशर अल-असद सीरिया के मौजूदा राष्ट्रपति हैं. साल 2000 में हाफ़िज़ की मौत के बाद उन्होंने गद्दी संभाली थी.

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लेकिन 1982 में हामा में क्या हुआ था ये जानने में दुनिया को लंबा वक्त लग गया. 1982 की हत्याओं को दो दशक से अधिक वक्त हो गया है लेकिन अब भी इस पर चर्चा होती है कि उस दौरान कुल कितने लोगों की मौत हुई थी. हालांकि इस बात पर सहमति ज़रूर बनती है कि हज़ारों लोगों की मौत हुई थी.
अल्वारेज़-ओसोरियो कहते हैं, "एक अनुमान के अनुसार दस हज़ार से तीस हज़ार के बीच लोग उस दौरान मारे गए होंगे. लेकिन सही संख्या के बारे में आज भी स्पष्ट तौर पर कुछ कहा नहीं जा सकता."
1982 में आख़िर क्या हुआ था?
1979 में इस्लामी गुट मुस्लिम ब्रदरहुड ने सीरिया के कई इलाकों में सरकार की बाथ पार्टी के ख़िलाफ़ विद्रोह का समर्थन किया. ऐसा करने के पीछे राजनीतिक और धार्मिक कारण थे.
इस्लामी गुटों का मानना था कि राजनीति में धर्म को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए. 1970 के दशक में मध्य पूर्व के कई इलाकों में उनका प्रभुत्व काफी बढ़ गया था.

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अल्वारेज़-ओसोरियो कहते हैं, "वो लोग बाथ पार्टी के ख़िलाफ़ थे जो सेकुलर थी और जिसका समाजवादी झुकाव था और इस कारण से इस तरह की पार्टी में धर्म के लिए कोई जगह नहीं थी."
वो कहते हैं, "ब्रदरहुड में अधिकांश सुन्नी थे जबकि अल-असद अलावी थे. सुन्नी उन्हें सच्चा मुसलमान नहीं मानते."
अलावी शिया इस्लाम से नाता रखने वाली ट्वेल्वर शाखा (शिया इस्लाम की सबसे बड़ी शाखा) से जुड़े होते हैं जिनमें दो या अधिक धार्मिक मान्यताओं को एक साथ रख कर एक नई मान्यता को माना जाता है. अलावी कई भगवानों की पूजा करते हैं. ट्वेल्वर शब्द का अर्थ बारह यानी ट्वेल्व इमामों की बातें मानने से जुड़ा है. ये बारह इमाम वो नेता या अनुयायी हैं, जो पैगंबर मोहम्मद के राजनीतिक और धार्मिक उत्तराधिकारी बने थे.
इस्लामी विद्रोहियों ने हामा में सुरक्षा एजेंटों के ख़िलाफ़ हमले शुरू कर दिए. जून 1980 में उन्होंने राष्ट्रपति के ख़िलाफ़ तख़्तापलट करने की नाकाम कोशिश की.

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टेक्सस में मौजूद स्ट्रैटफोर अनालिसिस सेंटर में मध्यपूर्व मामलों की विशेषज्ञ एमिली हॉथ्रोन कहती हैं इस हमले के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड और हाफ़िज़ अल-असद के बीच "गहरी दुश्मनी" हो गई.
हाफ़िज़ के भाई रिफत अल-असद के भेजे सुरक्षा एजेंटों और उनके चाचा ने हज़ारों इस्लामी कैदियों को पल्मायरा के तादमुर जेल में मार दिया. उन्होंने तख़्तापलट की कोशिशों का बदला लेने के लिए ऐसा किया.
रिफ़त अल-असद उस दौर में उप राष्ट्रपति थे. कई सालों तक माना जाता रहा कि हामा में जो हत्याएं हुई उसके लिए रिफ़त अल-असद ही ज़िम्मेदार थे. हालांकि उन्होंने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है.

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हामा में क्या हुआ था?
बाथ पार्टी के ख़िलाफ़ मुस्लिम ब्रदरहुड का जो विद्रोह हुआ उसमें ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरों में उनके अधिक समर्थक थे. होम्स और हामा में भी ये विद्रोह आग की तरह फैल गई थी.
एमिली हॉथ्रोन बताती हैं, "जैसा आज के वक्त में है सीरिया के बड़े इलाकों में सुन्नी इस्लामी गुटों का प्रभुत्व था. उस वक्त हामा मुस्लिम ब्रदरहुड का मुख्यालय हुआ करता था."
लेकिन वेंगार्डिया कॉम्बेटिएंट नाम का मुस्लिम ब्रदरहुड का एक गुट जो उससे अलग हो गया था काफी ताक़तवर बन गया. सरकारी सेना के लिए भी ये सिरदर्द बन गया.
2 फरवरी 1982 को सरकार के भेजे 6,000 से 12,000 सैनिकों ने शहर को चारों ओर से घेर लिया. अलग अलग स्रोतों के आधार पर सैनिकों की संख्या अलग अलग बताई जाती है.

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अल्वारेज़-ओसोरियो बताते हैं, "अचानक हुई इस घेराबंदी की किसी को उम्मीद नहीं थी. कई इलाकों को जला कर तबाह कर दिया गया."
वो कहते हैं "लगा कि स्थिति काबू में है लेकिन यहां भारी गोलाबारूद का इस्तेमाल किया गया और हवाई हमले किए गए और विद्रोहियों के आख़िरी ठिकाने को निशाना बना कर करीब-करीब पूरे शहर को ही नष्ट कर दिया गया."
"यहां बहुत से लोग मारे गए जिनमें लड़ाके बहुत कम थे, नागरिक अधिक थे."
वेंगार्डिया कॉम्बेटिएंट के आख़िरी ठिकाने को ख़त्म करने का मतलब था कि राष्ट्रपति हाफ़िज़ अल-असद के ख़िलाफ़ इस्लामी विद्रोह का खात्मा होना.

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क्यों हामा हत्याओं के बारे में पता नहीं चला?
लेकिन दुनिया को हामा में हुए इस नरसंहार के बारे में अधिक पता नहीं चला.
एमिली हॉथ्रोन कहती हैं, "उस दौर में सीरिया एक छोटा देश था और अंतरराष्ट्रीय मीडिया इसे अधिक तवज्जो नहीं देती थी और जब तक यहां बमबारी ख़त्म हुई ये एक सैन्य क्षेत्र बन गया था जो पूरी तरह से बाहरी दुनिया से अलग-थलग था."
हॉथ्रोन कहती हैं, "हालांकि इधर से जानकारी बाहर नहीं जा सकी लेकिन इसके बावजूद दमिश्क में राजनयिकों और पश्चिमी संवाददाताओं को पता था कि हामा में कुछ भयानक हुआ था."
"लेकिन उन्हें ये नहीं पता था कि क्या हुआ है."
मुस्लिम ब्रदरहुड और सीरिया छोड़ने वाले शहर के कई नागरिकों ने रिफ़त अल-सद के सैनिकों द्वारा दी गई सज़ा के बारे में दुनिया को बताया. लेकिन उनकी बातों को अधिक महत्व नहीं दिया गया.

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घटना के कुछ महीनों बाद ब्रितानी पत्रकार रॉबर्ट फिस्क और अमरीकी पत्रकार थॉमस एल फ्राइडमैन ने इस इलाके का दौरा किया. उनकी ख़बरों ने दुनिया को इस घटना के बारे में जानकारी दी कि यहां हज़ारों लोगों को मारा गया है.
तीन बार पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित हो चुके फ्राइडमैन और फिस्क न्यूयॉर्क टाइम्स के जानेमाने स्तंभकार हैं. उन्होंने लिखा था कि सीरियाई सेना की गाड़ियां बमबारी की गई इमारतों के मलबे से ऊपर से हो कर गुज़रीं ताकि यहां कोई इमारत खड़ी ना दिखे.
उन्होंने लिखा, "ऐसा लगता है जैसे पूरे शहर को एक ही सप्ताह में बार-बार बवंडर ने तबाह किया है, लेकिन ये काम प्रकृति का नहीं था."
इसके लगभग एक साल बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें विस्तृत जांच के आधार पर ये अनुमान लगाया गया कि हमा में 10,000 से 25,000 मौतें हुई थीं.
इस घटना को अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी नहीं मिली क्योंकि उस वक्त दुनिया अलग थी.
ना तो मोबाइल फ़ोन थे, ना ही इंटरनेट. ये एक ऐसी जगह थी जहां ना पत्रकार थे ना ही कोई ख़बर पहुंचती थी.

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हॉथ्रोन कहती हैं कि सीरियाई युद्ध के दौरान 2011 से 2012 के बीच "हामा में ऐसी क्रूरता हुई जिसे छुपाया नहीं जा सका. फ़ोन रिकॉर्डिंग के माध्यम से पूरी दुनिया के हज़ारों लोगों ने इसे देखा था."
"1983 में भी अपील की गई की हत्याओं की ज़िम्मेदारी कोई ले लेकिन इससे संबंधित खबरें काफी देर से आईं."
हॉथ्रोन मानती हैं कि हामा में जो बर्बरता हुई उसके लिए अल-असद ने ही आदेश दिए थे. वो कहती हैं, "वो शायद ऐसा ही करना चाहते थे."
"जिस तरह आज बशर अल-असद जानते हैं कि उनकी सेना और सुरक्षा एजेंट क्या कर रहे हैं, हाफ़िज़ अल-असद भी सब जानते होंगे."
हाफ़िज़ अल-असद अपने जीवन के आख़िरी दिनों में सीरिया के राष्ट्रपति रहे और उन्होंने कभी भी हामा में हुई हत्याओं के संबंध में कोई जवाब नहीं दिया.












