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ग्वाटेमाला ज्वालामुखी.. लावा, राख और तबाही
ग्वाटेमाला की राजधानी से करीब 40 किलोमीटर दूर फ्यूएगो ज्वालामुखी में 3 जून को विस्फोट हुआ था. जिसकी चपेट में आकर 62 लोगों की मौत हुई है.
ज्वालामुखी से निकला लावा बहकर पास के गांवों में पहुंच गया. वहां रह रहे लोगों को बचाने के लिए रात भर बचाव अभियान जारी रहा.
100 साल से भी ज़्यादा वक्त बाद ग्वाटेमाला में ऐसा भयानकर ज्वालामुखी विस्फोट हुआ है. ग्वाटेमाला के राष्ट्रपति ने तीन दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है.
ज्वालामुखी के फटने पर लाल-गर्म चट्टानों और गैस का मिश्रण, जिसे पायरोक्लास्टिक फ्लो भी कहा जाता है, पहाड़ से निकलकर बहता हुआ आस-पास के इलाकों में फैल गया.
पायरोक्लास्टिक फ्लो में लावा तेज़ी से आगे बढ़ता है, जिसकी वजह से लोगों को बचने का मौका नहीं मिल पाता.
फ्यूएगो ज्वालामुखी से लावा तेज़ी से बहकर गांवों में पहुंच गया और घरों में बैठे कई लोग इसमें जलकर मारे गए. सैंकड़ों लोग घायल भी हुए हैं और कई अब भी लापता हैं.
ज्वालामुखी से निकली राख आसमान में कई किलोमीटर ऊपर तक उछली और राजधानी ग्वाटेमाला सिटी में लोगों और चीज़ों पर गिरी.
चार इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षा के लिहाज़ से मास्क पहनने की हिदायत दी गई है. विस्फोट से कूल 1.7 मीलियन लोगों पर असर पड़ा है.
प्रभावित इलाकों के लोग अपने-अपने घरों को छोड़कर अस्थाई राहत शिविरों में शरण ले रहे हैं.
ग्वाटेमाला के हवाई अड्डे का रनवे ज्वालामुखी से निकली राख से भर गया है. इसे हटाने के लिए सेना को लगाया गया है.
इससे पहले फरवरी में भी एक विस्फोट हुआ था, जिसमें निकली राख आसमान में 1.7 किलोमीटर ऊपर तक गई थी. लेकिन इस बार हुए ज्वालामुखी विस्फोट में राख बहुत ज़्यादा निकली.
फ्यूएगो ज्वालामुखी में और विस्फोट होने का खतरा है.
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