अमरीका: बंदूक़ विरोधी रैली में उमड़ी भारी भीड़

वाशिंगटन में 'मार्च फ़ॉर आवर लाइव्स'

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पूरे अमरीका में बंदूक़ों पर सख़्त नियंत्रण की मांग को लेकर छात्रों की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

'मार्च फॉर आवर लाइव्स' के बैनर तले हो रहे इन प्रदर्शनों की रूपरेखा पिछले महीने फ्लोरिडा के एक हाईस्कूल में गोलीबारी की घटना के बाद रखी गई थी.

उस घटना में 17 लोगों की मौत हो गई थी.

सबसे बड़ा मार्च वाशिंगटन में हो रहा है, जिसमें करीब पांच लाख लोगों के शामिल होने के आसार हैं.

इसके अलावा पूरे अमरीका में 800 से ज़्यादा विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं.

वाशिंगटन में बंदूक़ों के ख़िलाफ उतरे लोग

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बंदूक़ों की ख़रीद-बिक्री पर सख़्त कानूनों की मांग

अमरीका में बंदूक़ों पर नियंत्रण की मांग के पक्ष में लंदन, एडिनबरा, जेनेवा, सिडनी और टोक्यो में भी प्रदर्शन हुए हैं.

आयोजकों ने कहा है कि वाशिंगटन में हो रहे मुख्य प्रदर्शन में भीड़ इतनी ज़्यादा है कि 'सिर्फ खड़े होने की जगह' की स्थिति बन सकती है.

प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि इन प्रदर्शनों के ज़रिये बंदूक़ों पर निर्णायक फैसले लेने के लिए अमरीकी राजनेताओं पर दबाव बनाया जाए.

वे असॉल्ट हथियारों की बिक्री पर प्रतिबंध की मांग भी कर रहे हैं.

वाशिंगटन में बंदूक़ विरोधी प्रदर्शनकारी

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व्हॉइट हाउस की ओर से प्रदर्शनकारियों की प्रशंसा

हालांकि इस पर अलग-अलग मत हैं.

अमरीकी संविधान के दूसरे संशोधन के तहत हथियार ख़रीदने को संरक्षण प्राप्त है और हथियारों के पक्ष में काम करने वाले संस्था नेशनल राइफल असोसिएशन (एनआरए) ताक़तवर लोगों को प्रभावित करने में सक्षम मानी जाती है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप सप्ताहांत पर अपने फ्लोरिडा स्थित मार-अ-लागो रिज़ॉर्ट पर हैं.

शनिवार शाम व्हॉइट हाउस ने एक बयान जारी कर 'पहले संशोधन के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते कई साहसी नौजवान अमरीकियों' की प्रशंसा की थी.

वाशिंगटन में बंदूक विरोधी प्रदर्शनकारी

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पार्कलैंड की घटना

व्हॉइट हाउस के बयान में बंदूकों से होने वाली हिंसा को रोकने के लिए सरकारी प्रयासों को भी बताया गया था, मसलन सामान्य हथियारों को असॉल्ट हथियारों में बदल देने वाले बम्प स्टॉक पर रोक लगाने का फैसला और स्टॉप स्कूल वॉयलेंस कानून, जिसके तहत स्कूलों में सुरक्षा सुधारी जाएगी और छात्रों, स्टाफ और स्थानीय पुलिसकर्मियों को बेहतर ट्रेनिंग दी जाएगी.

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आपराधिक पृष्ठभूमि के ब्योरे भी सुधारने की योजना है, ताकि बंदूक़ ख़रीदने वालों की ढंग से जांच की जा सके.

वाशिंगटन की रैली में एरियाना ग्रांडे, माइली सायरस, जेनिफर हड्सन और लिन-मैनुअल मिरांडा जैसी हस्तियों ने यहां परफ़ॉर्म किया.

छात्र नेता और पार्कलैंड की घटना में बाल-बाल बचने वाली एमा गोंज़ालेज़ ने भाषण दिया.

बच्चों और नौजवानों की ख़ासी संख्या वाली भीड़ ने हाथों में 'बच्चों को बचाओ, बंदूक़ों को नहीं' और 'क्या अगला नंबर मेरा है' जैसे बैनर ले रखे थे.

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वाशिंगटन में मौजूद बीबीसी संवाददाता जॉन सोपेल के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने स्कूल गोलीबारी में मारे गए छात्रों और शिक्षकों की तस्वीरें लगा रखी हैं.

वाशिंगटन में बंदूक विरोधी प्रदर्शनकारी

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बंदूक़ समस्या से जूझता अमरीका

अमरीका के लचीले बंदूक़ कानूनों की वजह से वहां बंदूक़ें ख़रीदना और उसे साथ लेकर चलना आसान है.

अमरीका में आम लोगों की ओर से बेक़सूरों पर गोलीबारी की घटनाएं बरसों से हो रही हैं.

लेकिन हाल के वर्षों में ताक़तवर हथियारों की उपलब्धता से सबसे जघन्य घटनाएं सामने आई हैं.

पिछले साल ही लास वेगास में अमरीकी इतिहास की सबसे भीषण गोलीबारी की घटना हुई थी, जिसमें 58 लोगों की जान चली गई थी.

इसके बाद एक बार फिर और इस बार कुछ अधिक पुरज़ोर तरीक़े से, वो बहस उभरी कि अमरीका के बंदूक़ क़ानून क्या इतने लचीले हैं कि वे मानवता पर संकट बन गए हैं.

2017 के एक सर्वेक्षण की मानें तो क़रीब 40 फीसदी अमरीकियों ने माना था कि उनके पास बंदूक़ है, या उनके घर में किसी के पास बंदूक़ है.

अमरीका में 2016 में बंदूक़ों से हुई हत्याओं और सामूहिक हत्याओं में ग्यारह हज़ार लोगों की मौत हुई.

दुनिया में बंदूक़ से हुए नरसंहारों में से 64 फीसदी अकेले अमरीका में हुई हैं.

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