ईरान में विरोध प्रदर्शन, दस लोगों की मौत

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ईरान के सरकारी टीवी के मुताबिक देश में हो रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक दस लोगों की मौत हो चुकी है.
हालांकि टीवी रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया है कि ये मौतें कब और कहां हुई हैं.
इससे पहले छह मौतों की रिपोर्टें थीं जिनमें दो लोगों की मौत बीती रात इज़ेह शहर में हुई गोलीबारी में हुई थी.
राष्ट्रपति हसन रूहानी के लोगों से शांति बनाए रखने की अपील के बावजूद प्रदर्शन लगातार हो रहे हैं.
तेहरान के इग़लेब चौक पर प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. पश्चिम के करमनशाह और ख़ुर्रमाबाद, उत्तर-पश्चिम में शाहीनशहर और उत्तरी शहर ज़नजान में भी प्रदर्शन होने की रिपोर्टें हैं.
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गुरुवार को ईरान के दूसरे सबसे बड़े शहर मशहद से शुरू हुए ये प्रदर्शन साल 2009 के बाद से सबसे बड़े प्रदर्शन हैं. 2009 के ग्रीन मूवमेंट को सरकार ने बर्बरता से कुचल दिया था.
कहां हुईं मौतें?
सरकारी टीवी के दस लोगों की मौत की पुष्टि करने से पहले तक छह लोगों के मारे जाने की रिपोर्टें थीं.
- दो लोग पश्चिमी शहर दोरूद में शनिवार को मारे गए थे. सरकार ने इन मौतों के लिए सुन्नी चरमपंथियों और विदेशी ताक़तों को ज़िम्मेदार बताया था.
- दोरूद में ही एक अग्निशमन गाड़ी पर 'दंगाइयों' के क़ब्ज़ा करने और लोगों पर चढ़ा देने की घटना में दो और लोग मारे गए.
- स्थानीय सांसद के मुताबिक बीती रात दक्षिण-पश्चिमी शहर इज़ेह में गोलीबारी में दो लोगों की मौत.
राष्ट्रपति की चेतावनी

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प्रदर्शनों के बाद अपने पहले संदेश में हसन रूहानी ने कहा था कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
उन्होंने अपने भाषण में ईरान की अर्थव्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानियों, पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को स्वीकार किया था.
लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल का बचाव किया था.
उन्होंने कहा था कि ईरान के नागरिक सरकार के प्रति अपने असंतोष का इज़हार करने और प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं.
कैसी है प्रशासन की प्रतिक्रिया?

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अपने भाषण में राष्ट्रपति रूहानी ने लोगों के असंतोष के कारणों को तो स्वीकार किया लेकिन ये भी कहा कि सरकार हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगी. उन्होंने कहा, "सार्वजनिक संपत्तियों को नुक़सान पहुंचाने वालों, क़ानून व्यवस्था को भंग करने वालों और समाज में असंतोष पैदा करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
ईरान के ताक़तवर बलों ईरान रिवॉल्यूश्नरी गार्ड्स कोर्प (आईआरजीसी) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर राजनीतिक असंतोष ज़ाहिर रहा तो प्रदर्शनकारियों को देश की 'सख़्त ताक़त' का सामना करना पड़ेगा.
आईआरसीजी देश का ताक़तवर बल है जो सर्वोच्च नेता के आदेशों का पालन करता है और जिसका उद्देश्य देश की इस्लामिक व्यवस्था को बरक़रार रखना है.
संवाददाताओं का कहना है कि यदि रिवॉल्यूश्नरी गार्ड सड़कों पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए उतरते हैं तो इससे हालात और ज़्यादा तनावपूर्ण हो जाएंगे.
रिपोर्टों के मुताबिक देश भर में अब तक क़रीब चार सौ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा चुका है. शनिवार रात राजधानी तेहरान में ही 200 लोग हिरासत में लिए गए थे.
ट्रंप और रूहानी की ज़बानी जंग

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मंत्रिमंडल की एक बैठक में राष्ट्रपति रूहानी ने कहा, ''कुछ अरब देश ऐसे भी हैं जो ईरान के दोस्त कभी नहीं रहे. आजकल ये देश बहुत ख़ुश हैं. हमें सावधान रहना चाहिए, एक राष्ट्रीय सुरक्षा ही तो है, जो हमारी सबसे बड़ी दौलत है.
इससे एक दिन पहले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ट्वीट किया था कि ईरान में जो हो रहा है, उसे सारी दुनिया देख रही है.
एक और ट्वीट में ट्रंप ने कहा, "ईरान, जहां हर घंटे मानवाधिकारों के कई उल्लंघन होते हैं और जो आतंकवाद का समर्थक है, ने अब इंटरनेट भी बंद कर दिया है ताकि शांतिपूर्वक प्रदर्शनकारी एक दूसरे से बात न कर सके. ये अच्छी बात नहीं है."
ईरान के राष्ट्रपति रुहानी ने अपने बयान में इसका भी जबाव दिया है. रूहानी ने कहा है कि ट्रंप सर से लेकर पैर तक ईरान के दुश्मन हैं.
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ट्रंप ने एक ट्वीट में ये भी कहा था कि 'आख़िरकार ईरानी समझदार हो रहे हैं और जान रहे हैं कि उनका पैसा कैसे चुराया जा रहा है और आतंकवाद पर कैसे लुटाया जा रहा है.'
इसके जवाब में रूहानी ने कहा, 'अमरीका में ये जो सज्जन हैं, जो आजकल हमारे देश के साथ सहानुभूति जता रहे हैं, ऐसा लगता है कि वो ये बात भूल गए हैं कि कई महीने पहले उन्होंने ही ईरान को चरमपंथी देश कहा था. लेकिन सच तो ये है कि ये आदमी सिर से लेकर पैर तक ईरान का दुश्मन है.''
प्रदर्शनः आगे क्या होगा?
बीबीसी फ़ारसी की संवाददाता कसरा नाजी के मुताबिक ईरान में लोगों के आर्थिक हालात ख़राब हो रहे हैं और असंतोष बेहद ज़्यादा बढ़ रहा है. बीबीसी फ़ारसी की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक बीते दस सालों में ईरान के आम लोग पंद्रह प्रतिशत तक ग़रीब हो गए हैं.
अभी तक प्रदर्शनों में युवा पुरुष ही शामिल हैं और ये प्रदर्शन छोटे हिस्सों में हो रहे हैं. युवा ईरान से मौलवियों के शासन को ख़त्म करना चाहते हैं. लेकिन बीते कुछ दिनों में ये प्रदर्शन देश के छोटे शहरों में भी फैल गए हैं और आशंका है कि ये और बढ़ सकते हैं.
लेकिन इन प्रदर्शनों का कोई नेता नहीं है. विपक्षी नेताओं को बहुत पहले ही ख़ामोश कर दिया गया है या निर्वासित कर दिया गया है.
कुछ प्रदर्शनकारी देश में फिर से शाही शासन लौटने की मांग कर रहे हैं. ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पेहलवी, जो फिलहाल अमरीका में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं, ने एक बयान जारी कर प्रदर्शनों का समर्थन किया है.
लेकिन ऐसे संकेत हैं कि उन्हें भी प्रदर्शन आगे किस दिशा में जाएंगे इसका बहुत ज़्यादा अंदाज़ा नहीं है.
(लंदन से टीवी, रेडियो और ऑनलाइन कार्यक्रम प्रसारित करती करने वाली बीबीसी फ़ारसी सेवा ईरान में प्रतिबंधित है. बीबीसी सेवा के कर्मचारी और उनके परिवार ईरानी सरकार की निगरानी में रहते हैं और उन्हें अक्सर सवालों और उत्पीड़न का सामना करते हैं.)
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