ईरान में प्रदर्शन के दौरान हिंसा और आगज़नी
ईरान में एक वीडियो फुटेज से पता चला है कि वहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान कुछ जगहों पर हिंसा और आगज़नी की घटनाएं हुई हैं.
'अवैध रूप से जुटने' के ख़िलाफ़ प्रशासन की चेतावनी के बावजूद ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहे.
तेहरान यूनिवर्सिटी में प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली ख़मेनेई से सत्ता छोड़ने के लिए कहा जहां पुलिस के साथ उनकी झड़पें हुईं है.
प्रदर्शनकारियों ने गृह मंत्री की उस चेतावनी को नज़रअंदाज़ कर दिया जिसमें कहा गया था कि नागरिकों को 'अवैध रूप से जुटने' से बचना चाहिए.
इस बीच ईरान में सरकार-समर्थक हज़ारों लोग भी सड़कों पर उतरे हैं.
ईरान के गृहमंत्री ने लोगों से कहा है कि वो विरोध प्रदर्शनों में शामिल ना हों 'क्योंकि इससे उनके लिए और अन्य नागरिकों के लिए समस्याएं पैदा होंगी.'
'विदेशी ताक़तों का हाथ'
ईरान के अधिकारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के लिए विदेशी ताक़तों को ज़िम्मेदार बता रहे हैं.
उधर अमरीका में ट्रंप प्रशासन ने ईरान को चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ उसकी कार्रवाई को सारी दुनिया देख रही है.
ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बयान को 'कपटपूर्ण और अवसरवादी' बताया है.
'आंखें खोलने वाले तीन दिन'

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बीबीसी फ़ारसी सेवा के संवाददाता कासरा नाजी का कहना है कि सरकार के समर्थन में हुई रैलियों के मुक़ाबले विरोध में हुए प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.
उनका कहना है कि सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों की संख्या हर दिन बढ़ती जा रही है.
दिन ढलने के बाद भी कई शहरों में विरोध प्रदर्शन होने की ख़बरें मिल रही हैं. कुछ जगहों पर पुलिस के साथ झड़पें भी हुई हैं.
इन सभी प्रदर्शनों में जो एक बात समान है, वो ये है कि 'प्रदर्शनकारी ईरान में मौलवियों का शासन ख़त्म करने की मांग' कर रहे हैं.

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विरोध प्रदर्शनों के बढ़ते दायरे के पीछे सिर्फ़ बढ़ती कीमतें और बेरोज़गारी ही मुद्दा नहीं हैं, ये तीन दिन सरकार के लिए 'आंखें खोलने वाले' हैं.
सरकार भी इसे समझ रही है और ऐसा कोई काम नहीं कर रही है जिसकी वजह से प्रदर्शनकारी और भड़क जाएं.














