ब्लॉग: '5 साल में एक बार वोट देते हो, अहसान नहीं करते!'

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- Author, वुसतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, पाकिस्तान से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
अगले साल पाकिस्तान पीपल्स पार्टी 50 साल की हो जाएगी.
अगर पाकिस्तान के 70 साल का इतिहास देखा जाए तो सिर्फ़ एक ही पार्टी दिखाई पड़ती है जिसके राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने अयूब खान से लेकर ज़िया उल हक़ तक फौजी तानाशाही को टक्कर दी, जेलें भरी, कोड़े खाये, फांसियों पर झूले, तानाशाही के खिलाफ़ खुद को आग लगाई पर इस मुल्क में राजनीति को ड्रॉइंगरूम से निकालकर सड़क और गली में आम आदमी के हाथ में ज़रूर दे दिया.
यही एक राजनीतिक पार्टी थी जिसमें आज भी ज़ुल्फिकार अली भुट्टो और उनकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो का साया है, क्योंकि उन दोनों ने एक आदर्श की खातिर जान दे दी, पिता फांसी पर झूल गए और बेटी को आतंकवाद ने छीन लिया.

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ताबूत की आखिरी कील
पीपल्स पार्टी तीन बार सत्ता में आई मगर एक बार ही 5 वर्ष पूरे कर पाई. फिर पीपल्स पार्टी के साथ वो हो गया जो कोई तानाशाह पूरी ताकत लगा कर भी ना कर सका.
पीपल्स पार्टी जो 1970 में पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे पंजाब की सबसे लोकप्रिय पार्टी थी और जिसकी जड़ें पूरे मुल्क में यहां से वहां तक थीं, आज वो सिर्फ एक प्रांत यानी सिर्फ़ सिंध की पार्टी बन कर रह गई है.
आखिरी कील पिछले महीने लाहौर में कौमी असेंबली के उस चुनाव के दौरान ठुक गई जो नवाज़ शरीफ के प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के कारण खाली हुआ था. नवाज़ शरीफ़ की पत्नी कुलसुम नवाज़ 60,000 से अधिक वोट लेकर जीत गईं.

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'तुम्हारे वोटों पर पेशाब करता हूं'
इमरान ख़ान की तहरीक-ए-इंसाफ ने 48,000 वोट लिए और पीपल्स पार्टी को बस 1400 वोट मिले. सिंध में पीपल्स पार्टी पिछले 9 महीने से इसलिए हुकूमत कर रही है क्योंकि उसे चुनौती देने के लिए कोई दूसरी सियासी ताकत नहीं.
इसका असर ये हुआ है कि नाम तो भुट्टो का है पर पार्टी का भुट्टो के 'आवाम दोस्त' नज़रिए से दूर-दूर का संबंध नहीं. दिमाग सातवें आसमान पर है.
पार्टी अध्यक्ष आसिफ़ अली ज़रदारी की बहन फरियाल तालपुर ने एक महीने पहले सिंध में एक चुनावी रैली में तकरीर करते हुए कहा, "शहदादकोट के वासियों कान खोल कर सुन लो, एक ही चुनाव चिह्न है यानी तीर. सारे तमाशे बंद करो और सिर्फ तीर को वोट दो. अगर किसी के सिर में कोई और कीड़ा कुलबुला रहा है तो अपने दिमाग से फौरन निकाल दें."

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पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का बुरा हाल
सिंध असेंबली के एक सदस्य बुरहान चांडियो ने अपने गांव में आवाम की भीड़ से कहा, "तुम कौन सा एहसान करते हो हम पर, बस 5 साल में एक बार वोट ही तो देते हो."
सिंध असेंबली के स्पीकर अगाह सिराज दुरानी ने अपने गांव वालों से दो दिन पहले कहा, "तुम वोट देने ना देने की मुझसे बात ना करो, मैं तुम्हारे वोटों पर पेशाब करता हूं."
एक दिन ज़ुल्फिकार अली भुट्टो और बेनज़ीर भुट्टो की पार्टी ऐसे लोगों के हाथों में चली जाएगी, ये किसी ने सोचा भी नहीं था.
नतीजा ये है कि पाकिस्तान में अब कोई ऐसी पार्टी नहीं बची जो खुद को चारों सूबों की पार्टी कह सके.
जब आवामी सियासत के वारिसों की ये नज़र हो तो फिर किसी वर्दी या बिना वर्दी तानाशाह को जम्हूरियत दुश्मनी का इल्ज़ाम देना बनता नहीं है.












