सीरिया पर अमरीकी हमले के बाद होगा तीन मुद्दों पर असर

सीरिया पर अमरीका का मिसाइल हमला.

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सीरिया में गृह युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार अमरीका ने उसके सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया है. इसे राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की विदेश नीति में आया बड़ा बदलाव बताया जा रहा है.

गुरुवार रात सीरिया के एक हवाई अड्डे पर हुए मिसाइल हमले पर पूरी दुनिया में प्रतिक्रिया हो रही है.

इस हमले का सीरिया और अंतरराष्ट्रीय जगत पर क्या प्रभाव पड़ेगा. और क्या परिणाम होंगे, आइए जानते हैं.

अमरीका और रूस के संबंध

सीरियाई सेना की ओर से विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाक़े में किए गए कथित रासायनिक हमले के बाद अमरीका ने हमला बोला है.

इस हमले के बाद से पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर सीरिया संकट से निपटने के लिए बनाए गया एक अस्थिर किस्म का संतुलन प्रभावित हो सकता है.

सीरिया पर अमरीका का मिसाइल हमला.

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अमरीकी विदेश विभाग के पूर्व उप सचिव फीलिप जे क्राउले का कहना था, '' ओबामा ने सीरिया में अमरीकी हितों को परिभाषित करने के लिए बहुत सावधानी बरती. वो मीडिल ईस्ट के दलदल और फंसे बिना ही इस्लामिक स्टेट को हराना चाहते थे.''

इस मिसाइल हमले से पहले अमरीका ने ब्रिटेन और फ्रांस की मदद से सीरिया में इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हवाई हमले किए थे. लेकिन राष्ट्रपति बशर अल असद की सेना पर सीधा हमला नहीं किया था.

इस नीति को पीछे छोड़ते हुए डोनल्ड ट्रंप ने इस इलाक़े में रूस के सहयोगी पर सीधा हमला करने का फ़ैसला किया.

क्या यह रूस और अमरीका के रिश्तों को नुक़सान पहुंचाएगा.

ये दोनों ही देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य हैं. माना जाता है कि रूस का सीरिया में रणनीतिक हित है. अपनी सीमाओं के बाहर सीरिया में ही रूस का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है.

रासायनिक हमले में घायल व्यक्ति.

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असद सरकार को स्थिर करने के लिए 2015 में शुरू किए गए हवाई अभियान में रूस उसका मदगार बना हुआ है. सीरिया पर अमरीका की सीधी कार्रवाई के बाद से रूस ने जबरदस्त प्रतिक्रिया दी है.

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री त्पेस्कोव ने एक बयान में कहा, '' अमरीकी कदम से रूस और अमरीका के रिश्तों को काफी नुक़सान पहुंचा है, जो कि पहले से ही काफी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में हैं.''

इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई

इस हमले का दूसरा संभावित परिणाम इस इलाक़े में अमरीका के मुख्य लक्ष्य पर पड़ेगा, जो कि तथाकथित इस्लामिक स्टेट को हराने का है.

सीरिया में गृह युद्ध के दौरान मची तबाही का एक दृश्य.

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न्यूयार्क टाइम्स के संवाददाता डेविड सैंजर ने लिखा, '' अगर सीरिया ढह जाता है तो यह इस्लामिक आतंकियों के स्वर्ग बन सकता है, ट्रंप निश्चित रूप से इससे बचना चाहेंगे.''

जेहादी ग्रुपों की इराक़ और सीरिया के एक चौथाई इलाक़े से नियंत्रण हटने से इस्लामिक शक्तियां हाल के महीने में कमज़ोर हुई हैं.

सीरिया में लगे एक पोस्टर पर ब्लादिमीर पुतिन और बशर अल असद की फोटो.

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सैंजर ने लिखा है, '' अभी यह साफ़ नहीं है कि विभाजित सीरिया से लड़ाकों को फ़ायदा पहुंचेगा या नहीं.''

अगर अमरीका सीरिया के आंतरिक संघर्ष में सीधे हस्तक्षेप करता है तो इस्लामिक स्टेट के खिलाफ़ उसकी लड़ाई कमजोर हो सकती है.

ट्रंप की नीतियों में बदलाव

डोनल्ड ट्रंप प्रशासन का यह फ़ैसला उनके पहले दिए बयानों और इस इलाक़े के लिए उनके पूर्ववर्ती राष्ट्रपति बराक ओबामा की नीति में आया बड़ा बदलाव है.

सीरिया पर हमले के बाद हालात की समीक्षा करते राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप.

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सीरिया में रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल की लाल रेखा तय करने के बाद भी, एक रासायनिक हमले में 1400 सौ लोगों के मारे जाने के आरोपों पर ओबामा ने असद सरकार के खिलाफ सैन्य हमला न करने का फ़ैसला किया था.

वहीं तथाकथित रासायनिक हमले के बाद ट्रंप ने कहा, '' मैं आपसे कहना चाहता हूं कि कल बच्चों पर हुए रासायनिक हमले ने मेरे ऊपर बहुत प्रभाव डाला है.''

उन्होंने कहा, '' सीरिया और अल असद के प्रति मेरा रुख बहुत बदल गया है. अब हम बहुत ही अलग स्तर से बात कर रहे हैं.''

वहीं विदेश मंत्री रेक्स टिलर्सन ने बाद में समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में इस बात से इनकार किया कि सीरिया को लेकर अमरीकी नीति में कोई बदलाव आया है.

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