अमरीकी वीज़ा पर ट्रंप का नया फरमान: 5 ख़ास बातें

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
मुसलमान बहुल देशों से अमरीका आनेवालों पर रोक लगाने संबंधित राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश को पहले के मुक़ाबले कुछ हद तक नर्म माना जा रहा है लेकिन कई मानवाधिकार गुट अभी भी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं.
देखा जाए तो कम से कम पांच बातें हैं इस आदेश में जो पहले आदेश से अलग हैं.
- इस बार प्रतिबंधित देशों की सूची में छह देश हैं. विदेश विभाग और रक्षा मंत्रालय की सलाह पर इराक़ को इसमें नहीं शामिल किया गया है. फ़िलहाल ये आदेश सीरिया, लीबिया, ईरान, सोमालिया, सूडान और यमन पर लागू होगा.
- इस आदेश में इन देशों से आनेवालों के पास अगर पहले से ग्रीन कार्ड या वीज़ा है तो उन्हें नहीं रोका जाएगा. पिछली बार वीज़ाधारकों को भी रोका गया था जिसके बाद पूरी दुनिया में हंगामा मच गया था.
- सीरिया से आनेवाले शरणार्थी जिन्हें पहले से मंज़ूरी मिल चुकी है उन्हें नहीं रोका जाएगा और साथ ही सीरियाई शरणार्थियों पर भी दूसरे देशों से आनेवाले शरणार्थियों की तरह 120 दिन तक की रोक लागू होगी. पहले आदेश में ये रोक अनिश्चकालीन थी.
- इस बार ये आदेश फ़ौरन लागू किए जाने की बजाए दस दिनों के बाद यानी 16 मार्च से लागू होगा. माना जा रहा है कि इससे एयरपोर्ट्स पर अफरातफ़री को रोका जा सकेगा और तमाम एजेंसियां एक सुनियोजित योजना और तैयारी के साथ इसे अंजाम दे सकेंगी.
- इस बार प्रतिबंधित मुसलमान बहुल देशों से ईसाई शरणार्थियों को आने देने की छूट नहीं दी गई. माना जा रहा है कि ये इसलिए है कि कोई अदालत में ये चुनौती नहीं दे सके कि ये आदेश धर्म के आधार पर भेदभाव कर रहा है.
पिछले आदेश के बाद कई रिपब्लिकंस ने भी इसकी ख़ासी आलोचना की थी लेकिन इस बार उनकी तरफ़ से काफ़ी हद तक एक मौन सहमति दिखी है.
वहीं मानवाधिकार गुटों का कहना है कि ये एक नए रूप में मुसलमानों पर लगाया गया प्रतिबंध है.
ऐमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि इससे हज़ारों परिवारों में डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा होगा और ये आदेश एक बार फिर से मुसलमानों के खिलाफ़ नफ़रत को एक नीति की शक्ल देगा.














