वाशिंगटन डायरी: ये आज़माइए 'ट्रंप' के दिल में जगह पाइए !

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वाशिंगटन
इन दिनों अमरीकी कूटनीति ट्विटर के खुले चौराहे पर सिर्फ़ 140 ठुमकों में अपने जलवे दिखा रही है.
जिस दिन से राजा ट्रंप कुर्सी पर बैठे है उसी दिन से विदेश विभाग ने अपनी रोज़ाना होनेवाली प्रेस ब्रीफ़िंग बंद कर रखी है. सही भी है. क्या पता कि वो कुछ कहें और ट्रंप का ट्वीट कुछ और कहे.
कोरिया हो या सीरिया, नैटो हो या चीन, ट्रंप की विदेश नीति किधर जाएगी ये किसी के पल्ले नहीं पड़ रही. भारत और पाकिस्तान में भी सुना है साहब लोग बाल नोच रहे हैं.
तो मैंने सोचा थोड़ी सी आपकी मदद कर दूं. इतना तो बनता है न बॉस!

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ट्रंप का दिल जीतने के पांच अचूक नुस्ख़े!
पहला, ट्रंप के फ़्लोरिडा वाले मारालागो क्लब की मेंबरशिप फ़ौरन ले लें. चुनाव जीतने से पहले मेंबरशिप की फ़ीस थी एक लाख डॉलर अब दो लाख की हो गई है.
वहां ट्रंप हमेशा खुशमिज़ाज रहते हैं, झप्पियां-शप्पियां वाले मूड में. वहां अगर कोई शादी हो रही है तो पहुंचकर दुल्हा-दुल्हन के साथ सेल्फ़ी ले लेते हैं, मेंबरों से कहते हैं---"अरे कल आना यहां, कई बड़े-बड़े कैबिनेट पदों के उम्मीदवारों के इंटरव्यू ले रहा हूं. बड़ा मज़ा आएगा."
तो बस मौका देखिए और एफ-16 हो या एच-1बी अर्ज़ी डाल दीजिए. मूड में हुए तो वहीं काम हो जाएगा.
दूसरा नुस्खा
अच्छा, खाने में आपको क्या पसंद है? अपनी पसंद घर पर रख कर आईए.
ट्रंप की फ़ेवरिट है ब्रेड में लगाकर बीफ़ का भुर्ता और थोड़ा सा अचार.
एक बार अपने ख़ास दोस्त गवर्नर क्रिस क्रिस्टी और कुछ लोगों के साथ बैठे ट्रंप ने मेन्यू आया तो कहा--"बाकी लोगों को जो लेना हो लें, मेरे और मेरे दोस्त के लिए तो बस मीटलोफ़ यानि बीफ़ और ब्रेड का सैंडविच ले आओ."
क्या कहा? बीफ़ से परेशानी है. अरे हां, आपने तो बैन लगा रखा है. अरे सर पाकिस्तान वाले साहब तो यहां नंबर बना लेंगे. साथ में निहारी चखवा दिया तो ट्रंप तो उनके मुरीद बन जाएंगे. देख लें, एक तरफ़ देश, दूसरी तरफ़.....अब क्या कहूं.

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तीसरी बात, ट्रंप साहब को अपना नाम बहुत अच्छा लगता है, यहां तक कि उनके क्लब में जो खाने की चीज़ें मिलती हैं उनके भी नाम पर ट्रंप की मुहर है---ट्रंप मीटलोफ़, थ्री लेयर ट्रंप चॉकलेट केक, वगैरह-वगैरह.
तो आपको बस ये करना है कि एक-दो सड़कों के नाम बदल दीजिए---ग्रैंड ट्रंक रोड को ग्रैंड ट्रंप रोड कर दीजिए, कौन सा शेरशाह सूरी मुकदमा करने आएंगे.
दिल्ली में मायावती जी की जो मूर्तियां हैं न उनमें से एक दो की जगह मेलैनिया जी की मूर्ति लगवा दीजिए लेकिन इसके लिए यूपी चुनाव के नतीजों तक रूक जाइएगा.
किसी दूर-दराज़ के रिश्तेदार के यहां नाती-पोता पैदा हुआ हो तो उसका नाम ट्रंप रखवा दीजिए--ट्रंप त्रिवेदी. कितना अच्छा लगता है, नहीं?
और बेईमान पत्रकारों से कहिएगा कि बड़ी-बड़ी सुर्खियों में छापें--एक पूरे गांव ने अपने बेटों के नाम ट्रंप और बेटियों के नाम मेलानिया और इवांका रखा.
ये ख़बर देखकर तो ट्रंप अपने छोटे-छोटे हाथों से आपको ऐसा जकड़ेंगे कि कभी छोड़ेंगे नहीं.

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चौथी बात, गोल्फ़ खेलना सीख लें. क्रिकेट का शौक तो है ही आपलोगों को, समझ लीजिएगा हॉकी स्टिक से क्रिकेट खेल रहे हैं, ज़्यादा मुश्किल नहीं होगी.
हर वीकेंड को ट्रंप साहब गोल्फ़ खेलते मिलेंगे और वो कह चुके हैं कि मैं तो बस विदेशी नेताओं के साथ खेलता हूं, ओबामा तो वक़्त ज़ाया करते थे.
आख़िरी नुस्खा
उनके सामने अपनी ग़रीबी और बेचारगी वाला दुखड़ा मत रोईएगा. इस तरह के लोगों को वो लूज़र्स कहते हैं.
उनके सामने तो कुछ इस अंदाज़ में बात कीजिएगा--भाई ये पड़ोसी बहुत तंग कर रहा है. सीमा पार से आतंकवाद करवाता है. वो तो आपका लिहाज़ है वर्ना कब का ठोक देता.
या फिर, अरे जनाब आप कहां सीरिया-इराक में परेशान हो रहे हैं, हमारी फ़ौज किस दिन काम आएगी. हमें कांट्रेक्ट दे दो, पूरा इलाका सपाट कर देंगे. यानि स्ट्रांगमैन वाली इमेज देनी है.
बस एक बात ज़रूर याद रखिएगा. ख़ुद को हमेशा नंबर दो की तरह ही पेश कीजिएगा वर्ना सब किए-कराए पर पानी फिर जाएगा.
और हां इन सबके बाद एक ट्विटर मंत्री ज़रूर बहाल कर लीजिएगा. ट्विटर की समझ आ गई तो विदेश मंत्री की भी ज़रूरत नहीं रहेगी.
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