यमन में कौन किससे लड़ रहा है?

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दक्षिणी यमन के बंदरगाह से सटे अदन शहर में हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 40 सैनिक मारे गए और दर्जनों लोग घायल हुए हैं.
यह आत्मघाती हमला अदन शहर में स्थित अल-सोलबेन सैन्य कैंप के पास हुआ, जहां सैनिक अपना वेतन लेने के लिए कतार लगाए खड़े थे.
इस्लामिक स्टेट ग्रुप ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. एक सप्ताह पहले ही इस्लामिक स्टेट के लड़ाकों ने अदन में 50 सैनिकों को मार दिया था.
सप्ताह भर पहले भी अदन शहर में एक ऐसा ही आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें 48 सैनिक मारे गए थे.

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यमन में कौन-किससे लड़ रहा है
अरब देशों में सबसे गरीब देशों में गिने जाने वाले यमन में क़रीब दो साल से संघर्ष का दौर चल रहा है. यहां अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त, राष्ट्रपति अब्दरब्बू मंसूर हादी की सरकार और उनके प्रति वफ़ादार सैनिकों और शिया हूती विद्रोहियों के बीच मुख्य लड़ाई है.
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हूती विद्रोही यमन में उत्तरी इलाके के शिया मुसलमान हैं. इन्हें देश के पूर्व राष्ट्रपति के वफ़ादार सैनिकों का समर्थन मिल रहा है. वहीं सरकारी सेनाओं को दक्षिणी यमन के कुछ लड़ाकों और पड़ोसी सुन्नी देश सऊदी अरब से सहयोग मिल रहा है.
इस अस्थिरता का लाभ उठाकर अल क़ायदा की यमनी शाखा और इस्लामिक स्टेट भी यमन में ख़ुद को मज़बूत करने में लगे हैं.
ख़ूनी संघर्ष का गंभीर प्रभाव...
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ मार्च, 2015 से अब तक यमन में 6,800 से ज़्यादा लोग इस संघर्ष के चलते मारे गए हैं और क़रीब 35,000 लोग घायल हुए हैं.

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यमन में अब तक मारे गए नागरिकों में क़रीब 60 प्रतिशत लोग हवाई हमलों की वजह से मारे गए हैं.
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