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कांग्रेस कार्यसमिति में नई सरकार पर चर्चा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोनिया गांधी के आवास पर कांग्रेस कार्य समिति की बैठक ख़त्म हो गई है. बैठक में नई सरकार के स्वरुप और चुनावी नतीजों पर चर्चा हुई. बैठक के बाद पार्टी की ओर से कोई औपचारिक प्रेस कॉंफ़्रेंस नहीं हुई लेकिन वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कर्ण सिंह ने दस जनपथ के बाहर पत्रकारों से कहा कि इसमें चुनावों में पार्टी को मिली सफ़लता पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा, "चुनाव परिणाम के बाद देश भर से जुटे नेताओं ने कांग्रेस नेतृत्व को पार्टी की सफ़लता के लिए बधाई दी." जब उनसे पूछा गया कि यूपीए के अलावा किस पार्टी को सरकार में शामिल किया जाएगा तो उनका कहना था, "इस पर कार्य समिति में विचार नहीं होता है. ये फ़ैसला ख़ुद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह करेंगे." सरकार बनाने की तैयारी लोकसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद कांग्रेस ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में नई सरकार बनाने की तैयारियाँ शुरू कर दी हैं. सोमवार के बाद यूपीए नेताओं की औपचारिक बैठक होगी. कांग्रेस संसदीय दल के नेता के चुनाव के लिए नवनिर्वाचित पार्टी सांसदों की बैठक अगले सप्ताह होगी जिसमें मनमोहन सिंह को नेता चुना जाएगा. सोमवार को प्रधानमंत्री ने मौजूदा कैबिनेट की अंतिम बैठक बुलाई है जिसमें लोकसभा भंग करने का फ़ैसला होगा और मनमोहन सिंह अपनी सरकार का इस्तीफ़ा राष्ट्रपति को सौंप देंगे.
उल्लेखनीय है कि 2004 में मनमोहन सिंह ने 22 मई को शपथ ली थी. 15वीं लोकसभा चुनावी मुक़ाबले में यूपीए ने मुख्य विरोधी राष्ट्रीय जनतांत्रिक संगठन (एनडीए) को सत्ता की दौड़ में उसे परास्त कर दिया. साथ ही उसने वाममोर्चा और तीसरे मोर्चे को जनता ने पूरी तरह हाशिए पर धकेल दिया. शनिवार को देर रात तक आए परिणामों के अनुसार कांग्रेस को अकेले 204 सीटें मिली हैं जबकि उसके सहयोगी दल तृणमूल कांग्रेस को 19, द्रमुक को 18 और एनसीपी को 9 सीटें मिली हैं. इसके अलावा कुछ और छोटे सहयोगी दलों की सीटें मिलाकर कांग्रेस गठबंधन को कुल 260 सीटें मिली हैं. इसका अर्थ यह हुआ कि कांग्रेस को बहुमत के लिए मात्र 12 सीटों की ज़रुरत है. अगर इसमें राष्ट्रीय जनता दल की चार सीटें और समाजवादी पार्टी की 22 सीटें जोड़ दी जाए तो उसे आसानी से बहुमत मिल रहा है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि मनमोहन सिंह ही देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी को 116 सीटें मिली हैं जबकि उसके सहयोगी दल जनता दल यू को 20,शिवसेना को 11, शिरोमणि अकाली दल को चार, राष्ट्रीय लोकदल को चार और असम गणपरिषद को एक सीट मिली है. भारतीय जनता पार्टी ने परिणामों के आने के बाद हार स्वीकार की है और कांग्रेस पार्टी को बधाई दी है.
पार्टी प्रवक्ता अरुण जेटली ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने विपक्ष के नेता का पद छोड़ने की मंशा ज़ाहिर की है. लेकिन पार्टी ने इसे मंज़ूरी नहीं दी है. तीसरे मोर्चे को सबसे अधिक नुक़सान हुआ है जहां वाम मोर्चे को मात्र 24 सीटों से संतोष करना पड़ा है. इसके अलावा अन्नाद्रमुक को 9, एमडीएमके को 1, तेलुगू देशम को छह, बीजू जनता दल को 14 और जनता दल एस को चार सीटों से संतोष करना पड़ा है. यूपीए की सत्ता में वापसी पर बेहद प्रसन्न सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने इसे स्थिर और मजबूत सरकार के लिए जनादेश बताया. 'काम का इनाम' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यूपीए की जीत पर देश की जनता को धन्यवाद दिया है और कहा है कि ये सरकार के अच्छे काम का इनाम है. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा, "भारत के लोगों ने बड़ी बुलंदी से अपनी बात कही है. सांप्रदायिक घृणा से मुक्त प्रशासन या सरकार के लिए उन्होंने मत दिया है." मनमोहन सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को मंत्रिमंडल का सदस्य बनने के लिए कहेंगे. दूसरी ओर सुल्तानपुर में संवाददाताओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि उनका काम संगठन को मज़बूत बनाना है. उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश देश का सबसे अगली पंक्ति का राज्य रहा है और इसे फिर से पहले स्थान पर लाना है. 20-21 सीटों की जीत राज्य में पार्टी के फिर से खड़े होने की शुरुआत भर है. यह सिलसिला अब और आगे बढ़ेगा." राहुल ने कहा कि वे जीतें या हारें, इससे उन्हें फ़र्क नहीं पड़ता. उनका काम संगठन को मज़बूत करना है और वे इस काम को ऐसे ही करते रहेंगे. |
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