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हिमाचल में एक बार फिर सीधी लड़ाई | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिम की चादर में ढके और सुंदर वादियों वाले राज्य हिमाचल प्रदेश का वातावरण जितना शांत है, वहाँ की राजनीति की तस्वीर भी कमोबेश वैसी ही है. शिमला, कांगड़ा, मंडी और हमीरपुर, मात्र चार संसदीय सीटों वाले हिमाचल प्रदेश में आख़िरी चरण के दौरान 13 मई को मतदान होना है. वहाँ मुक़ाबला एक बार फिर सीधे तौर पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच है. पिछले लोकसभा चुनाव में तो कांग्रेस ने चार में से तीन सीटें जीतकर अपना परचम लहराया था. लेकिन इस बार चुनौती कड़ी है. सबसे हाई-प्रोफ़ाइल लड़ाई हमीरपुर और मंडी सीट पर है. मंडी पर इस बार शाही मुक़ाबला है. पाँच बार मुख्यमंत्री रह चुके और शाही राजघराने से तालुल्क़ रखने वाले वीरभद्र सिंह कांग्रेस के उम्मीदवार हैं तो भाजपा की ओर से कुल्लू राजघराने के महेश्वर सिंह हैं. वीरभद्र सिंह 80 और 90 के दशक में कई बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं और 2007 के विधानसभा चुनाव में वे हार गए थे. इससे पहले वे लोक सभा के सदस्य भी रह चुके हैं. मंडी पर आमतौर पर शाही परिवारों का दबदबा रहा है. मौजूदा सांसद और वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह का संबंध भी शाही परिवार से है. 1952 में पहले लोकसभा चुनाव में भी कपूरथला घराने की राजकुमरी अमृत कौर जीती थीं. कैबिनेट रैंक वाली वे भारत की पहली महिला मंत्री थीं. धूमल सरकार की परीक्षा उधर हमीरपुर चुनाव को न सिर्फ़ मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल सरकार की लोकप्रियता की कसौटी पर परखा जा रहा है बल्कि उनके बेटे अनुराग ठाकुर का राजनीतिक भविष्य भी इससे जुड़ा है.
पिछले साल अनुराग ने हमीरपुर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था. लेकिन इस बार मुश्किल ये है कि अनुराग ठाकुर का मुक़ाबला भाजपा में ही रह चुके और अब कांग्रेस नेता नरिंदर ठाकुर से है. नरिंदर ठाकुर जगदेव चंद के बेटे हैं जिन्होंने शांता कुमार के साथ मिलकर 70 के दशक में हिमाचल में भाजपा का आधार तैयार किया था. वैसे पिछले पाँच सालों में हमीरपुर का ये चौथा लोकसभा चुनाव है. 2004 में यहाँ से भाजपा के सुरेश चंदेल जीते थे लेकिन संसद में प्रश्न पूछने के लिए घूस लेने का आरोप लगने के बाद वे सांसद नहीं रहे. उसके बाद 2007 में भाजपा के प्रेम कुमार धूमल यहाँ से लोकसभा चुनाव जीते. लेकिन उसी वर्ष हिमाचल में विधानसभा चुनाव के बाद वे मुख्यमंत्री बन गए और पिछले साल हुए चुनाव में उनके बेटे लोकसभा चुनाव जीते. शिमला और कांगड़ा की लड़ाई इसके अलावा शिमला और कांगड़ा से कांग्रेस ने धनी राम और चंदर कुमार को खड़ा किया है तो भाजपा ने वीरेंदर कश्यप और राजन सुशांत को. यहाँ ये जानना दिलचस्प होगा कि हिमाचल का सबसे ऊँचा मतदान केंद्र लाहौल और स्पीती ज़िले में 15000 फ़ीट की ऊँचाई पर है और यहाँ केवल 321 मतदाता हैं. चुनाव आयोग ने उम्मीद जताई है कि अधिकारी बिना अड़चन वहाँ पहुँच पाएँगे. लाहौल और स्पीती के कई इलाक़े 13000 फ़ीट की ऊँचाई पर हैं और यहाँ मतदान करवाने में दिक़्क़त होती है. किन्नौर ज़िले के एक मतदान केंद्र पर मात्र छह ही मतदाता हैं. हिमाचल में कुल 31 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. |
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